लेखिका : आंचल

जैसे कि मैंने पहले भाग में बताया था कि जैसे ही मेरे और मेरे नौकर के बीच इशारों में बातें हुई तो उसने जल्दी से तौलिया लपेटा और अंदर आने लगा ही था कि कार के होर्न की आवाज़ सुन हम दोनों का मूड खराब हो गया और फिर अपने पति के साथ में शहर वापस घर आ गई लेकिन रह रह कर उसका लौड़ा मेरी आँखों के सामने घूमता रहता था। उसका काला मोटा लौड़ा मुझे सोने नहीं देता था। पति का लौड़ा तो अब और फीका लगने लगा था।

तभी अचानक से मेरे पति को एक कॉल लैटर आई। कनाडा की एक बहुत बड़ा कंपनी होटल, रेस्टोरेंट आदि के बारे में सेमिनार लग रहे थे। मेरे पति ने और उनके एक दोस्त ने यह ट्रिप करने का फैंसला लिया। उनका वहाँ पन्द्रह दिन का सेमिनार था लेकिन घूमने के लिए एक महीने की रिटर्न-टिकट लेकर गए थे।

उनके जाने के बाद मैं खुश थी तभी एक दिन मैंने अपने पुराने बॉय फ्रेंड का स्क्रैप जब ऑरकुट में देखा तो खिल उठी। उसने अपना मोबाइल नंबर छोड़ा था तो मैंने तुरंत कॉल की और उसको अपने नीरस यौन-जीवन के बारे बताया।

उसने कहा- तू मायके आजा ! यहीं हम मौका देख मजे करेंगे !

कहते हैं ना कि जब भगवान् सुनता है तो बहुत पास आकर सुन लेता है ! सासु माँ ने मुझे कहा- गाँव में गेहूं की फसल को पहली खाद डालनी है और फोकल पॉइंट का परमिट यहाँ है और उस पर या मेरे पति के या मेरे हस्ताक्षर होने हैं।

मैंने पति से फ़ोन पर पूछा तो उन्होंने मुझे बताया कि कहाँ पड़ा है परमिट और पैसे वगैरा !

मैं कार लेकर गाँव चली गई। राम ने गेट खोला। मुझे देख उसकी आंखें चमक उठी। उसको देख मैं भी अपनी अदा से मुस्कुरा दी।

कार लगा कर चाबी दे जाना राजा ! मैंने गिरने का नाटक सा किया तो उसने मुझे थाम लिया और अपने लिए राजा सुन कर वो और छाती चौड़ी करने लगा, अभी आया मेरी… ! कहकर चुप हो गया। कुछ देर बाद वो पानी लेकर आया। मैं वाशरूम गई और तरोताज़ा होकर अपने साथ लेकर आई पारदर्शी सेक्सी नाइटी पहन ली। गुलाबी नाइटी में काली ब्रा-पेंटी किसी को भी जला कर राख कर सकते थे। वो चला गया।

दस मिनट बाद मैंने आवाज़ लगाईं और खुद बिस्तर पर उलटी लेट गई, नाइटी सरका कर ऊपर कर दी जिससे मेरे चूतड़ साफ़ उभर कर दिख रहे थे। उसने दरवाज़ा खोला,

मैंने कहा-आ जाओ ! अभी गिरने से मेरी टांग में दर्द होने लगा है, थोड़ा दबा दो, मालिश कर दो ! आराम से ऊपर बैठ जाओ !

वो बाहर से सरसों के तेल की बोतल लेकर आया और कुण्डी लगा दी- आराम से करेंगे, तो दर्द जल्दी भाग जाएगा !

उफ्फफ्फ्फ़ !

वो तेल लगाकर मालिश करने लगा। मैंने धीरे धीरे नीचे से सारी नाइटी उठा दी और उसका हाथ पकड़ कर अपने चूतडों पर रख दिया। फिर दूसरा भी !

उसने थोड़ा तेल लगा कर चूतड़ मसले तो मैं गर्म होने लगी, खुद नीचे से उठने लगी मैं !

मैं एकदम सीधी हुई और उसको पलट कर उसकी जांघों पर बैठ गई, अपनी नाइटी उतार फेंकी और मैंने ब्रा भी उतार फेंकी, उसके सामने दो मम्मे थे। मैंने उसके पजामे को खोल दिया फिर उसकी शर्ट भी और टूट पड़ी उसके ऊपर !

मेरी आग देख वो हैरान रह गया- बहुत प्यासी हो मेरी जान ?

मैंने उसके अंडरवीयर से लुल्ला निकाल लिया और रांड के तरीके से चूसने लगी।

वाह मेरी बुलबुल ! मेरी हसीना और चूस !

हां ! चूसूंगी कमीने ! तेरे मालिक का तो ठीक से खड़ा भी नहीं होता ! फाड़ डालो ! मेरा बस चले तो एक साथ गांड और चूत मरवा लूँ !

इसका भी इंतजाम है मेरी जान !

