प्रेषक : क्षितिज़

मेरा नाम क्षितिज है और यह मेरी पहली कहानी है। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। आज मैं आपको अपनी वास्तविक कहानी बताना चाहता हूँ।

सबसे पहले मैं बताना चाहूँगा कि मुझे इस कहानी वाली घटना से पहले सेक्स का कोई अनुभव नहीं था। मुझे दिल्ली आये हुए दो साल हो चुके हैं।

मुझे एक दिन मेरे दूर के मामा की लड़की पायल का फ़ोन आया कि वो दिल्ली जॉब करने आ रही है क्योंकि उसका डॉक्टर का कोर्स ख़त्म हो गया है और मूलचंद हॉस्पिटल में उसको जॉब मिल गया है जनरल फ़ीज़िशीयन की पोस्ट के लिए। हम पूरे 5 साल बाद मिल रहे थे।

मैंने उसे रेलवे स्टेशन पर देखा तो देखता ही रह गया। साधारण सी दिखने वाली लड़की अब बहुत सुंदर और सुडौल बदन की मालकिन हो गई थी। मैं उसे देखता ही रह गया और वो आकर गले लग गई और मुझे गाल पर चूम कर मेरा हाथ पकड़ कर बोली- अब घर चलोगे या यहीं रुके रहोगे?

तब मेरी तन्द्रा टूटी और मैं उसे लेकर घर आ गया।

मैं बता दूं कि वो एक सीधी-साधी सी लड़की है बस बड़ा डॉक्टर बनाना उसका मकसद है। हम लोग पहले तो बस से ऑफिस साथ-2 जाने लगे पर इसमें समय के तालमेल की समस्या होने लगी तो मैंने पैशन बाईक खरीद ली।

क्योंकि मैं बहुत दिन बाद बाईक चला रहा था तो थोड़ा धीरे चलता था और वो हमेशा एक तरफ़ टाँगें करके बैठती थी जिससे बाईक को बैलेंस करने में परेशानी आती थी इस कारण हम रोज लेट हो जाते थे हॉस्पिटल पहुचने में।

एक दिन सुबह हम पहले ही आधा घण्टा लेट हो गए तो वो बोली- आज बाईक तेज चलाना जिससे समय पर पहुँचे !

तो मैंने उससे कहा- तुम अपनी टांगें दोनों तरफ़ करके बैठो, तभी तेज चला सकता हूँ ! बाईक बैलेंस सही होगी !

तो वो मान गई। उस दिन ठण्ड बहुत थी और जब बाईक 80 की स्पीड से चली तो और भी ठण्ड लगने लगी तो वो मुझसे थोड़ा सट कर बैठ गई और दोनों हाथो से उसने मुझे जकड़ लिया। तब पहली बार मुझे किसी लड़की के स्पर्श के जादू का अहसास हुआ।

उस दिन तो हम समय पर पहुँच गए और लगभग समय पर ही रोज पहुँचने लगे। अब वो रोज टांगें दोनों तरफ़ करके ही बैठती थी। अभी तक मेरे दिल में उसके लिए कुछ नेहं था मंगर एक महीने के अन्दर वो बहुत मुझसे खुल कर बातें करने लगी, अपने कॉलेज और हॉस्पिटल के लड़के-लड़कियों के बारे में और मैं भी उसे अपने ऑफिस में कर्मचारियों के बीच चल रहे चक्करों के बारे में बताने लगा। एक दिन की बात है, सुबह-2 वो नहा कर आई तब सुबह के 6 बज रहे थे और मैं अभी सो रहा था। तो उसने सोचा कि मैं सो रहा हूँ तो वो वहीं खड़ी हो कर आईने में अपने बदन का जायजा लेने लगी। उसके शरीर पर शमीज और नीचे बड़ा तौलिया था। लेकिन मुझे सोया समझ कर उसने तौलिया निकाल दिया और अपने बदन को देखने लगी।

तभी मेरी नींद टूटी और मैंने रजाई में से देखा तो दंग रह गया। वो उस समय एक ताज़े गुलाब की तरह लग रही थी, दूध जैसा गोरा तराशा बदन, दो तनी चूचियाँ और मस्त फिगर ! मैं तो ऊपर से नीचे तक हिल गया और लण्ड महाराज सलामी देने लगे।

अचानक उसे लगा कि मैं जाग गया हूँ तो झट से उसने तौलिया लपेट लिया और रोज की तरह हम ऑफिस चले गए। मगर शाम को उसके अंदाज बदले-2 से लग रहे थे। आते ही वो अपने कपड़े मेरे सामने बदलने लगी तो मैं कमरे से बाहर जाने लगा। तो वो बोली- आप बाहर क्यों जा रहे हो, ठण्ड बहुत है, आप यहीं बैठो और मुँह दूसरी तरफ कर लो ! मैं कपडे बदल लेती हूँ !

