अन्तर्वासना के सभी पाठको को नमस्कार !

तीन-चार महीने कैसे निकले … जैसे रोकेट से चाँद पर पहुच गए, चार दिन में ही चार महीने पूरे हो गए…

फिर अभी लगभग १५ दिन पहले ही एक दिन अचानक उसने चैट करते हुए मुझको अपने घर का पता दिया…

मैं दंग रह गया, मैंने पूछा- मिनी आज कैसे तुमने अपना पता मुझको दिया?

तो फिर वो टाल गई।

स्त्री मन के रहस्यों का खजाना किन गहराइयों में है ये तो खुद विधाता भी नहीं जान सके तो मैं अदना सा इंसान क्या जानता?

वो मेरे शहर की नहीं है।

मिनी ने बस इतना सा पूछा कब आओगे?

मैंने कहा- रविवार को मेरे संस्थान की छुट्टी होती है, किसी काम से बहाने इस आने वाले इतवार को आ जाऊं?

तो मिनी ने हाँ कर दी और बोली- मैं अकेली ही घर में होउंगी, तुम सीधे मेरे घर में आना और आने से पहले मुझको कॉल करना अपने मोबाइल से…

उसने अपना मोबाइल नंबर मुझको दिया और साथ ही साथ यह बताया कि एक सरप्राइज तुम्हारा इन्तजार कर रहा है।

मैं और भी ज्यादा उत्सुक हो उठा कि क्या सरप्राइज हो सकता है। कहीं कुछ उलटा सीधा तो नहीं है कुछ, आखिर यह नेट है।

लेकिन यदि मिनी के मन में कुछ मैल होता तो वो जो करती, अचानक ही करती फिर तो वो कुछ बताती भी नहीं।

मैं बहुत बेसब्री से रविवार का इन्तजार करने लगा। घर पर बोला कि संडे को अन्य शहर में मुझको स्पेशल क्लास लेने को बुलाया है, इसलिए मैं जा रहा हूँ रात को लेट हो जाऊंगा !

मैं कोई प्यारी सी गिफ्ट मिनी को देना चाहता था, मुझे और तो कुछ समझ आया नहीं, क्यूंकि अभी तक मिले ही नहीं थे इसलिए बहुत अनिश्चय की स्थिति में मैंने एक डांसिंग पेयर का मयूजिकल मेमोरी आइटम खरीदा… और अपनी कपड़ों के साथ पैक कर लिया।

और शनिवार रात को बस पकड़ कर मिनी के शहर रवाना हो गया, बहुत सुबह करीब ४ बजे जब मैं उसके शहर उतरा तो मैंने मिनी को कॉल किया तो मिनी ने बताया कि उसके घर तक कैसे पहुचना है।

मैंने ऑटो किया और उसके मोहल्ले की गली के पास ऑटो को छोड़ दिया।

एक बार फिर मेरी हालत वो ही हो गई जैसे कि उसकी मेल पढ़ने पर हुई थी, मेरे पैर थरथराने लगे थे…..दिल था कि मेरे गले में धड़क रहा था।

मकान नंबर के आधार पर जब मैं मिनी के मकान के पास पंहुचा तो एक चेहरा खिड़की में से झांकता नजर आया और जैसे ही मैंने गेट को हाथ लगाया दरवाजा खुला और मिनी बोली…. नीरज ?

मैंने कहा- हाँ मिनी ! मैं ही हूँ !

उसने मुझको अन्दर आने को बोला। मेरा दिल मेरे गले में अटक रहा था. पहली बार किसी लड़की से मिलने यूँ उसके घर गया था….. और वो भी नेट फ्रेंड से……

उसने दरवाजा बंद किया, मिनी सशरीर मेरे सामने थी, रंग कुछ सांवला सा लेकिन आँखों में गजब का आकर्षण, शोख आँखें जबरदस्त निमंत्रण देती हुई …, सुता हुआ शरीर।

मैंने अपना ब्रीफकेस कुर्सी पर रखा, मिनी की ओर देखा, वो भी मुझे ही देख रही थी, मेरे हाथ ज़रा से उठे, उसके कदम बढ़े वो मेरे सीने से लग गई और मेरे हाथ उसके इर्दगिर्द बंध गए, उसका चेहरा साइड से मेरे सीने से कंधे पर चिपका हुआ था…

मैं उसके चेहरे को देखने लगा, कितना प्यारा…., कोमल…., निर्मल……. आँखें मुंदी हुई !

मेरी सांस उसके चेहरे पर टकराने लगी. मेरा मुँह उसके गालों पर आया और आँखें मुंद गई हम जाने कितनी सदियों के प्यासे एक दूसरे में खो गए। जाने कितना समय निकल गया कुछ पता ही नहीं !

अचानक वो चोंक कर मुझसे अलग हुई और बोली- नीरू, तुम फ्रेश हो लो, चाहो तो नहा भी लो, फिर कुछ खा पी लेते हैं।

मिनी नाईट ड्रेस में थी।

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