बसंती के जाने के बाद तीन दिन तक कुछ नहीं हुआ। मैं हर रोज़ उसकी चूत याद करके मुठ मारता रहा। चौथे दिन मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। लेकिन एक हाथ में लण्ड पकड़े हुए! और तभी सुमन भाभी वहाँ आ पहुंची। झटपट मैंने लण्ड छोड़ कपड़े ठीक किए और सीधा बैठ गया।

वो सब कुछ समझती थी इसलिए मुस्कुराती हुई बोली- कैसी चल रही है पढ़ाई देवरजी? मैं कुछ मदद कर सकती हूँ?
भाभी, सब ठीक है! मैंने कहा।

आँखों में शरारत भर कर भाभी बोली- पढ़ते समय हाथ में क्या पकड़ रखा था जो मेरे आते ही तुमने छोड़ दिया?
नहीं, कुछ नहीं, ये तो! ये! मैं आगे बोल ना सका।
तो मेरा लण्ड था, यही ना? उसने पूछा।

वैसे भी सुमन मुझे अच्छी लगती थी और अब उसके मुँह से लण्ड सुन कर मैं उत्तेजित होने लगा पर शर्म से उनसे नज़र नहीं मिला सका, कुछ बोला नहीं।

उसने धीरे से कहा- कोई बात नहीं! मैं समझती हूँ! लेकिन यह बता कि बसंती को चोदना कैसा रहा? पसंद आई उसकी काली चूत? याद आती होगी ना?

सुन कर मेरे होश उड़ गए कि सुमन को कैसे पता चला होगा? बसंती ने बता दिया होगा?

मैंने इन्कार करते हुए कहा- क्या बात करती हो? मैंने ऐसा वैसा कुछ नहीं किया है।
अच्छा? वो मुस्कराती हुई बोली- क्या वो यहाँ भजन करने आती थी?
वो यहाँ आई ही नहीं! मैंने डरते डरते कहा।

सुमन मुस्कुराती रही।
तो यह बताओ कि उसने सूखे वीर्य से अकड़ी हुई निक्कर दिखा कर पूछा- यह निक्कर किसकी है, तेरे पलंग से मिली है?

मैं ज़रा जोश में आ गया और बोला- ऐसा हो ही नहीं सकता, उसने कभी निक्कर पहनी ही नहीं!
मैं रंगे हाथ पकड़ा गया।

मैंने कहा- भाभी, क्या बात है? मैंने कुछ ग़लत किया है?
उसने कहा- वो तो तेरे भैया फ़ैसला करेंगे।

भैया का नाम आते ही मैं डर गया। मैंने सुमन को गिड़गिड़ा कर विनती की कि भैया को यह बात ना बताएँ।
असली खेल अब शुरू हुआ।
मुझे क्या पता कि इसके पीछे सुमन भाभी का हाथ था!
तब उसने शर्त रखी और सारा भेद खोल दिया।

सुमन ने बताया कि भैया के वीर्य में शुक्राणु नहीं थे, भैया इससे अनजान थे। भैया तीनों भाभियों को अच्छी तरह चोदते थे और हर वक़्त ढेर सारा वीर्य भी छोड़ जाते थे। लेकिन शुक्राणु बिना बच्चा हो नहीं सकता। सुमन चाहती थी कि भैया चौथी शादी ना करें। वो किसी भी तरह बच्चा पैदा करने को तुली थी। इसके वास्ते दूर जाने की ज़रूर कहाँ थी, मैं जो मौज़ूद था!

सुमन ने तय किया कि वो मुझसे चुदवाएगी और माँ बनेगी।
अब सवाल उठा मेरी मंज़ूरी का।
मैं कहीं ना बोल दूं तो? भैया को बता दूं तो? मुझे इसी लिए बसंती के जाल में फंसाया गया था।

सारा बखान सुन कर मैंने हंस कर कहा- भाभी, तुझे इतना कष्ट लेने की क्या ज़रूरत थी? तूने कहीं भी, कभी भी कहा होता तो मैं तुझे चोदने से इनकार ना करता, तू चीज़ ऐसी मस्त है।

उसका चहेरा लाल हो गया, वो बोली- रहने भी दो! झूठे कहीं के। आए बड़े चोदने वाले। चोदने के वास्ते लण्ड चाहिए और बसंती तो कहती थी कि अभी तो तुम्हारी नुन्नी है, उसको चूत का रास्ता मालूम नहीं था। सच्ची बात ना?’

मैंने कहा- दिखा दूं अभी कि नुन्नी है या लण्ड?

ना बाबा, ना। अभी नहीं। मुझे सब सावधानी से करना होगा। अब तू चुप रहना! मैं ही मौक़ा मिलने पर आ जाऊँगी और हम तय करेंगे कि तेरी नुन्नी है या लण्ड!

