मेरा नाम राज है। मैं गुड़गांव (हरियाणा- दिल्ली के पास) का रहने वाला हूँ। मेरी उमर 37 साल है। मेरी शादी को लगभग 12 साल हो गए। मेरा एक बेटा है जो लगभग दस साल का है। वो देहरादून बोर्डिग स्कूल में पढ़ता है।

मैंने बी.एस सी. (बायो) और फिर बी. फ़ार्मेसी किया। इस लम्बी पढ़ाई और कालेज की जिन्दगी के दौरान कई लड़कियाँ मेरी जिंदगी में आई। कई लड़कियॉ मेरी खास गर्लफ्रैंडस बनी। मैंने अपनी कालेज लाईफ में अपनी कई गर्लफ्रैंडस के साथ सैक्स के मज़े लिए।

सबसे पहले तनु मेरी जिंदगी में आई। फिर नीता, फिर रेनु, चाँद, नीना, शैलजा, कल्पना, मिनी, लीनू, रेखा और आखिर में सुमिता मेरी जिंदगी में आई। इन सभी के साथ में मैंने किसी के साथ एक बार, किसी के साथ दो बार तथा मिनी के साथ सबसे जयादा 19 बार सैक्स किया। बड़े मजे के दिन थे वो।

फिर 12 साल पहले शादी हो गई। शादी के बाद लगभग आठ साल तक अपनी पत्नी के साथ सैक्स का आनन्द लिया। लगभग 4 साल पहले मेरी वाईफ के गर्भाशय को बीमारी के कारण निकालना पडा।
इसके बाद सैक्स में उसकी रुचि लगभग खत्म हो गई। इसलिये हम महीने में लगभग एक या दो बार सैक्स करते।

अब मेरी पत्नी ने लगभग तीन साल से बुटीक का काम शुरु कर रखा है। वो सारा दिन उसमें व्यस्त रहती है। शाम को लेट हो जाती है और काफी थकी भी होती है। इसलिये अब हम महीने में लगभग मुश्किल से एक बार ही सैक्स कर पाते हैं। खैर छोड़िये…

शादी के बाद भी कुछ लड़कियाँ मेरी जिंदगी में आई जिनके साथ मैंने सैक्स किया।
सबसे पहले मेरी साली रजनी उर्फ ‘बेबो’ मेरी जिंदगी में आई।
फिर मेरे पड़ोस की प्रिया, फिर मेरे दोस्त देवेन्द्र की दोस्त पायल और आखिर में मेरी पत्नी की सहेली… उसका नाम मैं अभी नहीं बताऊँगा क्योंकि उससे मेरा रोमांस अभी चल रहा हैं, मेरी जिंदगी में आई।
इन सभी के साथ में मैंने कई बार सैक्स किया हैं।

इनमें से मैंने अपनी साली रजनी उर्फ ‘बेबो’ के साथ सबसे जयादा 17 बार सैक्स किया। हर एक के साथ सैक्स की अपनी अलग और एक मजेदार कहानी हैं। काश स्टिरियो की तरह से जिंदगी में भी रिवाइन्ड बटन होता तो मैं इन कहानियों को फिर से रिवाइन्ड करके देखता और आप लोगों को भी बताता। पर ऐसा नहीं हो सकता। इसलिये मैं अपनी कुछ खास घटनाएं आपके साथ बांट रहा हूँ।

छुट्टी वाले दिन पत्नी तथा बेटे के ना होने की वजह से मैं जब भी फ्री होता हूँ तो इंटरनेट से गर्म और सेक्सी चित्र, अंग्रेज़ी और हिन्दी की कहानियाँ डाऊनलोड करता हूँ और अन्तर्वासना हिंदी कहानियाँ जरूर पढ़ता और डाऊनलोड करता हूँ।

आज मेरे पास ऐसे चित्रों तथा ऐसी कहानियों का बहुत बड़ा संग्रह है। अन्तर्वासना की ज्यादातर कहानियाँ बहुत अच्छी तथा दिल को छू लेने वाली और अपनी सी लगती हैं। इन्हीं सब कहानियों से प्रेरणा पाकर मैं भी अपनी कुछ कहानियाँ लिख रहा हूँ। ये सारी कहानियाँ बिल्कुल सच्ची हैं, आप मानो या न मानो। खैर …

