प्रेषक : गुरप्रीत सिंह

हेलो !

आप सब भाभियों और औरतों को चूतों को मेरे नौ इंच के लौड़े का खड़े हो कर प्रणाम !

आप सबने मेरा पहला सेक्स, मेरी सच्ची कहानी को बहुत पसंद किया, मुझे बहुत सारी मेल भी आई, बहुत अच्छा लगा कि आप सबने मेरी कहानी को बहुत पसंद किया। वैसे मैं पंजाब का रहने वाला हूँ लेकिन परिवार शिफ्ट होने की वजह से मुझे भी दिल्ली आना पड़ा। मैं दक्षिण-दिल्ली में रहता हूँ। अब मैं आपको एक और सच्ची कहानी बताना चाहता हूँ, जो तब की है जब मैं दिल्ली में नया-नया आया था, हमने नया घर लिया था, आस-पास का माहौल बहुत अच्छा था, आस-पास के घर सरदारों के थे, मेरा घर वालों का दिल लगा रहता था, सब लोगों से अच्छी दोस्ती हो गई थी मेरी माता की।

मैं घर से बहुत कम बाहर निकलता था, मेरे घर के आस पास बहुत लड़कियाँ रहती थी पर मैं बहुत शरमीला था इसलिए मैं सिर्फ़ उन्हें दूर से निहार ही सकता था और कुछ नहीं कर सकता था। कुछ महीनों के बाद मेरी जॉब पास में ही (ओखला) में एक इंटरनॅशनल कॉल सेंटर में लग गई थी। मेरी जॉब नाइट शिफ्ट की थी और सारा दिन मैं घर में रहता था। हर रोज़ मैं शाम को छः बजे के बाद ही उठता था।

एक दिन मेरी छुट्टी होने की कारण मैं थोड़ा जल्दी उठा तो देखा घर के कोई लड़की मेरी माता से बात कर रही है, बाहर आया तो देखा वो एक शादीशुदा औरत थी। क्या मस्त चीज़ थी यार ! वो देख कर खड़ा हो गया उसे। ज़्यादा से ज़्यादा पच्चीस साल की होगी, क्या मस्त फिगर थी ! उसके स्तन होंगे कोई 34 इंच के, कमर होगी 30 इंच और उसकी गाण्ड 36 इंच और उभरी हुई गाण्ड देख कर कोई भी पागल हो जाए।

मैने अपनी माता से पूछा तो वो हमारे घर के सामने वाले घर मे किराए पर रहती थी, उस का पति मेट्रो में काम करता था वो भी नाइट शिफ्ट। मैं उसके बारे मैं ही सोच रहा था तभी वो फिर मेरे घर आई और मुझे अपना देवर बोल कर बातें करने लगी।

अब मैं उसके लिए हर रोज़ जल्दी उठ जाता था, वो रोज़ मेरे घर आती और हम बातें करते, कभी कभी मैं उसे छू भी लेता था, हर रोज़ बातें करता रहता था तो वो मेरे से खुलने लगी, रोज़ मज़ाक करती मेरे साथ मेरी गर्ल-फ्रेंड के बारे मैं पूछती तो मैं मना कर देता कि मेरी कोई गर्ल-फ्रेंड नहीं है।

तो वो मेरा मज़ाक उड़ाती !

मैं बोलता- आप मेरे गर्ल फ्रेंड बन जाओ।

कई बार तो मैं उसके बारे में सोच के मूठ मार लेता था। कई बार वो मेरे साथ बाज़ार भी जाती थी, मुझे वो बहुत अच्छी लगने लगी थी। मैं रोज़ उसकी चूत मारने की सोचता था।

अब गर्मियाँ शुरू हो गई थी। कई बार मैं घर में निकर पहन कर ही सो जाता था।

उस दिन मेरी माता कहीं गई हुई थी शाम तक आने का बोल कर। मैं सोते हुए भी उसी के बारे में सोचता था। मुझे पता नहीं चला कि कब वो मेरे घर में आ गई और मेरे ऊपर से चादर उतारने लगी, उतारते हुई उसका हाथ मेरे आधे खड़े लौड़े पर लग गया। वो एक दम धक से रह गई। मैं थोड़ी नींद में था, उसने अपना हाथ मेरी निकर के ऊपर ढाल लिया और मेरे लौड़े को महसूस करने लगी। अब मेरा लौड़ा भी तैयार होता जा रहा था। मेरी आँखों से नींद बहुत दूर थी। उसने लाल रंग की सलवार कमीज़ पहन रखी थी मैंने अपनी आँखें खोली तो उसने एक दम हाथ उठा लिया लेकिन उस की साँस चढ़ी हुई थी।

मैने अंजान बन कर कहा- क्या हुआ भाभी जी ?

वो बोली- कुछ नहीं, माता जी कहाँ है आपकी?

मैंने कहा- वो तो कहीं गई हैं, कल आएँगी !

तो उसने अपने आप को संभाल कर बोला, “आप आज काम पर जाओगे या नहीं?

मेरी उस दिन छुट्टी थी, मैने कहा,” नहीं आज नहीं जाना, क्यूँ क्या हुआ? आप क्यूं पूछ रही हैं?”

नहीं वैसे ही ! आज आप शाम को फ्री हो क्या?

मैने कहा,”हां जी !”

बोली,”आप का सामान बहुत बड़ा है !” उसने शर्माते हुए कहा।

मैं भी एकदम हैरान हो गया।

मुझसे बोली- बाहर निकाल के दिखाओ !

मैने कहा- खुद ही निकाल लो !

उसने झट से मेरी निकर में हाथ डाला और मेरे लौड़े को पकड़ कर बाहर निकाल लिया। एकदम उसकी आंखें हैरान रह गई इतना बड़ा देख कर !

वो हाथ से लंड को हिलाने लग गई और वो और भी टाइट होता चला गया। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली। मेरे लंड पर मुझे थोड़ी गर्मी महसूस हुई तो मैंने आंखें खोली तो देखा कि उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया था।

मुझे मज़ा आने लगा, वो मेरे लंड को चाटती हुई मुँह में ले रही थी, मुझे मज़ा आ रहा था, मेरा लंड उसके मुँह में आधा ही जा रहा था। अब मैं खड़ा हुआ और उसको घुटनों के बल नीचे झुका दिया और उसके बाल पकड़ के अपना लंड उसके मुँह में देने लगा। मैं भी काफ़ी दिनों से उसकी चूत मारने की सोच रहा था। मुझे मज़ा आ रहा था।

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