तो दोस्तो एक बार फ़िर हाजिर है आपका दोस्त जतन गाँव जुलाना जिला जीन्द हरियाणा से आप सब के सामने अपनी जिन्दगी का एक और पन्ना लेकर। मैं थोड़ा देर से आप लोगों के साथ रु-ब-रु हो पाया उसके लिये मैं माफ़ी चाहूँगा।

तो दोस्तो मुझे आप सबके मेल तो बहुत मिले पर जितनी मैं उम्मीद करता था उतने नहीं।

मुझे कुछ भाभियों और आन्टियों के भी मेल मिले हैं।

सबसे बडी बात, मैं आप लोगों से एक वादा करता हूँ कि मैं जो कुछ भी लिखूँगा वो मेरी जिन्दगी की सच्चाई होगी। हो सकता है जो हालात और नाम मैं लिखूं, वो काल्पनिक हों क्योंकि जिसने मुझे इतने विश्वास के साथ अपना सब कुछ सौपं दिया उसका नाम आप लोगों के सामने बताकर मैं उसे बदनाम नहीं कर सकता पर उसमें जो लड़की होगी, वो सच्ची होगी और मैंने जो कुछ उसके साथ किया वो भी सच होगा।

तो आज की कहानी शुरु करते हैं!

अभी कुछ दिन पहले की बात है मैं कुछ काम से नरवाना गया हुआ था तो मैं अपने एक दोस्त के घर पे रुका हुआ था। मेरे दोस्त का घर जिस कालोनी में था, वहां महिला आयोग वालों का प्रोग्राम हो रहा था वो सब महिलाओं के अधिकारों पर भाषण दे रहे थे तो जैसा कि मैं प्रवृति से थोड़ा जिज्ञासु हूँ तो मैं भी वहां पर चला गया संयोग से मुझे सबसे आगे वाली सीट मिल गई।

स्टेज पर एक अधेड़ उम्र की महिला भाषण दे रही थी। उसके पीछे कुर्सियों पर कुछ और अधेड़ महिलाएँ बैठी थी और उनके पीछे कुछ सुन्दर बालाएं खड़ी थी। उन लड़कियों के बीच में एक लड़की ख़डी थी बिल्कुल गोरी चिट्टी। उसकी लम्बाई तकरीबन 5.5″ होगी और फ़िगर तो एकदम बार्बी डोल के जैसी। उसने सफ़ेद रंग की साड़ी पहनी हुई थी और उसमें वो स्वर्ग की किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

उसे देखते ही मेरी नियत बदलने लगी और मैं उन महिला उद्धार वालों की उस लड़की का उद्धार करने के बारे में सोचने लगा। मैं एक टक उसे ही देखने लगा। उसके उभरे हुये उरोज मुझे आमंत्रित कर रहे थे कि मैं जाऊं और उन्हें जी-जान लगाकर मसलूं। उसकी नजरें सामने बैठे सब लोगों में घूम रही थी। जैसे ही उसकी नजर मुझसे टकराई, मेरे शरीर में 440 वोल्ट का करंट सा लगा और शायद कुछ फ़र्क उसे भी पड़ा था क्योंकि उसने एक बैचेनी के साथ बहुत जल्दी से अपना मुँह दूसरी तरफ़ घुमा लिया, पर मैं अपनी नजर उसके सेब जैसे गालों से न हटा सका।

अबकी बार मुझे काफ़ी देर हो गई थी कि वो कब मेरी आँखों में देखे। वो शायद जानबूझ कर ऐसा कर रही थी। लेकिन उसके चेहरे की बैचनी साफ़ देखी जा सकती थी। काफ़ी देर के बाद फ़िर उसने कुछ पल के लिये मेरी तरफ़ देखा लेकिन अबकी बार वो कुछ सामान्य थी और इस तरह हमारी एक दूसरे से लगातार नजरें मिलने लगी और हम अब एक दूसरे को स्माईल भी दे रहे थे।

