हाय दोस्तो, मेरा नाम जय है और मैं एक काल बॉय हूँ। अन्तर्वासना डोट काम पर मेरी पहली कहानी औरत की चाहत प्रकाशित हुई, मेरी दिल को बड़ी ही खुशी हुई और पाठकों के बहुत सारे मेल मेरे पास आये जिनको पढ़कर बहुत ही ज्यादा खुशी मिली। मैं अपने हृदय से धन्यवाद करता हूँ कि आप को मेरी कहानी पसन्द आई। मैंने जो कहानी लिखी थी वो वास्तव में सच थी और जो कहानी अब लिख रहा हूँ वो भी सच ही है। पाठक जो भी समझें, पर यह एक हकीकत है क्योंकि मेरे पास इतना लिखने को है कि मैं रोज एक कहानी लिखूं तो भी तीन चार साल लग जायेंगे जो कि काल्पनिक नहीं हकीकत है।

इस समाज का एक कड़वा सच और मेरा भुगता हुआ। चलो अब अपको मैं अपना परिचय एक बार फिर से कराता हूँ !

मेरा नाम जय रंग साफ, कद ५ फीट ८ इंच, एकदम से स्लिम हूँ। मैं दिल्ली में रहता हूँ।

अब मैं दोस्तो अपनी कहानी पर आता हूँ।

मेरी नौकरी तो शिवानी मैडम ने अपने पति के ही ऑफिस में लगवा दी और मैं अब बड़ा ही खुश रहने लगा। दो महीने के बाद रंजीत मेरे घर पर आया और कहने लगा- जय क्या बात है यार ! आप तो हम को भूल ही गये ? क्या हुआ ?

मैंने कहा- यार रंजीत ! आपने तो मेरी जिन्दगी ही बदल दी ! आपका अहसान तो मैं जिन्दगी भर नहीं भुला सकता ! रंजीत आप क्या कह रहे हो ! मैं तो आपका जिन्दगी भर आभारी रहूँगा।

रंजीत ने कहा- तो फिर आप ना तो हमसे मिलने के ही लिए आये और ना ही फोन किया? हम तो समझे कि आप तो हमको भूल ही गये, जय।

मैंने कहा- नहीं रंजीत ! बात ही कुछ ऐसी है कि समय ही नहीं मिला। यार रंजीत, नौकरी जो कर ली है !

रंजीत कहने लगा- नौकरी कहां पर कर ली है?

तो मैंने कहा- मैडम शिवानी जी ने अपने पति के ऑफिस में ग्राफिक्स डिजायनर की नौकरी दिला दी है।

तो रंजीत कहने लगा- यह तो बहुत ही खुशी की बात है यार ! आपने तो मुँह भी मीठा नहीं करवाया !

मैंने कहा- दोस्त रंजीत, ये लो अपना मुँह मीठा करो।

तो रंजीत ने मिठाई खाने के बाद कहा- यार जय, आपने तो फोन भी ले लिया है ! यार ऐसी क्या लाटरी लग गई?

मैंने कहा- नहीं रंजीत, यह तो आपकी ही मेहरबानी है कि आज मेरे पास सब कुछ है। और मुझे क्या चाहिए मेरे दोस्त रंजीत। आपने जो मुझ गरीब पर अहसान किया हैं वो आज के जमाने में कौन किस पर करता हैं रंजीत। आप तो मेरे लिए भगवान हैं।

थोड़ी देर के बाद रंजीत बोला- यार जय, यह क्या हुआ ? आपने हमारे लिए पार्टी का भी इंतजाम नहीं किया ? ये तो कोई बात नहीं हुई जय।

मैंने कहा- मेरे दोस्त रंजीत, बोलो आपको क्या चाहिए।

रंजीत ने कहा- यार कुछ बीयर-शीयर हो जाए।

मैंने कहा- हाँ यार, क्यों नहीं ! अभी आपके लिए हाजिर करता हूँ !

तो मैंने फ्रिज से दो बीयर निकाली और मेज़ पर रख दी, दो गिलास में डाल दी और फ्रिज से पनीर निकाल कर उसको टुकड़ों में काटकर प्लेट में रखकर कहा- लो यार रंजीत।

हम दोनों ने एक एक गिलास बीयर पी। और फिर मैंने दो गिलास में डाल दी तो रंजीत कहने लगा- यार जय, आपको हमारा काम अच्छा नहीं लगा।

मैंने कहा- नहीं यार रंजीत आपके काम की ही वजह से तो मैं सब कुछ हूँ, नहीं तो मेरे पास क्या था ? जो भी आज मेरे पास वो सब कुछ आपका ही तो दिया हुआ है, आप तो मेरे लिए भगवान के समान हो। आप जो भी कहें मैं वही करने के लिए हमेशा ही तैयार हूँ और रहूँगा।

फिर मैंने दो गिलास में बीयर डाली और रंजीत को कहा- यार पियो और मेरे लिए कोई काम हो तो बताओ, मैं अपना सारा काम छोड़कर आपका जो भी काम होगा मैं करने के लिए हमेशा तैयार हूँ।

रंजीत ने कहा- यार जय, मुझको आपके बारे में सब कुछ पता है जो आपको भी नहीं पता।

तो मैंने कहा- रंजीत भाई ऐसी क्या बात हुई कि आप इतने ज्यादा परेशान हो गये?

