प्रेषक : राजा बाबू

जब मेरा ट्रान्सफर जयपुर से जालन्धर हुआ तो अपने एक दोस्त की वजह से मुझे एक कर्नल साहब की कोठी में पेइंग-गेस्ट के रूप में रहने का ठिकाना मिल गया। कर्नल साहब करीब १० साल पहले भगवान को प्यारे हो गए थे, घर में उनकी ७० वर्षीया पत्नी, ४० वर्षीय पुत्र तथा ३६ वर्षीया बहू कुल जमा तीन प्राणी रहते थे। रहने के लिहाज से घर और घर वाले बहुत अच्छे थे। कर्नल साहब की पत्नी का नाम राजबीर कौर था, वो एक बहुत ही शिष्ट, सौम्य, गंभीर और आकर्षक महिला थीं, उनको देखकर बार बार मन में एक ही बात आती थी कि काश ये मेरी माँ होतीं। उनके पुत्र का नाम महिंदर सिंह था, वह सुंदर, लम्बा और योग्य आदमी था। महिंदर की पत्नी का नाम मंजीत कौर था, वह गोरी, सुंदर और सेक्स से भरपूर महिला थी। दुर्भाग्य से इनके कोई संतान नहीं थी।

यहाँ रहते हुए मुझे २ महीने हो गए तो मैं मंजीत का दीवाना हो चुका था, जब वो चलती तो उसके भारी भारी चूतड़ मेरे लंड को खड़ा कर देते। ४-६ दिन में एक बार मुठ मार कर अपनी गर्मी निकालने के अलावा और कोई रास्ता समझ नहीं आ रहा था।

एक दिन पता चला कि दिल्ली में मंजीत के भाई की शादी है और वो अपने पति के साथ १५ दिन के लिए दिल्ली जा रही है। मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी जान निकाल ली हो।

जिस दिन ये लोग दिल्ली गए, मैं शाम को घर आया तो माँ जी अकेली थी, माँ जी को वो लोग बीजी कहते थे, इसलिए मैं भी बीजी कहने लगा। मैंने कहा- बीजी, जो काम मेरे लायक हो बता दीजिएगा, मैं कर दूंगा।

मैंने खाना बनाने में बीजी की मदद की, दोनों ने खाना खाया और मैं अपने कमरे में चला गया। मेरा और बीजी का कमरा अगल-बगल था और दोनों के बीच एक कॉमन बाथरूम था जिसका दरवाजा दोनों कमरों में खुलता था।

मैं अभी लेटा ही था कि जोर से कुछ गिरने की आवाज आई, मैं बाहर आया तो देखा किचन में बीजी गिर गई हैं, मैंने जल्दी से उन्हें उठाया और सहारा देकर उनके कमरे में लाकर बेड पर लिटा दिया। बीजी लगभग ५’६” लम्बी और टीवी / फिल्म स्टार रीमा लागू की तरह भरे बदन की थीं। लेटने के बाद भी बीजी का कराहना कम नहीं हो रहा था, मेरे पूछने पर बताया कि बांह और कूल्हे पर बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने देखा कि उनकी दाहिनी बांह कुहनी के पास काफी लाल थी।

बीजी ने कहा- पुत्तर, सम्मने बारी विच मूव पई ऐ, कड से ल्या !

मैंने मूव निकाली और बीजी से कहा- लाइए, मैं लगा देता हूँ।

बांह पर मूव लगाने के बाद मैंने कहा- बीजी, आप उल्टे लेटो, मैं हिप पर भी लगा दूं !

एक पल की हिचक के बाद बीजी पलटीं और बोलीं- ला दे पुत्तर, रब्ब तेरा भला करे, तैन्नू सुखी रखे, जे आज्ज तूं नां हुंदा ते मैं ताँ उठ के कमरे विच बी नई आ पादीं।

बीजी पेट के बल लेट गईं तो मैंने उनके गाऊन को कमर तक उठा दिया, उनकी केले के तने जैसी चिकनी, सुडौल और गोरी गोरी टाँगे देखकर मेरा मन मचल गया। मरून कलर की पैंटी उनके जिस्म की शान में चार चाँद लगा रही थी। मैंने तुंरत अपने आप को कोसा, खुद को काबू में किया कि ये तो माँ है।

बीजी की कमर पर कुछ नहीं दिखा तो मैंने पूछा कहाँ दर्द है बीजी ?

बीजी ने अपने दाहिने चूतड़ पर हाथ रखकर कहा- ऐत्थे !