अब मुझसे बर्दाशत करना मुश्किल होता जा रहा था। लण्ड पैंट को फ़ाड़कर बाहर आने के लिये बेताब था। तो इतनी देर में ही वो कहीं चली गई तो मैंने भी सोचा जब तक शो दोबारा शुरु हो तब तक मैं भी जाकर सूसू करके आऊं और मैं उठ कर पंडाल से बाहर आ गया जहां पे सामने ही जेन्ट्स और लेडिज बाथरुम साथ साथ बने हुए थे मैं सीधा जेन्टस बाथरुम में गया और अपने खड़े हुए लण्ड को पकड़ कर दीवारों पे धार मारते हुए सूसू करने का मजा लेने लगा…

मैं जैसे ही बाहर निकला वही लड़की जो अन्दर स्टेज पर थी, बिल्कुल मेरे सामने दरवाजे के साथ कूश्ती कर रही थी, शायद उससे बाथरुम का दरवाजा नहीं खुल रहा था। उसे मैंने पहली बार इतनी नजदीक से देखा था उसका रंग धूप में समुन्दर के किनारे पड़ी रेत की तरह चमक रहा था, उसकी कमर मेरी तरफ़ थी वो दरवाजे की कुण्डी को पकड़ के थोड़ा झुकी हुई थी जिससे उसके चूतड़ों के उभार बाहर की ओर निकले हुए थे। उसके कूल्हों की गोलाईयां कमाल की थी। उसकी कमर से लेकर कूल्हों तक देखने में वो ऐसी लग रही थी जैसे अजन्ता की गुफ़ाओं में मूर्तियां बनाने वाले मूर्तिकार ने उसे अपने हाथों से बनाया हो। उसकी नंगी दिख रही कमर पे कुछ पसीने की बूंदें जो उसके गोरे बदन पे मोतियों की तरह चमक रही थी। दिल कर रहा था कि उसे अभी दबोच लूँ।

लेकिन मैं एक शरीफ़ आदमी हूँ। मैंने ना तो कभी किसी लड़की के साथ कोई जबरदस्ती की है और ना ही किसी लड़की का कभी फ़ायदा उठाने की कोशिश की है। अगर वो खुश है तो मैं अपने लण्ड का प्रयोग करता हूँ नहीं तो चक्षु चोदन करके ही खुश रहता हूँ।

तो मैं उसे देख ही रहा था कि वो कुण्डी छोड़ कर वापस मुड़ी। मैं उसके कुछ ज्यादा ही नजदीक खड़ा था जिससे वो मुड़ते ही एकदम मुझसे टकरा गई और उसकी छातियां मेरे सीने से आ चिपकी। जिससे मेरे शरीर में सनसनाहट सी दौड़ गई। वो जल्दी से मुझसे दूर हटी और मुझे बार बार सॉरी कहने लगी। मैंने जब ओ के कहा तो उसने थोड़ा सामान्य होते हुये मुझसे कहा- दरअसल दरवाजा नहीं खुल रहा है। क्या आप जरा!

मैंने उसकी बात खत्म होने से पहले ही ‘ हां जरुर ‘ कहा और दरवाजे को जोर से झटका मारा दरवाजा बहुत धीरे से बंद था और जरुरत से ज्यादा जोर लगाने के कारण एक झट्के में ही खुल गया जिससे मैं उस लड़की के उपर जा गिरा वैसे तो लड़की की तरफ़ मेरी पीठ थी लेकिन जैसे ही मुझे लगा कि मैं गिरने वाला हूँ मैंने एकदम से अपना मुँह घुमा लिया और अपनी दोनों हथेलियां सीधी करके इसलिए आगे निकाल ली कि अगर मैं गिरुँ तो हाथों को जमीन पर लगा कर खुद को गिरने से रोक सकूँ जिससे मेरे मुँह पर चोट लगने से बच सके, जैसा कि आमतौर पर मनुष्य करता है।

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