अबे बिरजू बाबा ! अन्दर आ जाओ ! क्यूँ छुप कर देख कर मुठ मरोगे, इसकी ही मार लो कमीनी की ! बहुत आग है इसकी चूत में !

राम ने मेरी टांगें फैला दी और बीच आकर दोनों टाँगे कंधों पर टिका कर झटका दिया, लौड़ा चीरता हुआ घुस गया जैसे आज मेरी झिल्ली फट रही हो !

लेकिन मैंने हिम्मत रखी, मैं भी खेली खाई महिला थी। उसने जल्दी ही पूरा जड़ तक पहुंचा दिया।

वाह मेरे शेर ! वाह ! फटने दे इसको !

बिरजू मेरे चेहरे के पास आकर बैठ गया। मैंने उसके पजामे का नाड़ा खोला और फिर उसके कच्छे को उतारा।

मैं चौंक गई, काले रंग का नाग मानो कुंडली मारे बैठा हो ! उसका सोया हुआ लौड़ा भी मेरे पति के खड़े लौड़े से ज्यादा बड़ा था !

उसने दारु पी रखी थी। मैंने जैसे उसको छुआ, उसमें हरक़त होने लगी। मैंने अपना तकिया थोड़ा ऊँचा किया और उसके लौड़े को मुँह में ले लिया।

उसका लौड़ा कभी किसी ने मुँह में नहीं लिया था ऐसा उसने मुझे बाद में बताया और यह भी बताया कि गाँव की कई बड़े घर की औरतें उससे चुदने को आती जिनको बच्चा नहीं होता था। सास बेटे में नहीं बहु में दोष निकालती थी और पति अपनी झूठी मर्दानगी की दुहाई दे औरत को दोष देते !

बिरजू ने तीन चार औरतों की कोख भी हरी की थी।

राम अपनी धुन में मुझे चोद रहा था और मैं बिरजू का चूस रही थी। जैसे ही उसका पूरा तन गया, वो मेरे मुँह में आना बंद हो दिया, सिर्फ उसका टोपा ही चूस पा रही थी मैं ! बाकी जुबान से उसको मजा दे रही थी।

तभी राम ने तेज़ी दिखाई, वो पागलों की तरह उछल कर मुझे चोदने लगा।

बिरजू का भी मेरे मुँह से निकल गया और राम ने मेरी हड्डियाँ हिला दी और एक तूफ़ान के बाद शांत होकर मुझ पर गिर कर हांफने लगा। उसके पानी ने मेरी सारी प्यास बुझा दी।

फिर बिरजू ने मोर्चा संभाला !मुझे डर लग रहा था, उसने काफी थूक लगा गीला किया और रख दिया मेरी चूत पे ! उसने टाँगे इतनी चौड़ी कर दी कि चूत खुल गई ! काफी बड़ा खिलाड़ी लगा ! उसने झटका देने के बजाये धीरे-धीरे घुसाता चला गया। मेरी दर्द से जान निकल रही थी। जब मुझे लगा कि अब घुस गया, मैंने सर ऊपर करके देखा तो अभी आधा बाहर था।

तभी उसने मर्दानगी दिखाई और इतना ज़बरदस्त झटका दिया कि मेरी सांस अटक गई, आंखें पत्थर होने लगी, दोनों हाथों से चादर को पकड़ लिया। लेकिन उसने तुरंत निकाल लिया और फिर डाला फिर उसने मुझे वो सुख दिया जो मुझे वाकई पहले कभी नहीं मिला था। उसके लौड़े से इतना पानी निकला कि जितना कभी नहीं देखा। कुछ चूत में कुछ मम्मों पर कुछ होंठों पर ! इतने पानी से तो एक साथ दस बच्चे ठहर जाएँ !मैं उठी, चादर पर खून के धब्बे लगे थे। वाशरूम गई, चूत कोसे पानी से साफ़ की। मुझसे चला नहीं जा रहा था। वो दोनों वहीं मौजूद थे, मैंने कहा- मेरे कपडे !

बिरजू बोला- साली, दे दूंगा ! क्या जल्दी है ?

मैंने कहा- अब मुझे जाना है !

पर्स से परमिट की कॉपी निकाली, हस्ताक्षर किये और दोनों को पैसे दिए। मैं सिर्फ ब्रा पेंटी में थी, मानो अपने मर्द के सामने खड़ी होऊं !

वो दोनों मुझे देख-देख मजे ले रहे थे।

लाओ कपड़े दो !

कपड़े मिल जायेंगे ! एक बार बाँहों में आजा मेरी जान !

मैंने गुस्से से कहा- अपनी औकात में रहो ! जितना मेरा दिल किया, मैंने तुम्हें मजे दिए !

वो बोला- साली, छिनाल कहीं की ! साली, तू प्यासी थी, तू चल के आई थी ना कि हम !

हरामी जुबान बंद कर ! कपड़े दे दे !

तेरी माँ की चूत, कुतिया ! बिरजू गुस्से से उठा, उसका लौड़ा तन कर हिलौरे खा रहा था, मेरे बालों को खींचते हुए होंठ चूमने लगा।

हरामी छोड़ ! औकात में रह !

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