प्रेषक : प्रकाश कुमार

सभी अन्तर्वासना के पाठकों को प्रकाश का एक बार फिर नमस्कार ! मुझे आप लोगों की काफी ईमेल मिली और मैंने भी सभी को जवाब दिया। मैं आज आपको अपने जीवन का एक और वाकया बताना चाहता हूँ जो मेरे साथ कुछ ही दिन पहले हुआ।

एक दिन सुबह मेरे दोस्त राज का फ़ोन आया- प्रकाश ! आज एक जुगाड़ आया है, अगर तुम अपना गैंगबैंग करना चाहते हो तो तुंरत फार्म हाउस आ जाओ !

शनिवार का दिन था, मैं भी फ्री था, मैंने अपनी गाड़ी उठाई और उसके फार्म-हाउस पहुँच गया। वहाँ राज और विकी पहले से ही मौजूद थे और शराब का दौर चल रहा था। उनके साथ एक बहुत ही सुंदर और सेक्सी लड़की बैठी थी। उन्होंने मुझे भी शामिल होने के लिए कहा और मैं भी उनके साथ बैठ गया और बीयर का कैन ले लिया। उन्होंने मुझे उस लड़की से परिचय कराया। उसका नाम कविता था। वो गुडगाँव के किसी कॉल-सेण्टर में काम करती थी और पार्ट-टाइम यह काम भी करती थी। लड़की काफी बोल्ड थी- एकदम बिंदास स्मोकिंग और ड्रिंकिंग कर रही थी और काफी घुलमिल कर बात कर रही थी, ऐसा नहीं लग रहा था कि वहाँ कोई अनजाना हो !

विकी ने उसको अपने पास बुलाया और उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। इसी दौरान राज से भी नहीं रुका गया और उसने उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिये। मैं भी इंसान था, मैं भी कण्ट्रोल से बाहर हो रहा था, सो मैंने भी उसकी स्कर्ट की तरफ कूच किया और उसको खोल दिया। कुछ ही सेकंडो में वो गुलाबी ब्रा और चड्डी में थी। हमने भी अपने कपड़े उतार दिये और उसको चूमने लगे। जिसको जो मिला उसने वहीं अपना काम शुरू कर दिया। उसकी टांगों को मैं किस कर रहा था, स्तन राज के कब्जे में थे, होठों पर विकी का कब्जा था। सब अपने काम में मस्त थे। बंदी(लड़की) भी सभी को पूरा साथ दी रही थी। बिल्कुल वैक्सिंग किया हुआ जिस्म था। ऐसा लगा जैसे किसी स्वर्ग की अप्सरा के जिस्म पर तीन शैतान टूट पड़े हों।

लेकिन वो भी पूरा एन्जॉय कर रही थी। मैंने उसकी चड्डी उतार दी। राज ने उसकी ब्रा खोल दी। उसका प्रेम-छिद्र मेरी नजरों के सामने था। एकदम गुलाबी रंग की चूत देख कर मेरा मन करने लगा कि इसको चूस लूँ !

मैं यह सोच ही रहा था कि उसने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर मेरा मुँह लगा दिया। मेरी झिझक ख़त्म हो चुकी थी और मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा। वो भी मेरे सर को पकड़ कर जोर-जोर से अपनी चूत पर रगड़ने लगी। ऊपर राज उसके दोनों स्तन चूस रहा था। विकी जाने क्यों उसके होठों पर ही लगा हुआ था। पांच मिनट में ही उसकी चूत में से पानी आने लगा और वो एकदम से झड़ गई।

तभी विकी ने अपना लंड निकाला और उसके मुँह में डाल दिया और वो उसको लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। देखने से ही लगता था कि वो चूसने में कितनी अनुभवी है। मैंने भी अपना लंड निकला और उसकी चूत में घुसा दिया। अब राज बेचारा अपना लंड हाथ में पकड़ कर खड़ा हो गया और बोला- मैं कहाँ डालूँ ?

तभी कविता ने कहा- अभी एक छेद बाकी है !

