लेखिका-प्रेषिका : कामिनी सक्सेना, मोनिशा बसु
राज और जय दोनों बेतहाशा भागते हुये एक सरकारी मकान के अहाते में कूद पड़े। दोनों की सांसें धौंकनी के समान चल रही थी। फिर भी वे भागते हुये घर के पिछवाड़े में आ गये। मकान में अन्दर की ओर खुलता हुआ एक दरवाजा था। दोनों दबे पांव अन्दर आ गये। अन्दर का दरवाजा भी खुला हुआ था।

राज ने कमरे में झांक कर देखा। टीवी चल रहा था पर कमरे में कोई नहीं था। तभी उनके कानों में बाथरूम से किसी औरत के गुनगुनाने की आवाज आई। दोनों ने इशारा किया और राज पलंग के नीचे सरक गया। तभी घर के से बाहर पुलिस सीटी बजाती हुई निकली।

रात गहराने लगी थी। जय ने खिड़की से झांक कर बाहर देखा। पुलिस के साये अंधेरे में दूर जाते हुये नजर आ रहे थे। जय भी कमरे के एक कोने में दुबक गया। तभी बाथरूम का दरवाजा खुला। राज के सामने दो नंगे पांव नजर आ रहे थे। उसे किसी जवान लड़की के होने का संकेत मिला।

तभी रिवॉल्वर की नाल पलंग के नीचे दिखी,”तुम जो भी हो बाहर आ जाओ, वर्ना गोली मार दूंगी !”

राज की रूह तक कांप गई। वह चुपचाप पलंग के नीचे से निकल आया। सामने एक बेहद सुन्दर सी जवान लड़की रिवॉल्वर लिये खड़ी थी। एक तौलिया उसके वक्ष के उभारों से लिपटा हुआ कूल्हों तक था। वो कुछ और कहती उसके पहले ही पीछे से जय ने लपक कर उसकी रिवॉल्वर छीन ली। उसके शरीर पर लपेटा हुआ तौलिया अचानक ही ढीला हो गया और नीचे गिरने लगा। राज ने लपक कर तौलिया पकड़ लिया और उसे फिर से लपेट दिया।

“राज, गिरने दे तौलिया… जवान जिस्म है … जरा मजा तो लें !”

युवती घबरा सी गई, तौलिया सम्भालते हुये भी उसने नीचे गिरा दिया। उसका चमकीला नंगा बदन ट्यूब लाईट की रोशनी दमक उठा । दोनों के बदन झनझना उठे।

उसे देखते ही दोनों की आखों में वहशत भरी एक चमक आ गई। जय ने तो उसे पीछे से पकड़ ही लिया। उसका लण्ड कड़क होने लगा था। राज भी इस हुस्न के आक्रमण को नहीं झेल पाया और सामने से वो उससे लिपट गया। पहले तो वो लड़की छटपटाई, पर कुछ भी नहीं कर पाने अवस्था में उसने अपने आप को दोनों के हवाले कर दिया।

“बस… मुझे नोचो मत … जो करना है प्यार से करो, आखिर मैं भी तो एक इन्सान हूँ!” युवती के मुख से एक कराह सी निकली। दोनों को अपनी इस जानवरों जैसी हरकत पर शरम आने लगी।

“सॉरी, आपको नंगा देख कर हमारा बांध टूट गया था।”

“आओ, जो करना हो बिस्तर पर करो… पर तुम दोनों भाग क्यूँ रहे हो…?” अचानक युवती का स्वर बदल सा गया। उसके कोमल स्वर में अब वासना का पुट आ चुका था।

राज जरा नाजुक दिल का था सो सहानुभूति से उसकी रुलाई फ़ूट पड़ी…”हमारी गर्ल फ़्रेण्ड ने हमें घर पर रात को बुलाया था। पर उसी के सामने वाले फ़्लेट में एक खून हो गया था। पुलिस छान बीन कर रही थी तो हम डर गये।

पीछे की खिड़की से कूद कर हम भाग निकले और ये पुलिस वाले हमें ही कसूरवार मान कर पीछे पड़ गये !”

“मेरा नाम काजल है… तुम यहाँ बिल्कुल सुरक्षित हो… अब चुप हो जाओ… जो हुआ उसे भूल जाओ !” काजल ने उसे अपने पास लेटाते हुये चूम लिया।

“पर यह मत सोच लेना कि आप बच गई… आपको चोदना तो है ही…!” जय बोल पड़ा।
“है तेरी हिम्मत … बड़ा आया चोदने वाला !” काजल ने आंखे तरेरते हुये उसे जोश दिलाया।

“क्या… साली को देख तो… अभी बताता हूँ … !”कह कर जय ने उसे अपनी तरफ़ घुमाया और उसे दबोच लिया। वो एक बेबस चिड़िया की तरह फ़ड़फ़ड़ाने लगी। तभी दोनों के मोटे लण्ड उसके सामने आ गये।

“ले दबा इसे, दो दो मस्त लण्ड हैं !” काजल ने दोनों के मोटे मोटे लण्ड थाम लिये और मुठ मारने लगी। दोनों ही झूम उठे।
“चला हाथ मस्ती से साली… हां ये बात हुई ना … !”
काजल बड़े यत्न से और मस्ती से मुठ पर हाथ चलाने लगी।
“अब मुँह से चूस ले और जोर से चूसना…!”