दो दिन बाद भैया दूसरे गाँव गए तीन दिन के लिए। उनके जाने के बाद दोपहर को वो मेरे कमरे में चली आई। मैं कुछ पूछूँ इससे पहले वो बोली- कल रात तुम्हारे भैया ने मुझे तीन बार चोदा है। सो आज मैं तुम से गर्भवती हो जाऊँ तो किसी को शक नहीं पड़ेगा और दिन में आने की वजह भी यही है कि कोई शक ना करे।

वो मुझसे चिपक गई और मुँह से मुँह लगा कर चूमने लगी। मैंने उसकी पतली कमर पर हाथ रख दिए, मुँह खोल कर हमने जीभ लड़ाई। मेरी जीभ होठों बीच लेकर वो चूसने लगी। मेरे हाथ सरकते हुए उसके नितंब पर पहुँचे। भारी नितंब को सहलाते सहलाते में उसकी साड़ी और घाघरी ऊपर उठाने लगा। एक हाथ से वो मेरा लण्ड सहलाती रही। कुछ देर में मेरे हाथ उसके नंगे नितंब पर फिसलने लगे तो पाजामा का नाड़ा खोल उसने नंगा लण्ड मुट्ठी में ले लिया।

मैं उसको पलंग पर ले गया और गोद में बिठा लिया। लण्ड मुट्ठी में पकड़े हुए उसने चूमना चालू रखा। मैंने ब्लाऊज़ के हुक खोले और ब्रा ऊपर से स्तन दबाए। लण्ड छोड़ उसने अपने आप ब्रा का हुक खोल कर ब्रा उतार फेंकी। उसके नंगे स्तन मेरी हथेलियों में समा गए। शंकु के आकार के सुमन के स्तन चौदह साल की लड़की के स्तन जैसे छोटे और कड़े थे। एरेयोला भी छोटा सा था जिसके बीच नोकदार चुचूक था।

मैंने चुचूक को चुटकी में लिया तो सुमन बोल उठी- ज़रा होले से! मेरे चुचूक और भग बहुत नाजुक हैं, उंगली का स्पर्श सहन नहीं कर सकती।

उसके बाद मैंने चुचूक मुँह में लिया और चूसने लगा।

मैं आपको बता दूँ कि सुमन भाभी कैसी थी। पाँच फ़ीट पाँच इंच की लंबाई के साथ वज़न था साठ किलो, बदन पतला और गोरा था, चहेरा लम्बा-गोल थोड़ा सा नरगिस जैसा, आँखें बड़ी बड़ी और काली, बाल काले, रेशमी और लंबे, सीने पर छोटे-छोटे दो स्तन जिसे वो हमेशा ब्रा से ढके रखती थी, पेट बिल्कुल सपाट था, हाथ पाँव सुडौल थे, नितंब गोल और भारी थे, कमर पतली थी। वो जब हंसती थी तब गालों में गड्ढे पड़ते थे।

मैंने स्तन पकड़े तो उसने लण्ड थाम लिया और बोली- देवर जी, तुम तो अपने भैया जैसे बड़े हो गए हो। वाकई यह तेरी नुन्नी नहीं बल्कि लण्ड है और वो भी कितना तगड़ा! हाय राम, अब ना तड़पाओ, जल्दी करो।

मैंने उसे लेटा दिया। ख़ुद उसने घाघरा ऊपर उठाया, जांघें चौड़ी की और पाँव उठा लिए। मैं उसकी भोंस देख कर दंग रह गया। स्तन के माफ़िक सुमन की भोंस भी चौदह साल की लड़की की भोंस जितनी छोटी थी। फ़र्क इतना था कि सुमन की भोंस पर काली झांटें थी और भग लंबी और मोटी थी। भैया का लण्ड वो कैसे ले पाती थी, यह मेरी समझ में आ ना सका।

मैं उसकी जांघों के बीच आ गया। उसने अपने हाथों से भोंस के होंठ चौड़े करके पकड़ लिए तो मैंने लण्ड पकड़ कर भोंस पर रग़ड़ा। उसके नितंब हिलने लगे। अब की बार मुझे पता था कि क्या करना है। मैंने लण्ड का अग्र भाग चूत के मुँह में घुसाया और लण्ड हाथ से छोड़ दिया। चूत ने लण्ड पकड़े रखा। हाथों के बल आगे झुक कर मैंने मेरे कूल्हों से ऐसा धक्का लगाया कि सारा लण्ड चूत में उतर गया। जांघों से जांघें टकराई, लण्ड ठुमक-ठुमक करने लगा और चूत में फटक-फटक होने लगा।

मैं काफ़ी उत्तेजित था इसलिए रुक नहीं सका। पूरा लण्ड खींच कर ज़ोरदार धक्के से मैंने सुमन को चोदना शुरू किया। अपने चूतड़ उठा-उठा कर वो सहयोग देने लगी, चूत में से और लण्ड में से चिकना पानी बहने लगा। उसके मुँह से निकलती आह-आह की आवाज़ और चूत की पच्च पच्च सी आवाज़ से कमरा भर गया।

पूरे बीस मिनट तक मैंने सुमन भाभी की चूत मारी। इस दरमियान वो दो बार झड़ी। आख़िर उसने चूत ऐसी सिकौडी कि अंदर-बाहर आते-जाते लण्ड की टोपी उतर-चढ़ करने लगी, मानो कि चूत मुठ मार रही हो।

यह हरकत मैं बरदाश्त नहीं कर सका, मैं ज़ोर से झड़ गया। झड़ते वक़्त मैंने लण्ड को चूत की गहराई में ज़ोर से दबा रखा था और टोपी इतना ज़ोर से खिंच गई थी कि दो दिन तक लौड़े में दर्द रहा। वीर्य को भाभी की योनि में छोड़ कर मैंने लण्ड निकाला, हालांकि वो अभी भी तना हुआ था। सुमन टाँगें उठाए लेटी रही, कोई दस मिनट तक उसने चूत से वीर्य निकलने ना दिया।

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