शायद वो भी मुझे अपना तराशा बदन दिखाना चाहती थी और मैं भी चोरी-2 उसे निहार लेता था। अब वो मेरे सामने ही कपड़े बदलने से शरमाती नहीं थी। कई बार मैंने उसकी काली पैंटी और सफ़ेद ब्रा के नज़ारे देखे।

बात है 31 दिसम्बर 2009 की ! उस दिन काफी ठण्ड थी और साल का आखिरी दिन भी। वो मुझसे बोली- नेट नहीं चल रहा है, जरा आप ओपेरटर से पता करके तो आओ।

मैं करीब 9 बजे ओपेरटर के घर गया और नेट ठीक करा के 9.30 पर घर पंहुचा तो वो एक दम चौंक गई और लैपटॉप बंद कर दिया बिना शट-डाउन किये !

मैंने इसे बहुल हल्के से लिया और आकर मैगज़ीन पढ़ने लगा। थोड़ी देर बाद जब मैंने लैपटॉप अंतर्वासना की कहानी पढ़ने के लिए खोला तो लैपटॉप स्लीप मोड से बाहर आया तो एक वेबसाइट जो अभी भी खुली थी उसे देख कर मैं दंग रह गया। वो एक पोर्न साईट देख रही थी। मैंने वो वेबसाइट बंद करके उसकी तरफ देखा तो वो सो चुकी थी। मैं भी सोने चला गया।

रात के एक बजे मुझे लगा कि कोई मेरी रजाई में आकर मुझसे चिपकने की कोशिश कर रहा है। जैसे ही मैंने मोबाइल की रोशनी की तो वो पायल थी जो सिर्फ पैंटी और शमीज में थी। उसने मुझे जोर से गले लगा लिया और पागलों की तरह चूमने लगी। मुझे भी कुछ-2 होने लगा और यह सब मुझे अच्छा लग रहा था। उसने उठ कर नाइट-बल्ब जला दिया जिसकी नीली रोशनी में सारा कमरा चमकने लगा।

अब उसने मुझसे पूछा- तुमने कभी सेक्स किया है ?

मैंने कहा- नहीं !

तो वो हँस पड़ी और बोली- कोई गर्लफ़्रेंड है?

मैंने कहा- नहीं !

तो वो बोली- चलो, आज के दिन तुम मेरे बॉयफ़्रेंड और मैं तुम्हारी गर्लफ़्रेंड ! चलो आज मैं तुम्हें स्वर्ग के दर्शन कराती हूँ।

उसने अपने पर्स में से कुछ निकाला और मेरे लण्ड पर लगा कर लोलीपोप की तरह चाटने लगी और अपनी पैंटी उतार कर अपनी योनि मेरे मुँह की तरफ करके बोली- तुम इसे सहलाओ और चाटो !

मैं भी ऐसा ही करता रहा। करीब पंद्रह मिनट के बाद उसने कहा- मेरे बदन को छू कर देखो !

तो मैंने वैसे ही किया। पहले उसके वक्ष दबा कर देखे जो कि तने हुए और हल्के से मुलायम थे। फ़िर उसकी योनि छू कर देखी तो वो कराह उठी। मैंने उसे जगह-2 चूमना शुरु कर दिया ब्लू फिल्मों की तरह और वो तड़पने लगी और कहने लगी- करते रहो जानू ! मैं इस के लिए मर रही हूँ !

आधे घण्टे की पूर्व-क्रीड़ा के बाद वो और तड़पने लगी और मुझे कहने लगी- अब तो मेरी प्यास बुझा दो ! अपना लण्ड डाल दो मेरी योनि में !

उसकी योनि बिल्कुल कुँवारी थी लेकिन डॉक्टर होने के कारण उसे सेक्स के बारे में सब पता था। मैंने उसे सीधा लिटा दिया और उसके ऊपर आने लगा तो मुझे धक्का देकर मेरे ऊपर आ गई और मेरे लण्ड को अपने योनि पर घिसने लगी।

मैं तड़पने लगा जिससे उसे बहुत मज़ा आ रहा था, वो मुझसे बोली- अब जन्नंत में जाने के लिए तैयार हो जाओ !

और लण्ड को चूत के मुहाने पर रख कर नीचे की ओर धक्का लगाने लगी और मैं ऊपर की ओर !

मगर उसकी योनि बहुत तंग थी तो उसे दर्द ज्यादा होने लगा तो वो रुक गई। इसी मौके का फायदा उठा कर मैंने उसे नीचे गिरा दिया और एक ही झटके में पूरा लण्ड उसकी चूत में पेल दिया जिससे वो चीख उठी।

थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे, फिर उसने धीरे-2 कमर हिलाना शुरु किया तो मैंने भी उसके साथ लण्ड अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया।

अब वो जोर-2 से बोल रही थी- जोर से चोद ! कुतिया की तरह चोद ! और ! और ! आहऽऽ !

सारा कमरा फच-2 की आवाजों से गूँज रहा था। उस ठंडी में हम दोनों पसीने-2 हो गए।

उस रात चार बार चुदाई का दौर चला और अंत में मैं उसकी चूत में लण्ड डाल कर सो गया।

दूसरे दिन हम 12 बजे दोपहर में उठे और उसने मुझे एक बार फिर चोदा और चूम कर नहाने चली गई।

दोस्तो, मुझे मेल करके बतायें कि मेरी कहानी कैसी लगी !

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