अब मैं आपको अपनी पहली सच्ची कहानी बताने जा रहा हूं। जल्दी ही और भी कहानियाँ आपके सामने आने वाली हैं। तो मज़े लो दोस्तो, पर पढ़ने के बाद मुझे मेल जरूर करना।

मेरे माता-पिता दोनों टीचर थे। मेरी एक बड़ी बहन है। लगभग 18 साल तक किराए के मकान में रहने के बाद मम्मी-पापा ने सैक्टर में मकान बना लिया। जब हम उस मकान में गए तब मेरी उमर लगभग 18 साल थी। मैं ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता था।

मेरा मकान उन दिनो में शहर के सबसे अच्छे सैक्टर में था। कार्नर का मकान था।

मुझे बचपन से सैक्सी किताबें पढ़ने तथा सैक्सी तस्वीरें व पोस्टर देखने का बड़ा शौक था। इसी वजह से मैं वक्त से पहले ही सैक्स के बारे में सब कुछ जान गया था।

मेरे अगले तथा साथ वाले मकान में तनु अपने माता-पिता और एक छोटे भाई के साथ रहती थी।
तनु के पिता मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी थे।
तनु भी मेरी तरह ग्यारहवीं क्लास में मगर किसी दूसरे स्कूल में पढ़ती थी। वो थोड़े लम्बे कद की, पतले और नाजुक जिस्म की तथा बड़े-बड़े स्तनों वाली बहुत सुंदर लड़की थी। मुझे उससे पहली ही नजर में प्यार हो गया था।

पड़ोस का मकान होने की वजह से हम अकसर रोज ही मिलते तथा बात करते थे। मैं और तनु कभी-कभी किताबें या नोट्स लेने के बहाने एक-दूसरे के घर आने-जाने लगे।

एक दिन तनु अपने गेट पर खड़ी होकर अपनी सहेली नीता से बात कर रही थी। वो दोनों कुछ अजीब सी बातें कर रही थी। फिर एक में तीन, एक में जीरो कह कर हंसने लगी।
तनु की सहेली के जाने के बाद मैंने तनु से पूछा- एक में तीन, एक में जीरो क मतलब क्या था?

तनु ने नहीं बताया। मेरे काफी जिद्द करने के बाद उसने बताया कि लड़कियों के नीचे से महीने में दो-तीन दिन खून निकलता है। एक में तीन एक में जीरो का मतलब कल तो तीन बार खून निकला था। मगर आज एक बार भी नहीं निकला।

मैं समझ गया कि वो मासिक-धर्म के बारे में बात कर रही थी क्योंकि मैंने इस बारे में पढ़ा और दोस्तो से सुना था। फिर भी मैंने अनजान बन कर तनु से पूछा- ऐसा क्यों होता है?

तनु बताना नहीं चाहती थी मगर मेरे काफी जिद्द करने के बाद उसने बताया कि जब लड़कियाँ जवान होती हैं तो लड़कियों के नीचे से हर महीने में दो-तीन दिन खून निकलता है। फिर वो अपने आप बन्द हो जाता है। इसका मतलब अब लडकी माँ बन सकती है।

मैंने फिर अनजान बन कर तनु से पुछा कि ऐसा कैसे होता है? लडकी माँ कैसे बन सकती है?

तनु बताना नहीं चाहती थी मगर एक बार फिर मेरे काफी जिद्द करने के बाद उसने बताया कि जब लड़के और लड़कियों का मिलन होता है तो लडकी गर्भवती हो जाती है और उसके खून निकलना बन्द हो जाता है। फिर नौ महीने बाद बच्चा हो जाता है।

मैंने फिर अनजान बन कर तनु से पूछा कि लड़के और लड़कियों का मिलन कैसे होता है।

एक बार फिर मेरे काफी जिद्द करने के बाद तनु ने बताया कि जब लड़का अपने लिन्ग को लड़की की योनि के अन्दर डाल कर आगे-पीछे करता है। फिर उसके लिंग से शुक्राणु लड़की की योनि के अन्दर गिर जाते हैं और उससे लड़की गर्भवती हो जाती है।

मैंने इसी तरह से बहुत सी बातें तनु से पूछी और उसने बताई भी। फिर मैंने उससे पूछा कि उसे ये सब कैसे पता चला। तो उसने बताया कि उसके ताऊ जी की लड़की की शादी कुछ दिन पहले ही हुई है। उसी ने उसे ये सब कुछ बताया है।

