प्रेषक : डी के डॉन

तृप्ति रविवार को मेरे ऑफिस में आई तो मैंने उससे अपने दिल की बात कही। मैंने कहा- जब से तुमने ज्वाइन किया है, मैं तब से तुम पर फ़िदा हो गया था और मैं नहीं चाहता था कि कोई और मेरे और तुम्हारे बीच में आये, इसी लिए मैंने तुमको पाने के लिए अपनी जी जान लगा दी।

मुझे पता चल चुका था कि तृप्ति सिर्फ पैसे वालों को लाइन देते थी और मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं थी, लिहाजा मैंने उसको पूरी तरह से इम्प्रेस कर लिया था। मैं शादी-शुदा था ये बात भी उसको पता थी पर फिर भी वो मुझको मन ही मन पसंद करने लगी थी और मुझे क्या टाइम पास चाहिए था।

बस वो मेरे जाल में फंसती चली गई और मैंने भी सोचा एक दिन, इससे पहले कि वो ऑफिस छोड़ के जाए मुझे इसके काम लगाना है। बस इसीलिए मैं उसे काम के बहाने रविवार को भी ऑफिस बुलाता था।

उस दिन मैंने तृप्ति की चूची दबाने का मन बना लिया था तो मैंने कुछ काम के बहाने उसे अपने पास बिठा लिया और अपने पीसी पर काम करने को कहा। वो मान गई। वो मेरे ऊपर झुक कर मेरे पीसी पर काम करने लगी और मैंने धीरे से अपने नजर तृप्ति की चूची की तरफ घुमाई तो मुझे तृप्ति की पूरी चूची उसकी कुरते के अंदर नजर आ गई। उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी। उसकी बड़ी बड़ी चूची देख कर मेरा लण्ड आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होने लगा।

मैंने उससे और पास आने को कहा वो मेरे बिलकुल करीब आ गई अब मैं उसकी चूची की खुशबू को सूंघ सकता था। मैंने धीरे धीरे उसकी चूची की तरफ अपना हाथ बढाया और उसकी एक चूची को पकड़ लिया। वो तुंरत पीछे हट गई और कहने लगी- सर, ये क्या कर रहे हैं? मैंने उसे समझाया- इसमें कुछ भी गलत नहीं है और मुझ पर शक न कर ! मैं तो शादी-शुदा हूँ, कुछ भी गलत नहीं करूंगा।

काफी न नुकुर के बाद तृप्ति मान गई- केवल चूची दबा लीजिये और कुछ नहीं करवाउंगी।

मेरा क्या ! आज वो अपनी चूची दबवाने को मान गई है एक दिन वो मुझसे चुदवाने को भी मान जायेगी ! नहीं तो जबरदस्ती चोद दूंगा साली को !

उस दिन से मैंने रोज़ तृप्ति की चूची को दबाता और बाथरूम जाकर हाथ से मारता। कुछ दिन बाद उसको शक हो गया कि मैं जब भी उसकी चूची दबाता हूँ तो उसके तुंरत बाद बाथरूम क्यूँ जाता हूँ।

उसने मुझे पूछा कि ऐसा क्यूँ ?

मैंने बता दिया कि मैंने तुमसे वादा किया है मैं सिर्फ तुम्हारी चूची दबाऊंगा, तुमको चोदूंगा नहीं, इसीलिए अपने लण्ड को शांत करने के लिए बाथरूम जाकर हाथ से मारता हूँ।

इस पर उसने कहा- आप जब चूची दबाते हैं तो मेरा मन भी चुदवाने को होता है, पर क्या करूँ, यहाँ नहीं हो सकता है !

इस पर मैंने उससे कहा- ऐसे बात है तो पहले क्यूँ नहीं बताया? मैं तुमको किसी बढ़िया होटल ले के चलता !

यह बात सुन कर तो उसकी बांछें खिल गई। वो अगले रविवार को होटल चलने के लिए तैयार हो गई।

मैं उसे अपनी कार में ले जाने की बात कही तो उसने न नहीं किया। मुझे पता था कि उसको अमीर लोग पसंद आते हैं इसीलिए मुझे न नहीं करेगी।

मैंने रविवार के लिए एक फाइव स्टार होटल बुक कराया, तृप्ति को अपनी पत्नी बना के ले गया। मैंने उससे कहा था- तुम पहले ऑफिस आना, फिर यहाँ से चलेंगे !

मैं अपने साथ अपनी बीवी की एक साड़ी लाया था। मैंने तृप्ति से कहा- यह साड़ी पहन लो ताकि किसी को शक न हो !

उसने वैसा ही किया। होटल पहुँच कर रूम लिया, अंदर गए और रूम अंदर से लॉक कर लिया।

बस फिर क्या था हम दोनों की मुराद आज पूरी होने जा रही थी। मैंने तृप्ति को बिस्त्तर पर लिटा दिया तुंरत, और उसके ऊपर चढ़ के बैठ गया। उसकी दोनों चूची को कस के पकड़ के मसलने लगा। तृप्ति को समझ नहीं आ रहा था मुझे अचानक क्या हो गया।

मैंने कहा- मेरे जान अभी कुछ न कहो, बाद में कहना ! महीनों बाद तुम मिली हो ! मुझे अपने लण्ड की प्यास बुझाने दो ! फिर बात करेंगे !