काजल ने उनके लण्ड जम कर चूसना चालू कर दिया। कभी जय का लण्ड चूसती और कभी राज का लण्ड। दोनों के चूतड़ हिलने लगे और लग रहा था कि वे काजल का मुख चोद रहे हो।

तभी उसे अपनी गांड में लण्ड को छूने का अहसास हुआ।
“जय, मार दे गाण्ड साली की … मै चूत सम्हालता हूं…” काजल दोनों के बीच में सेण्डविच हो गई थी। उसने भी अपने आप को एडजस्ट किया और अपनी टांगे चौड़ा दी। काजल मन ही मन उनसे चुदाने की तैयारी कर चुकी थी। पर थोड़ा बहुत नाटक तो करना था ना। दो दो लण्ड उसके शरीर की सतह पर तड़प रहे थे, उसके जिस्म में यहा वहां ठोकरे मार रहे थे। उसकी चुदाई की इच्छा बढ़ती जा रही थी।
“तुम दोनों एक बेबस लड़की के साथ यह सब रहे हो … देखना मैं उसकी सजा जरूर दूंगी… आह्ह !”

जय का लण्ड काजल की चूत में घुस चुका था… उधर राज का लण्ड भी उसकी गाण्ड में घुसने की कोशिश कर रहा था। जब उसकी चूत में लण्ड घुस गया तो काजल ने अपनी गाण्ड ढीली की। छेद को ढीला करते ही राज का लण्ड अन्दर घुस गया।

काजल का मन हरा हो गया। उसने आनंद भरी एक सीत्कार भरी। उसके दोनों छोर पर लण्ड घुस चुके थे। वो एक करवट पर लेटी अपने चूतड़ हल्के से हिलाने लगी।
“आह हा … उह्ह्ह्… साली चूत हिला हिला कर चुदा रही है और मजे ले रही है…
अब तो हमें गाली तो मत दे…”

“ऊईईईईई… मेरे जिस्म में दो दो लण्ड गाड़ कर मुझे मस्त कर दिया है… तो दिल तो आपको धन्यवाद तो देगा ही ना … साले जय चोद जरा मस्ती से… लगना चाहिये कि मर्द मिला है… आईईई राज… तू क्या मेरी गाण्ड फ़ाड़ ही डालेगा… चल लगा तू भी जरा मस्त हो कर…”

दोनों के लण्ड जोर मारने लगे और काजल चुदने लगी… काजल दोनों तरफ़ से एक साथ कभी कभी नहीं चुदी थी। यह पहला अनुभव था… उसे लगने लगा था कि काश शादी भी दो मर्दों से होने चाहिये… वर्ना चुदाई का क्या मजा ?

“राज , अब मुझे इसकी गाण्ड चोदने दे… तू इसकी चूत मार … !” जय ने प्रस्ताव रखा। राज तुरन्त मान गया और पोजिशन बदलने लगे। इतने में उसका दरवाजा किसी ने खटखटाया।
“कौन है…?” काजल ने खीज कर कहा।
“मैडम, सरदार सुरजीत सिंह, हेड कांस्टेबल रिपोर्टिंग…! ” जय ने तुरन्त लपक कर रिवाल्वर उठा ली…
“तो आप भी पुलिस है… देखो मेरे हाथ में रिवॉल्वर है, उसे रवाना कर दो वर्ना…।”

काजल मुस्कराई और दरवाजे की ओर चल दी। उसने अपना गाउन पहना और तौलिया सर पर बांधा… तीन पुलिस वाले थे। तीनों पुलिस वालों ने उसे सैल्यूट मारा।
“क्या है?”
“मैडम ध्यान रखें… दो कातिल इधर ही भाग कर आये हैं… सावधान रहना…!”
“ठीक है, अब जाओ…” उसने दरवाजा बंद कर दिया।

राज और जय दोनों सावधान हो चुके थे। अन्दर आते हुई बोली,”चलो क्या हुआ लण्ड ढीले हो गये ?” वो हंसते हुई बोली। दोनों ही वहाँ से जाने की तैयारी करने लगे।
“अभी मत जाओ, बाहर पुलिस तुम्हें ढूंढ रही है।”
“बाहर भी पुलिस और अन्दर भी पुलिस… सॉरी मैडम… हमारे पास रिवाल्वर नहीं होती तो हम अन्दर ही होते !”
” वो तो मैं चाहती तो सब कुछ कर सकती थी…!”
“ओये चुप हो जा… इसी रिवाल्वर से तेरी गाण्ड में गोली नहीं उतार देता…” जय कुछ विचलित सा होता हुआ बोला।

“खाली रिवाल्वर से गोलियाँ नहीं चला करती हैं जानी…!” अब जय के चौंकने की बारी थी। उसने तुरन्त रिवाल्वर चेक की और उसने विस्मित नजरों से काजल को देखा। काजल के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी।

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