पेल दे पर बेल दे

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मैं श्रेया आहूजा, आपकी कमसिन लेखिका आपको पिछले सप्ताह मेरे साथ बीते हुए उन लम्हों के बारे लिखे दे...

ममेरी बहन और उसकी सहेली-2

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भाग एक से आगे :मैं बोला- दीदी, शादी के बाद मुझे यह सब करने दोगी क्या?दीदी बोली- बिल्कुल ! सब कुछ करना...

सोनू से ननदोई तक-1

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सबसे पहले तो गुरुजी को प्रणाम जिनकी वजह से हमें इतने हसीन किस्से पढ़ने को मिल पाते हैं, फिर प्रणाम है अन्तर्वासना...

सोनू से ननदोई तक-3

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दो दिन बाद की बात है, मेरी चाची के पिता जी परलोक चले गए।मेरे सभी घर वाले वहीं चले गए, सबका जाना...

सोनू से ननदोई तक-5

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जैसे कि मैंने अन्तर्वासना पर पिछले भाग में बताया :उन्होंने एक नेपकिन पर अपने मोबाइल नंबर लिख मेरे पाँव में फेंक दिया,...

सत्य वचन

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मैं छत पर बैठी हुई अपने ख्यालों में डूबी हुई थी। मुझे अपनी कक्षा में कोई भी लड़का अच्छा नहीं लगता था...

प्यासी निगाहें

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प्रेषक : ? एक बार काम के सिलसिले में मुझे दिल्ली में दो महीने रुकना था। मैं अपने एक...

देखने-पढ़ने से मन नहीं भरता अब-5

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प्रेषक : मुन्ना भाई एम बी ए लखनऊ 9-7-2010 समय: 10-30 सुबह आज ऑफिस आने में...

देखने-पढ़ने से मन नहीं भरता अब-7

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प्रेषक : मुन्ना भाई एम बी ए फिर वो अपने घुटने के बल मेरे लण्ड के सामने बैठ गई,...

मस्त है यह सानिया भी-10

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प्रेषक : संजीव चौधरी वकार अब छुटने वाला था, तब वो बोला- तुमको मेरा सारा मणि खा जाना है।