के आगे सुनाने जा रहा हूँ, उम्मीद है कि आप लोगों को पसंद आएगी।

और सबसे जरूरी बात कि मुझे आप लोगों के पत्र मिले और मुझे बहुत ख़ुशी हई, आप मुझे ऐसे ही अपनी राय भेजते रहिए।

तो अब मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ :

जैसा कि मैंने अपनी पहली कहानी में बताया था की मैंने अपनी दीदी की ननद के साथ भी मजे किए और फिर तो उसके बाद यह सिलसिला तो बिल्कुल आम सा हो गया। अब सोनिया भी ममेरी बहन के साथ किसी न किसी बहाने से घर आती रहती है। आये भी क्यों ना ! मैंने उसकी इतनी सेवा जो की थी।

एक दिन की बात है सोनिया (मेरी दीदी की ननद) मेरी दीदी के साथ आई थी और उसके साथ सोनिया की सेहली भी आई थी।

क्या माल थी यार वो !

देखते ही मेरी तो आँखें ही फटी की फटी रह गई !

मेरा लंड तो बस डंक मारने लगा जोर जोर से ! बहुत सुन्दर चेहरे की मालकिन थी ! एकदम गोरी, 5’5″ लम्बी, पतली छरहरी काया, लहराती-बलखाती, वो मोटे मोटे स्तन, बस क्या बताऊँ यार वो एक दम झकास थी यार !

मेरा तो दिल कर रहा था कि बस अभी उसकी चूत को चाट डालूँ ! बस क्या माल थी वो !

मैं कुछ कर भी तो नहीं सकता था क्योंकि घर में सब थे, लेकिन मेरी नज़र उस पर से हट ही नहीं रही थी।

थोड़ी देर बाद मेरी दीदी ने मुझसे पूछा- तेरी नज़र काफी देर से सोनिया की सहेली पर है। क्या बात है?

मैं बोला- दीदी, मुझ बस एक बार इसकी दिला दो ! मैं तो स्वर्ग में चला जाऊंगा !

दीदी बोली- तूने मुझे चोदा, फिर मेरी सहेली को चोदा, फिर तूने मेरी ननद को चोद और अब तू सोनिया की सहेली को भी चोदना चाहता है क्या?

दीदी बोली- तुझमें कितना सेक्स भरा हुआ है?

मैं बोला- मुझे नहीं पता ! बस मुझे इसकी चाहिए और कुछ नहीं !

दीदी बोली- मैं करती हूँ कुछ ! तू खुद उसको कुछ नहीं बोलना।

मैं बोला- ठीक है ! पर जल्दी !

दीदी बोली- सब्र कर !

फिर दीदी थोड़ी देर में सोनिया के साथ आई और बोली- ये ले ! सोनिया आ गई ! अब तू इसी से इसकी सहेली के बारे में पूछ !

मैं बोला- ठीक है !

दीदी वहाँ से चली गई।

सोनिया बोली- अब तुम्हें मेरी सहेली ऋचा की मारनी है?

मैं बोला- हाँ !

तो वो बोली- मैं तुम्हारी बात ऋचा के साथ बनवा दूँगी पर उससे पहले तुम्हें मेरे साथ फिर से वही करना पड़ेगा जो तुमने पहले किया था !

मैं बोला- यार, अब घर में सब हैं ! अब कैसे हो सकता है?

तो वो बोली- सब कुछ हो सकता है ! मैंने तुम्हारी दीदी को बता दिया है कि किसी को कमरे में न आने दे ! मैं शिमत के साथ कुछ विचार-विमर्श कर रही हूँ।

तो मैंने कहा- तुम तो बहुत चालाक हो ?

तो वो बोली- बाकी की बात बाद में ! पहले मुझे ठण्डा कर दो !

मैंने कहा- की तुम्हारी सहेली आ गई तो?

वो बोली- कोई नहीं आएगा !

और मेरी टांगों पर आकर बैठ गई, बोली- जल्दी कर ! मुझ से रहा नहीं जा रहा है !

फिर क्या था, मैंने उसके स्तन दबाने शुरु किए, वो सिसकारियाँ भरने लगी और आ..अ..ई.. की आवाज़ें निकालने लगी।

फिर मैंने उसका शर्ट उतार कर उसके स्तन चूसे !

मैंने कहा- आवाज मत निकालो ! नहीं तो कोई आ जायेगा !

लेकिन वो तो बस आवाज कर रही थी।

फिर मैंने उसे पूरी नंगी किया और अपनी जीभ उसकी चूत पर टिका दी और जोर-जोर से चाटने लगा। क्या लग रही थी यार ! मजा आ रहा था !

फिर मैंने उसको घुमा कर उसकी गांड में अपनी जीभ रख दी और चाटने लगा। क्या स्वाद था यार क्या बताऊं !

फिर उसने मेरी शर्ट उतारी और फिर पैंट उतारकर अन्डरवीयर नीचे करके मेरा लंड अपने मुँह से चूसने लगी !

क्या मज़ा आ रहा था यार !

फिर वो बोली- जल्दी से अपना यह हथियार मेरी फ़ुद्दी में डाल ! नहीं तो मैं तो मर ही जाऊंगी।

फिर क्या था, मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया और जोर से धक्का मारा। वो पागलो की तरह जोर-जोर से आगे पीछे होने लगी। फिर थोड़ी देर में वो शांत हो गई और मेरा भी छुटने वाला था, मैं बोला- मेरा छुटने वाला है !

वो बोली- मेरे मुँह पर छोड़ना !

मैंने उसके मुँह पर छोड़ दिया और शांत हो गया।

फिर थोड़ी देर में वो साफ़ करके आई और मेरे पास बैठ गई।

मैंने कहा- अब तो तुम मेरी बात ऋचा के साथ बनवा दोगी ना?

तो वो बोली- मैं अपनी पूरी कोशिश करुँगी !

और बाहर चली गई।

आगे क्या हुआ, कहानी के दूसरे भाग में बताऊंगा।

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