मैंने बीजी की पैंटी थोड़ी नीचे खिसकाई तो देखा मेरी हथेली के बराबर जगह एकदम लाल थी, मैंने छुआ तो बीजी कराह उठीं। मैंने पैंटी थोड़ा और और नीचे खिसकाई ताकि मूव अच्छे से लग सके। हलके हलके हाथों से मूव लगाई और पैंटी ऊपर करके गाऊन नीचे कर दिया। मैंने बीजी से कहा- मैं आपके लिए हल्दी डालकर दूध लाता हूँ, आप पियोगे तो सारा दर्द चला जाएगा।

किचन में जाकर दो गिलास दूध गरम किया, एक गिलास खुद पी लिया और दूसरे में हल्दी डालकर बीजी के लिए ले आया। बीजी को सहारा देकर उठाया और वो धीरे धीरे दूध पीने लगीं। बीजी दूध पी रही थीं और मेरी आँखों के सामने बार बार उनकी गोरी टाँगें और चूतड़ आ रहे थे। मैंने तय कर लिया कि आज बीजी की बजानी है। बीजी के दूध पीने के बाद उनसे खाली गिलास लेकर किचन में रखा और आकर बीजी से पूछा- अब दर्द कैसा है?

तो बोली- अज्जे ते औंवे ई हैगा पुत्तर।

मैंने कहा- बीजी, एक बार मूव फिर लगवा लो, सुबह तक आराम आ जाएगा।

हाथ का सहारा देते हुए बीजी को उल्टा किया और उनका गाऊन कमर से और थोड़ा ऊपर तक उठा दिया। मूव की ट्यूब उठाई और अपने पास रखकर बीजी की पैंटी नीचे खिसकाने लगा। पैंटी नीचे खिसकाते खिसकाते उनके घुटनों तक कर दी। अपनी हथेली पर मूव ली और उनके चूतड़ों पर मलने लगा। मेरा ध्यान मूव मलने में कम और चूतड़ सहलाने में ज्यादा था। इस बीच मेरा लंड ७० साल की औरत को चोदकर एक नया अनुभव करने के लिए तैयार हो चुका था और लुंगी के अन्दर फड़फड़ा रहा था।

जब मैं काफी देर तक सहलाता रहा तो बीजी ने कहा- पुत्तर ! तेरे अंकल जी नू गए १० साल हो गे ने, आज्ज तूं मैंन्नू ओन्ना दी याद ल्या दित्ती ऐ ! ओ वी ऐन्जे ई सहलांदे रहंदे सी ! मैंन्नू बौह्त चान्हदे सी, रोज जैतून दे तेल नाल मेरियां लत्तां दी मालश करदे सी ! फ़ेर लत्तां से विच ई वड़ जांदे सी। मैं ओन्ना नूँ प्यार नाल पुच्चु कहंदी सी ते ओ वी मैंन्नू प्यार नाल पुच्चु कहंदे सी।

मैंने कहा- बीजी, क्या मैं आपको पुच्चु कह सकता हूँ ?

कहने लगी- आहो पुच्चु ! तूं मैंनू पुच्चु कह सकना ऐ।

मेरा काम लगभग बन चुका था।

मैंने कहा- पुच्चु ! वो जैतून का तेल कहाँ रखा है ?

बीजी ने अलमारी के ऊपर वाले खाने की ओर इशारा कर दिया। मैं उठा बाथरूम गया, पेशाब किया और अपना अंडरवियर उतार कर रख आया। जैतून के तेल का डिब्बा निकाला, बीजी यानि अपनी पुच्चु की पैंटी उतार दी और टांगों पर जैतून के तेल से मालिश करने लगा।

कुछ देर बाद मैंने कहा- पुच्चु, आप सीधे हो जाओ तो आगे भी कर दूं।

वो सीधी होकर पीठ के बल लेट गईं। मैं उनकी टांगों के बीच बैठ गया और हल्के हल्के हाथों से उनकी जांघो को सहलाने लगा, धीरे धीरे मैं थोड़ा सा आगे खिसक गया और लुंगी में से अपना लंड बाहर निकाल कर पुच्चु की चूत से छुआया तो बड़ी सेक्सी आवाज में बोलीं- की कर रहया ऐ पुच्चु ?

मैंने लंड को अन्दर सरकाते हुए कहा- कुछ नहीं पुच्चु।

मेरा पूरा लंड ७० साल की बीजी की चूत में चला गया था, ताज्जुब यह था कि बीजी की चूत किसी २० साल की कुंवारी चूत से कम नहीं थी।

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