प्रेषक : हॉट प्रिन्स

कहानी का पहला भाग मेरी सेक्सी पड़ोसन राखी की कसी हुई चूत-1

अब आगे:

और ऐसा कहकर वो लेट गई और मेरे लन्ड को अपनी चूत के योनि-द्वार पर रगड़ने लगी और जैसे ही उसकी कोमल चूत का स्पर्श मेरे लन्ड पर हुआ, फ़िर से 8″ का लम्बा हो कर सलामी मारने लगा। मेरा लन्ड भी उसकी चूत के लिये बहुत ही व्याकुल था, क्युँकि बहुत तड़पा था राखी की चूत के लिये।

मैंने कहा,” देखा जान ! कैसा फ़ुदक रहा है तुम्हारी चूत के लिये !”

फ़िर मैंने राखी को बेड पर सीधा लिटाया और मैं उसके उपर आ गया। अपने लन्ड को उसकी चूत के गुलाबी छेद पर रखा और अन्दर डालना शुरु कर दिया, उसकी चूत बहुत ही टाईट थी इस लिये मेरा लन्ड उसकी चूत में मुश्किल से जा रहा था, लेकिन कुछ जोर लगाने से सारा अन्दर घुस गया मुझे लगा कि उसकी चूत की सील पहले ही किसी ने तोड़ी हुई है।

मैने उससे पूछा,”क्या आज से पहले कभी सेक्स किया है?”

तो उसने कहा,” हाँ ! एक बार मेरे मामा का लड़का हमारे घर में आया था और रात को वो हमारे कमरे में सोया था तो रात को मेरे करीब आया, उसने मुझे नंगा कर दिया और अपने लन्ड को मेरी गीली चूत के पास लाया और मेरी चूत पर मसलने लगा। मुझे बहुत ही मजा आने लगा था इसलिये मैं उसके लन्ड को अपनी चूत में घुसाने लगी, जैसे ही उसका लन्ड मेरी कुंआरी चूत में गया मुझे बहुत दर्द हुआ था और मेरी चुत में से खून निकलने लगा। फ़िर वो मेरी चूत में कुछ देर तक हिला और जल्दी ही झड़ गया। और वो जाकर सो गया, मेरा मजा अधूरा ही रह गया और उस रात को मैंने अपनी चूत को अपनी उन्ग्लियों से शान्त किया !”

“लेकिन आज आप मेरी चूत को ऐसे चोदना कि इस साली को चैन पड़ जाये !”

मेरे लन्ड ने उसकी चूत में अपने लिये जगह बनाई और पूरा का पूरा 8″ का अन्दर समा गया। मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत की चुदाई शुरु कर दी। अब वो जन्नत में थी, चिल्लाई,” और अन्दर तक डाल दो !”

मैं समझ गया कि उसकी चूत बहुत ही चुदासी हो उठी है।

उसने अपने कूल्हे ऊपर उठाये और मेरे लन्ड को अपनी चूत में और गहराई तक समा लिया। मेरा लन्ड काफ़ी मोटा और तगड़ा था जिससे मेरे लन्ड पर उसकी चूत कसी हुई थी। जैसे ही मैं अपना लन्ड बाहर निकालता उसकी चूत के अन्दर का छल्ला बाहर तक खिंच कर आता और लन्ड के साथ अन्दर चला जाता।

मेरा लन्ड उसकी चूत को अन्दर तक पेल रहा था। कुछ देर तक ऐसे चोदने के बाद मैंने एक तकिया उसकी गाँड के नीचे लगा दिया जिससे उसकी चूत ऊपर उठ गई और चूत का छेद थोड़ा सा खुल गया और अपना लन्ड उसके योनि-द्वार पर रखा और कमर को एक झटका दिया, मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर के आखिरी हिस्से पर जा टकराया। राखी उत्तेजना में भर गई, मेरे सीने से चिपक गई और उसके मुँह से निकल पड़ा,” ओह्ह्ह्………हाय्…………अब……मजा मिला है ! आपका लन्ड मेरी चूत के आखिरी हिस्से को रगड़ रहा है, बस ऐसे ही मुझे चोद डालो !”

