कहानी का पहला भाग

शादी के बाद पांच साल बीत गये, मैं अपने परिवार के साथ बहुत खुश हूँ, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था कि एक बार फिर मकान मालिक का लड़का मेरी जिंदगी में ठीक वैसे ही दखल दे रहा है जिससे मैं पांच साल पहले गुजर चुकी हूँ। वैसे अभी तक मैंने उसे कोई लिफ्ट नहीं दी है मगर पुरानी बातें जब याद आती है तो कभी कभी दिल डावांडोल होने लगता है।

एक दिन तो मैं फिसल ही गई थी, उस दिन मैं छत पर कपड़े सुखाने गई थी, मकान मालिक का लड़का छत पर ही लेटा था। बस मुझे देखते ही वो शरारत पर उतर आया, वो फौरन अपना लंड खुजाने लगा। पहले तो मैंने इसे मात्र संयोग समझ कर उसकी हरकत नजरअंदाज कर दी, मगर फिर मैंने देखा कि वो अपना लंड खुजाने के साथ साथ सहलाने भी लगा। फिर उसने अपना लंड पैंट से बाहर निकाल कर हाथ से सहलाना शुरू कर दिया।

यह संयोग नहीं था बल्कि यह उसकी सोची समझी शरारत थी। उस समय मुझे उसका लंड देख कर बहुत गुस्सा आया। मैं उसे डांटना भी चाहती थी मगर जब पूरा लंड बाहर निकाला तो मैं उस विशाल और विकराल लंड को देख भीतर से गनगना गई। काला मोटा लंड मेरे पुराने प्रेमी मोहन के लंड से भी बहुत ज्यादा लम्बा मोटा तथा ठोस था। उसका लंड देखकर मुझे ऐसा लगा कि मेरा प्रेमी मोहन अपना लंड सहला सहला कर मुझे अपनी तरफ बुला रहा है।

अतीत मेरे आँखों के सामने छा गया और मैं चुपचाप उसकी ओर बढ़ने लगी, तभी पता नहीं कहाँ से मेरी तीन साल कि बच्ची वहाँ आ गई। उसने मम्मी कह कर मेरी साड़ी का पल्लू अपनी तरफ खींचा तब मेरी चेतना भंग हो गई। तब मुझे एहसास हुआ कि मेरे कदम गलत दिशा में उठ रहे थे।

मैंने आपने आप को संभाला और अपनी बच्ची के साथ नीचे चली आई। वो लड़का अब हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ा है। उसका बड़ा विशाल लंड जब से पूरी तरह नंगा देखा है, तबसे मुझे मेरे पहले प्रेमी मोहन की याद अन्दर की वासना को खोल कर तरोताजा कर देती है। कभी कभी तो वो अपनी हरकतों से मुझे इतना गर्म कर देता है कि मैं सब कुछ भूल जाती हूँ।

मकान मालिक का लड़का मनोहर जो अभी तक कुंवारा है, मेरे हुस्न का दीवाना पहले से ही था, वो बाईस साल का हट्टा कट्ठा युवक था, पर वो सांवला था और मैं बेहद गोरे बदन की थी, इस कारण उसका मुझ पर फिदा हो जाना स्वाभाविक था, वो नाक नक्श से बहुत सुन्दर लगता था, मेरे पति से छोटा जरूर था पर शरीर से वो काफी मजबूत लगता था, चौड़ी छाती और मांसल जिस्म देख कर कोई भी युवा औरत उसपर फिदा हो सकती थी, जबसे उसके तमतमाए नंगे लंड को देखा है, मेरा मन बैचैन हो गया है, अब मेरा मन उसे अन्दर से चाहने लगा है।

मेरे पति सुबह अपनी फ़ैक्ट्री जाते हैं तो रात ग्यारह बजे से पहले घर नहीं आते। एक बार मेरे पति फ़ैक्ट्री के काम से कुछ दिनों के लिये बाहर चले गये। जाते वक्त उन्होंने कहा,”मधु मैं दो चार दिन बाद वापस आऊंगा, तुम अच्छी तरह घर के अन्दर रहना और बच्ची का ख़याल रखना !”

मैंने कहा,”ठीक है ! आप जल्दी वापस लौटियेगा !”

और पतिदेव चले गये।

मनोहर ने देखा कि मौका अच्छा है, अब उसका काम आसानी से हो जायेगा, अब ज्यादा जाल बिछाने की जरूरत नहीं, उसे अपना मोटा लंड भी उसे नंगा कर दिखा चुका हूँ, अगर औरत होगी तो गधे के लंड जैसा मेरा लंड देख कर मस्त हो गई होगी।

उसी रात मैं अपनी छोटी सी बच्ची को गोद में लिये सोई हुई थी, मेरे बदन पर बहुत कम कपड़े थे, यह मेरी बचपन की आदत है, मैं अपने बदन पर कपड़े पहन कर कभी नहीं सोती थी, पति के पास भी वही बचपन वाली आदत पड़ी हुई है। मैं सिर्फ एक पेटीकोट और ब्रा के अलावा और कुछ उस रात भी नहीं पहने थी, मेरी बच्ची रात में किसी बात पर जिदिया गई थी, उसी को भुलावा देकर सुलाने में मुझे भी नींद आ गई। मैं जिस पर सोई थी वो डबल बेड था और मसहरी लगी हुई थी, लड़की को सुलाते वक्त मैंने लाईट बन्द नहीं की थी और ना ही कमरा बन्द किया था। लाईट जलने के कारण कमरे में पूरी रोशनी थी।