रंजीत कहने लगा- यार आपको मेरे काम के बारे में तो पता ही है, तो मेरी भी मजबूरी समझो, मैं इसलिए ही आपके पास आया हूँ ! आप तो एक काल करके खुश हो और अपनी जिन्दगी आराम से काट रहे हो, पर मेरी तो जिन्दगी ही दूभर हो गई है और मैं परेशानी में घिर गया हूँ क्योंकि हर कोई अब आपकी ही डिमान्ड करने लगी है, पर हमें तो पता ही नहीं था कि आप कहाँ पर हो।

मैंने कहा- यार रंजीत, मेरा जो भी हैं वो सब आपकी ही तो देन हैं तो आप परेशान क्यों हो?

रंजीत ने कहा- जय अपना पहले तो फोन नम्बर दो !

और मैंने अपना फोन नम्बर रंजीत को दिया तो रंजीत ने कहा- आपको एक हफ़्ते तक रोज काल पर जाना है।

मैंने कहा- रंजीत भाई, ऐसा तो मत करो, मुझे भी तो काम करना होता है।

रंजीत ने कहा- अभी तो कह रहे थे कि जो भी आप कहोगे मैं वही करुँगा ! तो अब क्या हुआ?

मैंने कहा- यार रंजीत मुझे दिन भर नौकरी भी तो करनी है और फिर काम का बोझ भी तो बहुत ही ज्यादा है।

रंजीत ने कहा- कोई बात नहीं ! आपको जो चाहिए वो सब मिलेगा।

फिर मैंने हामी भर दी तो रंजीत बोला- जय यार आप तो कभी कुछ लेते ही नहीं थे पर आपके तो फ्रिज में तो बहुत ही बीयर रखी हैं और आप मेरे साथ भी पी रहे हो ! माजरा क्या है?

मैंने कहा- रंजीत यह आपकी ही सोहबत का ही तो असर है।

रंजीत बोला- अब आप मेरे ही साथ काम करोगे।

मैंने कहा- ठीक है, आप जैसा कहोगे, मैं तैयार हूँ !

तो रंजीत ने कहा- मैं आपको फोन नम्बर दूंगा और आप उस पर फोन करना !

मैंने कहा- नहीं रंजीत, मुझे नहीं उनको आप मेरा फोन नम्बर देना ! मैं जवाब दूगाँ जैसा आप चाहोगे और आप जो भी दोगे मुझे मंजूर है।

रंजीत ने कहा- जय ऐसी बात है तो ६०-४० कर लेते हैं।

मैंने कहा- ठीक है, पर कीमत मेरे ही हिसाब से लगाना !

रंजीत ने कहा- ठीक है यार आज आप की ही माँग है, जैसा आप कहोगें वही होगा। बस आप फोन का जवाब देना।

फिर रंजीत जाने लगा तो मैंने कहा- यार रंजीत यह तो कोई बात नहीं हुई, यह बीयर तो खत्म कर देते हैं !

हम दोनों ने एक-एक गिलास बीयर और पी और फिर रंजीत जाने लगा तो मैंने कहा- यार चलो अब खाना खा लेते हैं।

रंजीत ने कहा- नहीं यार, फिर कभी साथ में खायेंगे।

मैंने कहा- चलो बाहर खा लेते हैं !

तो रंजीत ने कहा- आज नहीं यार ! टाइम बहुत हो चुका हैं और मुझे भी तो कुछ अरेन्ज करना है।

मैं रंजीत को बाहर तक छोड़ने के लिए आया।

अगले दिन मुझे साढ़े ग्यारह बजे एक मैडम का फोन आया कि मैं मिस्टर जय से बात कर सकती हूँ? तो मैंने कहा- हाँ ! मैं जय बोल रहा हूँ ! आप कौन ?

मैडम ने कहा- मैं रूबी बोल रही हूँ !

मैंने कहा- हाँ बोलिये रूबी जी ! मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ ?

रूबी मैडम ने कहा- मुझे रंजीत ने आपका नम्बर दिया है !

मैंने कहा- हाँ ठीक है, कोई बात नहीं! आप कहिए !

रूबी कहने लगी- मेरा नाम रूबी है और मेरी उम्र २६ साल है।

मैंने कहा- रूबी मैम कहिए, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ?

तो रूबी बोली- आज आपको हमारे घर पर शाम को नौ बजे आना है और सही टाइम पर आना हैं हम आपका इन्तजार करेंगे। आपको जरूर आना है।

मैंने कहा- रूबी जी ! पता तो बता दो !

तो रूबी ने अपना पता नोएडा सेक्टर १४ बताया। मैंने कहा- ठीक है, आपको फीस का तो पता है ना ?

रूबी मैम बोली- फीस की आप चिन्ता मत करो, आपको आपकी फीस के हिसाब से ज्यादा ही मिलेगा।

कहा- रूबी मैडम, ठीक है, मैं पहुँच जाऊँगा।

फिर मैंने रंजीत को फोन किया तो रंजीत ने कहा- हाँ यार ! रूबी को मैंने ही आपका फोन दिया था, उसकी काल आई होगी !

मैंने कहा- हाँ ! मुझे क्या करना होगा?

रंजीत ने कहा- यार वही सब कुछ जो आपने पहले किया था बस अब घबराना मत ! सही समय पर पहुँच जाना।

मैं शाम को ठीक समय पर रूबी मैडम के घर पर पहुँचा तो एक मैम ने दरवाजा खोला, पूछा कि आपको किससे मिलना है?

मैंने कहा- मुझे रूबी मैडम से मिलना है !

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