मैंने उसकी दोनों टाँगों को ऊपर उठाया और उसकी चूत में लन्ड तेज रफ़्तार से आगे पीछे करके लगा। मेरा लन्ड उसकी चूत में रफ़्तार पकड़ चुका था। मैं उसके ऊपर छाया हुआ था और मेरे होंठ उसके रसीले होंठों को चूस रहे थे। राखी की कामोत्तेजना इतनी तीव्र थी कि उसका सारा शरीर तप रहा था, उसने उन्माद में अपनी दोनों आँखें बन्द कर रखी थी और उसका शरीर मछली की तरह तड़प रहा था।

जैसे ही मेरा लन्ड उसकी चूत में जाता, वो अपनी कमर उठा कर लन्ड को अन्दर तक समा लेती, मेरे लन्ड के हर प्रहार का जबाव वो अपने चूतड़ उठा उठा कर दे रही थी। मेरे बेडरूम का वातावरण राखी की चुदाई से गरम हो रहा था, कमरे में उसके मुँह से उत्तेजना भरी आवाजें गूंज रही थीं,” आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! उईईईईई………उम्म्म्म्म्म्म्……… ।आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्……… ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…… चोद ! मुझे ! कस कर ! हाँ ………और तेज ! जोर जोर से चोद मुझे ! अन्दर तक पेल दे अपने लन्ड को ! फ़ाड डाल मेरी चूत को ! बहुत मजा आ रहा है। और चोद , कस कर चोद, सारा लन्ड डाल कर पेल ! मेरी चूत बहुत ही तंग करती है मुझे ! आज इसको शान्त कर दो अपने लन्ड से ! बहुत दिन बाद चूत की खुजली मिट रही है ! हाँ और तेज ! और तेज ! उईईईईईईइ………आआआअहाआअ………उह्ह्ह्ह्ह्ह्… ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्……………ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्……………हाँ…………”

और राखी का पूरा जिस्म अकड़ गया और उसने मुझे नीचे कर दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई और मेरे लन्ड को अन्दर लिये हुए चूत को रगड़ने लगी और उसने जिस्म को अकड़ाया और रुक गई। उसकी चूत इतनी गरम हो उठी कि मेरा लन्ड पिघलने लगा, और वो चुदाई के आखिरी पड़ाव पर आ गई और झड़ गई। मेरा लन्ड उसकी चूत के तरल द्रव्य से सराबोर हो गया। वो पहली बार इतना स्खलित हुई कि उसकी चूत से गरम गरम रस रिसने लगा और मेरी जांघों पर टपकने लगा।

उसके चेहरे पर सन्तुष्टि का भाव साफ़ नजर आ रहा था, लेकिन मैं अभी जल्दी झड़ने वाला नहीं था और मैं उसको लगातार ऐसे ही चोदे जा रहा था। अब उसकी चूत उसके स्खलित होने से लिसलिसा उठी थी और मेरा लन्ड उसकी चूत को घपाक से चोद रहा था, घच-घच की आवाज उसकी चुदाई से कमरे में गूंज रही थी।

मैंने राखी को घोड़ी की तरह पोजिशन में लिया और पीछे से लन्ड उसकी चूत में पेल दिया। इस बार मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में आसानी से चला गया और मैं उसको उसी पोजिशन में चोदने लगा।

कुछ देर बाद राखी फिर से झड़ गई। मैं लगातार उसको चोद रहा था, वो भी कमर आगे पीछे करके चुदाई का मजा लेने लगी। उसकी गाँड का भूरा छेद मेरे सामने था, मैं एक उन्गली से उसकी गाँड को भी मसल रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चूची पकड़ ली और उनको दबाने लगा। मैं मानो राखी को चोदते हुए स्वर्ग में आ गया था और मैं कस कर रफ़्तार से तेज तेज चोदने लगा। उसके नितम्ब मेरी जांघों से टकरा रहे थे। 10 मिनट के बाद मुझे अहसास हुआ कि मैं भी स्खलित होने वाला हूँ।

मैंने राखी से पूछा तो उसने कहा,”मेरी चूत में ही भर दो तभी इसकी आग शान्त होगी !”

मेरे मुँह से कराह निकली और मेरे लन्ड ने गरम गरम वीर्य से उसकी चूत को भर दिया। मैंने चुदाई तब तक चालू रखी जब तक मेरे लन्ड में से वीर्य की आखिरी बूँद उसकी चूत में न निकल गई और उसी समय राखी भी फ़िर से झड़ ग़ई।

मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया। हम दोनों निढाल होकर बेड पर पड़ गये, उसकी चूत में से मेरा और उसका रस मिश्रित हो कर रिस कर उसकी जांघों पर आ गया।

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