प्रेषिका : शिखा शर्मा

आज मैं एक कहानी कहने जा रही हूँ जो बिल्कुल सच्ची है।

मेरा नाम शिखा है, उमर २२ साल, कद लम्बा, करीब ५ फ़ुट ३ इंच, रंग गोरा, बटाला और मैं अंग्रेज़ी से एम ए में पहले साल में हूँ और मेरी बहिन ऋचा उम्र २३ साल कद मुझ से थोड़ा छोटा ५ फ़ुट, मुझ से एक साल बड़ी है और वह मुंबई में कॉल सेण्टर में नौकरी करती है।

आज जो बात लिखने जा रही हूँ मुझ को बताते हुए बड़ी शर्म आ रही है।

बात आज से एक महीने पहले की है।

मेरी बहन एक महीने पहले ऑफिस से छुट्टी लेकर आई हुई थी। जब हम दोनों सो रहे थे तो दीदी के मोबाइल पर रात के करीब १०:३० बजे एक मिस्ड कॉल आई। तब दीदी ने कॉल देखी और उसी नंबर पर कॉल कर के बात करने लगी कि अभी तो मुझ को मासिक-धर्म ठीक से हुआ है अगर जरुरत पड़ी तो गोली ले लूँगी।

मैने पूछा- क्या बात है दीदी ऐसी बातें आप किस से कर रही हो?

दीदी- कुछ नहीं ! तू सो आराम से !

बस इतनी बात कर मैं भी सो गई।

अगले दिन हमारा चाचे का बेटा, नाम रोहन, उम्र २७ साल, कद ५ फुट ७ इंच, रंग सांवला अपनी नौकरी के सिलसिले में आया हुआ था। वह अब एक अच्छा डॉक्टर बन चुका था और एक सरकारी नौकरी पाने के लिए इंटरव्यू देने आया था। वह हम सबसे मिलने सुबह करीब ११ बजे आया।

नमस्ते ताया जी ! नमस्ते ताई जी ! क्या हाल है ? रोहन ने मम्मी पापा को बड़े जोश से पूछा।

बिलकुल ठीक है पुत्तर – दोनों ने कहा।

शिखा और ऋचा कहाँ पर हैं ?

मेरी मम्मी ने कहा- बेटा, अपने कमरे में होंगी, जा के देख ले, अच्छा बाकी सब बता, सब ठीक है? तेरी इंटरव्यू कैसी हुई? मैन्नू तेरी माँ दा फ़ोन आया सी, ताँ तो पता चला कि तू आ रहा है।

ओह ! ओह ! इतने सारे सवाल ! पहले शिखा और ऋचा से तो मिल लूं !

यह कहता हुआ रोहन हमारे कमरे में बिना दरवाज़ा खटकाए घुस आया।

मैं आगे खड़ी थी और वह एकदम से गले लग गया और जोर से उसने मेरे बूब्स को अपनी छाती साथ लगाया। एकदम से मेरे बदन में करंट दौड़ गया, मैंने एकदम से उसको अपने से पीछे हटाया- क्या कर रहे हो रोहन ?

ओह ! सॉरी मैं भूल गया था कि तुम जवान हो गई हो !

फिर वह दीदी के पास जाने लगा तो दीदी ने आगे बढ़ कर कर उस के गालों पर चूम लिया।

दीदी बोली- अब ठीक है !

रोहन बोला- मजा आ गया !

इतनी देर मैं मम्मी रोहन के लिए दूध ले कर आ गई।

रोहन बोला- क्या ताई ! यह उम्र क्या दूध पीने की है ? सेब खिलाओ, सेब !

सेब इन दिनों मैं कहाँ से लाऊँ ? मार्केट में बस केले ही मिल रहे हैं – मम्मी बोली रोहन से।

क्या ताई घर में ६ सेब मौजूद हों तो बाहर से खाने की क्या पड़ी है ? – रोहन बोला।

क्या मतलब ? मम्मी ने रोहन से बड़ी हैरानी से पूछा।

ताई दो सेब तो ताया जी चूसते हैं ! दो सेब आपने मुंबई भेज दिये और दो सेब यहाँ पर हैं वोह मुझ को दे दो !- रोहन मम्मी से बोला।

मुझ को तेरा मतलब समझ नहीं आया ? मम्मी ने रोहन को पूछा।

क्या ताई आप भी बड़ी भोली बनती हो?- रोहन आगे बढ़ा और मम्मी के ब्लाऊज़ के अन्दर देखने लगा।

क्योंकि मम्मी ने गहरे गले वाला ब्लाऊज़ पहन रखा था और जिसके अन्दर से मम्मी की ब्रा साफ़ साफ़ दिख रही थी और मम्मी के बूब्स आधे नंगे थे, क्योंकि हमारे घर में कोई लड़का नहीं था तो मम्मी ने भी कभी ऐसा ब्लाऊज़ न पहनने का न सोचा।

तभी मम्मी ने एकदम से ब्लाऊज़ को अपनी साड़ी के पल्लू से ढाका- चल हट ! शरारती कहीं का ! मम्मी ने थोड़ा हंस के और थोड़ा शरमा कर उसको पीछे किया।

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