अब बेचारे ने तेल लगाकर अपना लंड तैयार किया। मैं नीचे लेट गया, कविता मेरे लंड पर आ गई, विकी मेरे सर की तरफ खड़ा हो गया और अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया। अब राज के लिये रास्ता खुला था। उसने तेल लगाकर अपना लंड उसकी गांड में डालना शुरू किया तो वो चिल्लाने लगी, गालियाँ देने लगी- बहनचोद ! धीरे घुसा ! फाड़ेगा क्या भोसड़ी के ?

पर बहुत देर हो चुकी थी, उस हरामी ने अपना लंड उसकी गांड में घुसा दिया था। अब वो और मैं दोनों धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर- बाहर करने लगे। जब वो अंदर करता तो मैं बाहर और जब मैं अंदर तो वो बाहर ! कविता बहुत मस्त तरीके से अपनी गांड आगे पीछे करके हमारे दोनों लंड ले रही थी। वो पागलों की तरह गालियाँ देती जा रही थी और कह रही थी- बहुत मजा आ रहा है बहनचोदो ! मुझे चोदने में असली मजा तो सालो मुझे आ रहा है तीनो का लंड एक साथ लेने में !

अब हमारी भी हिम्मत और स्पीड धीरे-धीरे तेज होने लगी और हम तीनों ने आपस में कहा कि एक साथ तीनों करेंगे और हमने अपना सारा माल एक साथ उसकी चूत, गांड और मुँह में डाल दिया और कविता भी दूसरी बार स्खलित हुई !

कुछ देर उसी हालत में रहने के बाद हमने अपना लंड बाहर निकाला। कविता भी काफी थकी सी लग रही थी। हम बाथरूम में गए और अपना लंड धोकर फ़िर दारू पीने लगे। तभी राज ने डीवीडी पर एक नग्न मूवी लगा दी और हमारा मूड दोबारा बनाने लगा।

दस ही मिनट बाद हम दोबारा बिस्तर पे थे। इस बार मुझे कविता की गांड मिली, राज ने उसके मुँह पर कब्जा किया और विकी ने उसकी चूत पर !

और हम फिर शुरू हो गए ! इस बार का राउंड लगभग चालीस मिनट तक चला। इस दौरान कविता तीन बार झड़ी और हम भी अपना सारा माल उसके तीनों छेदों में डाल कर झड़ गए !

हमने होटल से लंच मंगवाया और चारो ने मिलकर बिना कपड़े पहने नंगे ही खाया।

एक घंटा आराम करने के बाद अब हम तीसरे राउंड के लिये तैयार थे !

इस बार मेरा लंड कविता के मुँह में था, राज के लंड ने चूत के दर्शन किये, विकी अब गांड मार रहा था। इस बार चुदाई साठ मिनट तक चली।

कविता बहुत ही हिम्मत वाली लड़की थी जो हम तीनों का पूरा साथ दिए जा रही थी, गजब की चुदासु थी वो, और हम भी चोदूओं की तरह उसको चोदे जा रहे थे। उसकी चूत एकदम फूल कर डबलरोटी जैसी हो गई थी, उसका मुँह लाल हो चुका था, गांड बिल्कुल खुल चुकी थी, पर वो थी कि चुदवाए जा रही थी और हम थे कि चोदे जा रहे थे। साठ मिनट में वो पाँच बार और झड़ी और हम तीनों तीसरी बार फिर एकसाथ उसके तीनों छेदों में झड़ गए।उसके तीनों छेदों में से वीर्य बाहर निकल रहा था। बिस्तर को देख कर ऐसा लगता था कि जैसे कुश्ती का मैच हुआ हो !

हम चारो बिल्कुल थक चुके थे ! हम सो गए। हमारी आँख शाम को आठ बजे खुली। तब कविता सिगरेट पी रही थी, वो बोली- अब मेरे जाने का समय हो गया है, सो मेरी पेमेंट कर दो। राज ने एक दस हज़ार की गड्डी निकाली और उसको दे दी और उसने ख़ुशी-खुशी वो अपने पर्स में डाल ली और बोली- मुझे राजीव चौक पर ड्राप कर दो !

मैंने अपनी गाडी स्टार्ट की और उसको राजीव चौक पर ड्राप करने चल पड़ा।

रास्ते में मैंने उससे पूछा- तुम यह सब किसी मजबूरी में करती हो या क्या कारण है?

तो वो बोली- कुछ मुझे शौक है, कुछ मज़बूरी भी !

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