प्यारे पाठको !

मेरा नाम भगु है। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। आज मैं एक कहानी लिखने का साहस कर रहा हूँ। यह कहानी मेरे घर की है। मेरे घर में मैं, मेरी पत्नी, एक छोटा भाई, उसकी पत्नी और हमारे छोटे बच्चे एक संयुक्त परिवार की तरह रहते हैं।

मैंने शादी से पहले और शादी के बाद भी किसी को बुरी नज़रों से नहीं देखा। हमारी शादी को १५ साल हो गए हैं और मेरे भाई की शादी को दस साल। मेरे भाई की बीवी देखने में बहुत खूबसूरत है। वो मुझे कभी कभी अज़ीब निगाहों से देखती है।

दोपहर को जब मैं खाना खाने घर पर जाता हूँ तो मेरी बीवी मुझे खाना देती है, अगर वो नहीं होती तो मेरे भाई की बीवी देती है। जब मेरी बीवी नहीं होती तब खाने में मेरे पसन्द वाली चीज़ बनी होती है। वो मुझे खुश करना चाहती है। मैं कुछ लेना भूल जाऊँ तो मुझे चीज़ देने के बहाने वो वहाँ होने की कोशिश करती है। तो मेरा नज़रिया उसके बारे में बदल गया।

अब मैं भी उससे नज़रें मिलाने की कोशिश करता हूँ। नज़रें मिलते ही वो मुस्कुरा देती है और शरमा जाती है। मैं अब हिम्मत करके उससे बात करना चाहता हूँ पर मुझे मौका नहीं मिलता।

आखिर एक दिन शुरूआत हो ही गई।

मैं उसका नाम बताना तो भूल ही गया। उसका नाम शीला है (बदला हुआ)।

एक दिन घर से सब शादी में जाने वाले थे मुझे और शीला को छोड़ कर। तो दोपहर के खाने के लिए मेरी बीवी शीला को बोल गई थी। मैं दोपहर को अकसर देर से आता हूँ लेकिन उस दिन जल्दी आ गया। शीला कुछ ज्यादा ही खुश थी।

जब घर पर सब होते हैं तो हम आपस में बात नहीं करते। मैं घर जाते ही टीवी चला कर देखने लगा। वो भी वहाँ बैठ कर कपड़ों को इस्तरी कर रही थी। मेरे आते ही वो बोली- खाना दे दूँ?

लेकिन मैंने कुछ और सोचा था तो मैंने बोल दिया- थोड़ी देर बाद देना !

और मैं टीवी देखने लगा। टीवी पर अनिल कपूर और डिम्पल का ‘जांबाज़’ का सेक्सी सीन चल रहा था। वो देखते ही शरमा गई। मैंने बात करने के लिए उससे पूछा- आज खाने में क्या बनाया है?

तो वो बोली- खीर बनाई है।

खीर मुझे बहुत पसन्द है। बातों का दौर जारी रखने के लिए मैंने कहा- जानता था कि आज खीर ही होगी।

वो बोली- आपको कैसे मालूम कि आज खीर ही होगी?

मैंने कहा- जब भी उषा (मेरी पत्नी) नहीं होती, तब तुम मुझे मेरी पसन्द का खाना खिलाती हो ! यह मुझे मालूम हो गया है। इसलिए मैंने अनुमान लगाया था कि आज मुझे खीर मिलेगी।

यह सुनते ही वह मुस्कुराने लगी और कहने लगी- आप बहुत चालाक हो !

मुझे लगा अब कुछ बात बन रही है। मैंने अपनी बातों का दौर जारी रखा- देख शीला ! यह बात अगर उषा को पता चल गई कि जब वो घर पर नहीं होती तो तू मुझे अच्छा खाना खिलाती है तो हम दोनों को डाँट पड़ेगी। यह कह कर मैंने उसको थोड़ा डराया।

तो वो झट से बोली- नहीं नहीं ! उनको मत बताना ! नहीं तो मुझे मार ही डालेगी।

मैंने कहा- तुम चिन्ता मत करो, मैं नहीं बताऊंगा कि उसकी गैर-मौज़ूदगी में तुम मुझे क्या खिलाती हो।

यह सुनते ही उसने राहत की साँस ली।

मैंने पूछा- तुम ऐसा क्यों करती हो?

तो वो शरमा कए बोली- बस ऐसे ही !

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