प्रेषक : अमित दुलेरा

हेलो मेरा नाम अनुराग है

मैं गुरुजी का शुक्रिया करना चाहता हूँ।

मैंने अन्तर्वासना में कितनी सारी कहानियाँ पढ़ी हैं।

अब मैं चाहता हूँ कि आप मेरा अनुभव पढ़ें !

यह कहानी मेरे सामने ही रहती एक भाभीजी की है जिन्हें मैं देखते हुए भी मुठ मार लिया करता था। उनकी बरफ़ बनाने की फ़ैक्टरी है। वोह रोज झाड़ू लगाती तो उसकी श्वेत दूधियाँ रोज़ मुझे दिखती थी।

एक दिन उसका पति किसी काम से बाहर गया था तो मैं उसके घर गया और बोला- भाभीजी ! आपके पास चार किनारे वाला स्क्रु ड्राईवर है?

तो उसने बोला- वोह तो आपके पास है !

मैं उसकी भाषा नहीं समझ पाया।

फ़िर भाभीजी बोली- आप रोज़ इस तरह मुझे क्यों घूरते हो?

मैं बोला- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो इसलिये मैं आपको देखता हूँ।

फ़िर भाभी बोली- तू भी मुझे बहुत अच्छा लगता है !

और थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे ऐसे पकड़ा और मैं भी उनको चूमने लगा। मैंने गाल से चालू किया चूमना।

धीरे धीरे मैंने उनके होंठ के साथ अपने होंठों से किस किया। उनकी जीभ मेरे मुँह में ऐसे चल रही थी कि बहुत मज़ा आ रहा था।

फ़िर मैंने उनकी गर्दन पर अपनी जीभ चलानी शुरू की और वो थोड़ी गर्म होने लगी। फ़िर मैंने उसे दिवार की और उल्टा कर दिया। उनकी गान्ड मेरे लन्ड को छू रही थी और उनके मुँह से आवाज़ निकल रही थी- आ औ औइ अं अह …

और फ़िर मैंने उनका ब्लोउज़ निकाला। उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी। पहली बार उनके बड़े बड़े स्तनों के पूर्ण नग्न दर्शन हुये। मेरा लन्ड भी अंगड़ाई ले रहा था और उनके चुचूक मैंने अपने मुँह में लिए।

अरे यारो ! उनके निपल इतने बड़े थे कि कैसे बताऊँ आपको ! मैंने इतने मोटे निपल पहले कभी नहीं देखे थे। और फिर मैंने उनके पेटिकोट का नाड़ा खोला और पेटिकोट निकाल दिया और उसने काले रंग की कच्छी पहनी थी।

अब वो सिर्फ़ कच्छी में थी और नीचे बैठ गई और मेरा लन्ड चूसने लगी। अब मेरे मुँह से आवाज़ निकल रही थी- श ऽऽह श ले मेरी रानी मेरा लन्ड चूस और चूस मेरी रानी !

उसके बाद मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और उनकी कच्छी को निकाल दिया और उनकी चूत चाटने लगा। मैंने पूरी जीभ उसकी चूत में डाल दी और वो आहें भरने लगी- ऊऽऽ ऊऽ ऊ ऊऽआ आ आ आ औ इऽऽ … और अन्दर डाल कर जीभ हिलाओ मेरे राज़ा ! आज तू मुझे जी भर के चोदना ! मैं भी तेरे लन्ड की प्यासी हूँ !

मैं उल्टा हो गया, अब उनकी चूत मेरे मुँह में और मेरा लन्ड उनके मुँह में ! हम दोनों इतने मशगूल हो गये और फ़िर दोनों ने खूब चाटा।

फ़िर भाभी बोली- अब मुझसे नहीं रहा जा रहा ! तुम मुझे चोदो !

फ़िर मैंने मेरा लन्ड 6″ का उनकी चूत में डाला और थोड़ा गया तो भाभी बोली- धीरे से डालो ना !

फ़िर भाभी की बात ना सुनते हुए मैंने पूरा लन्ड ही उनकी चूत में डाल दिया।

भाभी बोली- मर गई मैं ! आऽऽऽऔ चोद डाला तूने जालिम मुझे ! मेरी चूत की थोड़ी तो चिन्ता कर !

फ़िर 15-20 धक्कों के बाद भाभी मुझे चोदने लगी। वो मुझे धक्के देने लगी। अब भाभी को मज़ा आने लगा था ऊऽऽआऽऽऔऽअऊ आ औ अ ऽऽऽ अ ऊ आ औ अ और जोर से चोद ! मेरी चूत फ़ाड डाल आज ! जोर से चोदो मुझे !

और मेरी स्पीड इतनी बढ़ गई थी कि भाभी इतनी देर में कई बार झड़ चुकी थी और उनकी चूत भी एक दम चिकनी हो गई थी। भाभी अब कुछ भी बोल नहीं पा रही थी, सिर्फ़ आवाज़ निकाल रही थी- आ आ औ औ औ ऊ ओ !

और करीब एक घंटे तक चुदाई चलती रही। फ़िर मैं भी झड़ने वाला था। मैंने भाभी को बोला- मैं झड़ने वाला हूँ, कर दूँ अन्दर ?

भाभी बोली- अन्दर नहीं करना, बाहर निकालो, उसको मुझे पीना है।

फिर मैंने भाभी को हाथ में दे दिया और भाभी मेरा लन्ड हिलाने लगी और जैसे ही मैं झड़ा तो भाभी ने मेरा सारा वीर्य अपने मुँह में समा लिया और सब पी गई।

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