इस तरह मैं और तनु काफी खुल गये थे। अब मैं अकसर उससे सैक्स की बातें करने लगा। फिर धीरे-धीरे उसको छेड़ने लगा। फिर हमारी छेड़-छाड़ चूमने तक, फिर होंठों पर होंठ का चुम्बन और आखिर में एक-दूसरे के अँगो को चूने, हाथ फिराने और दबाने तक पहुँच गई।

हम जब भी एकांत में होते तो एक-दूसरे से लिपट कर किस करते। मैं हाथों से तनु के बड़े-बड़े स्तन दबाता और वो हाथों से मेरा लण्ड दबाती। हम दोनों को ऐसा करना बहुत अच्छा लगता था। एक बार हम दोनों एक-दूसरे से लिपट कर होंठों का प्रगाढ़ चुम्बन कर रहे थे।

मैं किस करते-करते अपने हाथों से तनु के कुरते के ऊपर से उसके बड़े-बड़े स्तन दबा रहा था और वो अपने हाथों से पैंट के ऊपर से मेरा लण्ड पकड़ कर दबा रही थी।

मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया। मैंने पैंट की जिप खोल कर अपना लण्ड बाहर तनु के हाथ में पकड़ा दिया।
तनु ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया, वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी।

मेरा लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था।

तनु मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैंने तनु की सलवार के अन्दर हाथ डाल दिया। फिर मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा।

कुछ देर बाद मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और ऊपर से ही रगड़ने लगा।

फिर मैं तनु की चूत पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंने अपनी उँगलियाँ तनु की चूत के अन्दर डाल दी। फिर ऊँगलियों से तनु की चूत के फाँको में डाल कर रगड़ने लगा। लगभग 5-7 मिनट बाद तनु की चूत से कुछ बहुत चिकना सा निकलने लगा।

इतने में मेरी बहन कालेज से आ गई और हम अलग हो गये। हम सोफे पर आ कर बैठ गये।

मेरा लण्ड अभी तक खड़ा था, इसलिए मैं उसे अपनी टांगों के बीच में दबा कर बैठ गया। खैर उस दिन हम बच गये।
लेकिन तनु की की चूत से जो कुछ बहुत चिकना सा निकला था, उसकी वजह से मैं उसे चिकनी-चिकनी कह कर चिड़ाने लगा।

इस तरह हम दोनों काफी खुल गऐ थे और एकांत में अकसर ही ये सब करने लगे थे। हमें अकसर ही मौका भी मिल जाता क्योंकि मेरे मम्मी-पापा नौकरी से तथा बहन कालेज से शाम को 5-6 बजे तक आते थे। जबकि मैं और तनु दोनों ही लगभग 2 बजे स्कूल से आ जाते थे।

फिर तनु मेरे यहाँ ह्फ्ते में दो-तीन बार बुक्स य नोटस लेने के बहाने से आ जाती और हम एक-दूसरे को बाँहो में भर कर खूब प्यार करते। हाँ, सैक्स नहीं किया क्योंकि हमें कभी भी दो-तीन घंटे या ज्यादा समय नहीं मिला। बस एक दिन ऐसा समय मिला और उस ही दिन सब कुछ हो गया।

तनु की मेरी बहन से बहुत अच्छी दोस्ती हो ग़ई थी। शाम को अकसर तनु हमारे घर आ जाती। फिर वो और मेरी बहन दोनों पार्क में घूमने चले जाते।

हमारा परीक्षा परिणाम आ गया। हम दोनों बहुत अच्छे नम्बरों से पास हो गए। बारहवीं में बोर्ड के पेपर होने थे इसलिए पापा कहीं बाहर नहीं जाने देते थे। बस घर में रहो और पढ़ते रहो। मम्मी-पापा मार्केट भी अकेले जाते और हम दोनों भाई-बहन को घर ही छोड़ जाते।

एक दिन शाम को तनु घर आई तो मैं घर में अकेला था। मेरी बहन और मम्मी-पापा मार्केट गए थे। हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बातें करने लगे। हमने कुछ देर बातचीत की। फिर तनु घर जाने के लिये खड़ी हो गई।

मैंने उससे कहा,’थोड़ी देर और रुकोगी

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