मैंने उसका ब्लाऊज़ उतारा, उसने सफ़ेद रंग की ब्रा पहनी थी, तुंरत ही उसकी ब्रा भी उतार दी और तृप्ति की चूची को दबाने लगा। तृप्ति भी गर्म-गर्म साँसें लेने लगी। तृप्ति की चूची को अब मैं अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। मैं तृप्ति की चूची को दबा दबा के मुँह में चूसे जा रहा था। तृप्ति भी बिस्तर में मचलने लगी थी। मैंने तुंरत तृप्ति की साड़ी और चड्ढी को उतारा, अपने लण्ड तुंरत तृप्ति की चूत में डाल दिया। तृप्ति की तो जैसे गांड फट गई- साली बिस्तर पर तड़पने लगी और मैं तो कई दिनों से तड़प रहा था उसको चोदने के लिए !

इतना मोटा लण्ड तृप्ति की चूत में जायेगा तो क्या हाल होगा तृप्ति का ! आप सोच सकते हो ! साली की मैया चुद गई ! जब मैंने पूरा लण्ड तृप्ति की चूत में डाल दिया तो उसकी चूत से खून बहने लगा क्यूँकि यह तृप्ति की पहले चुदाई थी न ! अभी तक तृप्ति की चूत की सील नहीं टूटी थी सो आज वो भी टूट गई। मैंने तोड़ा तृप्ति की सील को और मैंने ही तृप्ति की चूत को भी चोदा ! यह मेरी किस्मत है तृप्ति ने मुझसे चुदवाना पसंद किया।

खैर मैंने साली को जम के चोदा, मादरचोद को !

तृप्ति की दोनों चूचियों को पकड़ के लण्ड तृप्ति की चूत में अंदर-बाहर करने लगा और तृप्ति भी जोर जोर से सांसे लेने लगी। मैं जैसे बिस्तर पर पटक देता वैसे ही साली पड़ी रहती मादरचोद ! मैंने गधे की तरह चोदा मादरचोद को ! बहुत चोदा ! मैंने तृप्ति को पूरी ताकत से चोदा, तृप्ति झड़ गई, फिर मैं भी झड़ गया।

तृप्ति ने पूछा- आपने ऐसा क्यूँ किया?

मैंने कहा- मैं तुमको चोदने के लिए इतना परेशान था कि बस मौका मिलते मैं तुमको चोदना चाहता था इसीलिए तुंरत तुम को चोद डाला ! अब हमारे पास मौका भी है और टाइम भी है ! अभी फिर थोड़ी देर में तुम को चोदूंगा ! तुम नहा धो लो ! तब तक मैं नाश्ते का आर्डर देता हूँ, फिर उसके बाद चोदूंगा !

एक घंटे के बाद मैंने तृप्ति से कहा- तुम तैयार हो चुदवाने को?

उसने कहा- मैं तो कब से रेडी हूँ !

मैंने तुंरत तृप्ति को बिस्तर पर लिटाया और चढ़ गया साली मादरचोद पे ! और लगा चूसने तृप्ति की चूची को !

इस बार बहुत टाइम था तो अब तृप्ति को आराम से चोदना था !

मैंने तृप्ति की दोनों टांगों को उठा के ऊपर किया और उसकी चूत को चाटने लगा। तृप्ति की चूत को चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था कि आपको क्या बताऊँ ! दोस्तो, काश आप भी होते वहां पे !

खैर अगली बार तुम सब भी चलना मेरे साथ तृप्ति को चोदने ! लेकिन तृप्ति को पहले मैं ही चोदूंगा, फिर तुम सब !

क्यूँकि तृप्ति मेरा माल है ना !

खैर तृप्ति आधे घंटे तक तृप्ति की चूत चाटने के बाद मैंने तृप्ति से अपने लण्ड को चूसने को कहा तो मादरचोद ने मना कर दिया।

मैंने कहा- चाट के देख मेरी जान, बहुत मज़ा आएगा ! तुझे जो चाहिए, मैं दूंगा ! पहले इस दिन को तो जी लो मेरी जान ! मैं तेरा प्रमोशन कर दूंगा !

इस पर तृप्ति तैयार हो गई और मेरा लण्ड चूसने लगी। वो साली मेरा पूरा लण्ड मुँह में लेकर चूस रही थी। मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था !

१५ मिनट तक तृप्ति ने मेरा लण्ड चूसा, फिर मैं तृप्ति की चूची चूसने लगा, उसके निप्प्ल को खूब मसलने लगा। मैंने अपना मुंह तृप्ति की चूत में लगा रक्खा था कि जब इसकी चूत झड़ेगी तो मैं उसकी चूत चाटूंगा।

मैंने तृप्ति की चूची को खूब रगड़ा और तृप्ति की चूत को भी !

कहते है न कि चूत और खैनी जितना रगड़ोगे, उतनी नशीली हो जाएँगी ! थोड़ी देर में तृप्ति झड़ गई पर मैं तो अभी भी वैसा ही था। अब तृप्ति की चूत नशीली हो गई थी इसीलिए चाटने में बहुत मज़ा आने लगा। तृप्ति की चूत से जो भी माल निकला, मैंने उसे चाट लिया और तृप्ति की चूची को इतना दबाया कि उसमें से दूध सा निकलने लगा। फिर मैंने तृप्ति का दूध पिया। तृप्ति की चूत और तृप्ति का दूध पीने के बाद तृप्ति झड़ चुकी थी। उसकी गाण्ड में ज्यादा दम नहीं बचा था। तब तक मैंने अपने लण्ड को कण्ट्रोल में रक्खा, फ़िर मेरी बारी आई। मैंने तृप्ति को बिस्तर पर पटक के चोदा।

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