नींद में ना जाने कब मेरा पेटीकोट भी उठ कर कमर तक चला गया था और मेरे दोनों पाँव पूरी तरह फैले हुए थे, सच कहती हूँ उस रात मुझे इस तरह सोती देख किसी का भी ईमान डांवाडोल हो सकता था। मैं ऐसी गहरी नींद में सोई थी कि मुझे उस समय कुछ भी होश नहीं था।

उस समय रात के करीब साढ़े बारह बज रहे थे, दरवाजा खुला था ही वो दबे पाँव मेरे कमरे में आ गया और मेरे नंगे बदन को देखते ही भन्ना गया। उसका लंड भी टाइट होकर खड़ा हो गया, इतना कड़ा हो गया कि उसकी लुंगी आगे की ओर उठ गई थी जैसे तम्बू को खड़ा करने बांस लगाया गया हो, उसने दरवाजा बन्द किया और ट्यूब लाईट ऑफ़ करके नाईट बल्ब को जला दिया। हलकी रोशनी में उसने अपनी लुंगी खोल कर फेंक दी और समूचे लंड पर नारियल तेल लगाया और थोड़ा सा तेल मेरी चूत पर भी टपका कर बेड पर चढ़ आया और अपने विशाल फुंफकारते लंड को मेरी चूत के छेद पर रख कर इतनी जोर से कस कर चांपा की वो मेरी चूत को दो फांक कर आधे से अधिक जब घुसा तो मैं हड़बड़ा कर उठ गई।

उसने कहा,”भाभी मैं मनोहर हूँ चुपचाप पड़ी रहो !”

कह कर फिर जोर से चांप दिया, जैसे ही उसका लंड पूरा मेरी चूत में घुसा मैं बाग बाग हो गई, पर ऊपरी मन से विरोध करते हुए बोली,”यह तुम क्या कर रहे हो ! छोड़ दो मनोहर ! नहीं तो मैं मालकिन से कहूँगी.”

“भाभी अब कह कर क्या फायदा होगा, मेरा तो समूचा तुम्हारी चूत में चला गया है।” फिर उसने मेरी ब्रा को ऊपर की तरफ खींच मेरी चूचियों को नंगा कर उन पर झुक गया और एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा तो उसका मुँह दूध से भर गया, जिसे वो चपर-चपर पीने लगा, फिर बोला,”भाभी, तुम्हारी चूचियों में दूध भरा है, बहुत मीठा मीठा लग रहा है।”

सच कहती हूँ दोस्तो, मेरे बदन में वासना की आग भभक गई और मैं गुदगुदी से सराबोर हो गई थी। जीवन में पहली बार कोई मर्द मेरी दूध से भरी चूचियों को चुभला रहा था और उनका दूध पी रहा था।गुदगुदी होना लाजिमी था, अब मैं गुदगुदी से भर उठी थी और अब उसका विरोध छोड़ कर नीचे से अपने चूतड उपर उछाल उछाल कर उसका सहयोग करने लगी थी। गजब का मजा आ रहा था मुझे !

वो भी उठ कर बैठ गया और अपने विशाल लंड को बाहर कर मुझे बांहों में भर जब पूरी ताकत से कस कस ठाप मार कर चोदना शुरू किया तो मैं एकदम गदगद हो गई। ऐसा मजा तो मुझे मेरे पहले प्रेमी मोहन से भी नहीं मिला था। गजब का मजा आ रहा था उस समय ! मेरी चूत की फांकों से छलक कर पानी आने लगा था और उस पानी में मनोहर का बमपिलाट लंड और भी अधिक कड़ा होकर बहुत तेजी से अन्दर बाहर आने जाने लगा था। चूत गीली होकर इतनी चिकनी हो गई थी कि उसका लंड सटासट अन्दर बाहर हो रहा था।

मैं आह… ओह… ऊई … करने लगी। तभी वो मेरे होंठों को अपने मुँह में डाल कर चुभलाने लगा, अब मैं एकदम बेबस हो गई, कुछ बोल भी नहीं पा रही थी। अन्दर से मैं बहुत खुश थी क्योंकि ऐसा जबरदस्त ठाप अभी तक किसी ने भी नहीं मारा था, चाहे वो मेरा प्रेमी हो या मेरे पतिदेव। चूत के भीतर से अब आग की लपट निकल रही थी।

वो मेरे रसीले होंठों को चूस रहा था, मैंने भी जोश में आकर अपनी समूची जीभ उसके मुंह में डाल दी थी, वो और मस्ती में आ गया था। गजब का मजा आने लगा था, वो मेरी जीभ को चूसते हुए धकाधक चोदे जा रहा था, मैं अपने चूतड उछल उछाल कर उसका साथ दे रही थी।

उसने मुँह से मेरी जीभ निकाल कर कहा,” भाभी, मजा तो आ रहा है ना?”

उसने मेरी राय जाननी चाही तो मैंने कहा,”हाँ खूब मजा आ रहा है, फाड़ डालो मेरी चूत को !”

उसने सटाक से अपना पूरा लंड चूत से बाहर निकाल कर अपनी लुंगी से उसके गीलेपन को पोंछा और फिर मेरी चूत के छेद पर रगड़ कर जब एक ही बार में खचाक से पेला तो सच कहती हूँ, मुझे जमीन आसमान एक सा दिखाई देने लगा।

“हाय ….हाय …..राजा तुम बहुत अच्छे हो, यह सब कहाँ से सीखे हो ? अभी तो तुम्हारी शादी भी नहीं हुई है !”

“भाभी मैं पहली बार चुदाई कर रहा हूँ, केवल किताब में पढ़ पढ़ कर यह काम सीखा हूँ।”

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