राज कार्तिक

सब अपने कमरे में जा चुके थे, मैं भी अपने कमरे की तरफ चल पड़ा।

मौसी भी मेरे कमरे की तरफ आ रही थी कि माँ ने मौसी को आवाज दी और कहा कि वो माँ के कमरे में सो जाये !

सुन कर हैरानी भी हुई क्योंकि पिताजी भी तो उसी कमरे में सो रहे थे ! तो क्या माँ को पिताजी और मौसी के बारे में पता है?

मैं हैरान था !

मौसी माँ से कुछ बात करती रही पर माँ ने जब थोड़ा जोर से कहा- नहीं ! तू मेरे कमरे में ही सो जा !

तो मौसी बच्चे की तरह पाँव पटकती हुई माँ के कमरे में चली गई।

माँ ने मेरे कमरे की तरफ देखा और फिर अपने कमरे के अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर लिया

पदमा के कमरे का और मेरे कमरे का बाथरूम एक ही था जो दोनों कमरों में खुलता था।

मैं भी अंदर गया कुछ देर के बाद ही मुझे बाथरूम में से कुछ गुनगुनाने के आवाज आई। यह पदमा की आवाज थी।

मैं बाथरूम के पास गया और दरवाजा खोलने लगा पर दरवाजा अंदर से बंद था। मैंने दरवाजा खटखटाया तो पदमा की आवाज आई- क्या है?

मैंने कहा- दरवाजा खोलो ! मुझे जोर से पेशाब लगी है ! जल्दी करो, मैं रोक नहीं सकता !

एक मिनट कोई आवाज नहीं हुई, फिर दरवाजा खुलने की आवाज आई !

पदमा ने जैसे ही दरवाजा खोला मैं उसे धकेलते हुए अंदर घुसा और लंड निकाल कर पेशाब करने लगा।

मैं यह भी भूल गया कि पदमा अभी भी वहीं थी !

मुझे लंड निकालते देख वो चिल्लाई- भाई, यह क्या कर रहे हो ? कुछ तो शर्म कर !

मेरे मुँह से निकल गया- अरे पेशाब करने में शर्म कैसी ?

पदमा बोली- डियर ब्रदर ! बहन के सामने पेशाब करना शर्म की बात है, समझे !

पदमा मुझे उपदेश दे रही थी पर बाहर भी नहीं जा रही थी और मैं अपना सात आठ इंच का लंड हाथ में पकड़े पेशाब कर रहा था, लंड पेशाब के जोर से तन कर खड़ा था।

पदमा की नजर लंड पर तो नहीं थी वो मेरे चेहरे की तरफ देख रही थी जो पेशाब निकलने के कारण हल्का महसूस कर रहा था। मेरी आँखें लगभग बंद थी।

पेशाब करने के बाद मैंने पदमा से पूछा- क्यों, अच्छा लगा ?

पदमा बोली- क्या अच्छा लगा?

मैंने नीचे की तरफ इशारा किया !

तब पदमा ने नीचे की तरफ देखा और चोंकते हुए बोली- हाय राम इतना लम्बा !

मैं अपने लंड की तारीफ सुनकर खुश हो गया। तभी पदमा बोली- राज भाई, अपनी बहन को लंड दिखा रहे हो, कुछ तो शर्म करो !

पदमा के मुँह से लंड शब्द सुन लंड फुफ़कारने लगा था, मेरे भी मुँह से निकल गया- अगर बहन इतनी सुंदर और सेक्सी हो तो हर भाई लंड निकल कर उसके सामने खड़ा हो जाये।

पदमा हँस पड़ी मेरी बात सुन कर !

हँसी तो फंसी ! की कहावत बहुत मशहूर है, आप सब जानते ही होंगे।

मैंने आगे बढ़ कर पदमा के कंधों को पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींचा। लंड अभी भी बाहर ही था।

पदमा की हँसी एकदम से रुक गई और बोली- भाई क्या कर रहे हो?

मैं कुछ नहीं बोला और मैंने अपने होंठ पदमा के गुलाबी होंठों पर रख दिए।

पदमा एक बार तो कसमसाई पर फिर शांत हो कर खड़ी हो गई !

मैं लगातार पदमा के होंठ चूस रहा था। पदमा के हाथ मेरी पीठ पर आ चुके थे। अब पदमा भी चूमने में मेरा पूरा साथ दे रही थी।

मस्ती बढ़ती जा रही थी। मैंने पदमा का एक हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया पदमा ने मस्ती में उसे पकड़ कर मसल दिया।

जैसे ही मैंने पदमा के होंठ छोड़े, पदमा बोली- भाई, तुम्हारा तो एक दम लोहे की रॉड के तरह से है और गरम भी बहुत ज्यादा है।

मेरे मुँह से निकला- पदमा, मेरी जान, यह सब तुम्हारे कारण है ! तुम हो ही इतनी सेक्सी मेरी जान !

पदमा मेरा लंड मसल रही थी मेरे मुँह से मस्ती भरी आहें निकल रही थी- आआअह्ह ह्ह्ह आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह और जोर से मसल मेरी जान !

पदमा भी गर्म होने लगी थी, अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई।

एक बार तो मैं घबराया, फिर पदमा को उसके कमरे में भेज कर मैंने दरवाजा खोला। दरवाजे पर मेरी अपनी माँ खड़ी थी।

मैंने पूछा- क्या बात है माँ?

तो माँ बोली- बस बेटा, मैं तो देखने आई थी कि तुम सो गए हो या नहीं।

माँ बस सो ही रहा था, मैंने कहा और कहा- अब तुम भी सो जाओ।

माँ ने एक बार कमरे में झांक कर देखा।

मैं समझ गया कि माँ क्या देखना चाहती है।

खैर माँ चली गई।

मैं लगभग दौड़ता हुआ बाथरूम की तरफ गया पर पदमा ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया था।

मैंने दरवाजा खटखटाया भी, पर पदमा ने दरवाजा नहीं खोला। शायद वो थोड़ा डर गई थी। मुझे मेरी माँ पर बहुत गुस्सा आ रहा था।

मेरे तो खड़े लंड पर धोखा हो गया था।

अब मेरे पास मुठ मरने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।

मौसी को पिताजी ने पकड़ लिया था और पदमा माँ के कारण हाथ से निकल गई थी।

लंड को सहलाते-सहलाते ना जाने कब नींद आ गई।

जब आँख खुली तो एहसास हुआ कि कोई मेरे लंड से खेल रहा है। इन होंठो के स्पर्श को मैं पहचानता था।

यह मौसी ही थी, वो मजे से मेरा लंड सहला रही थी और बीच बीच में चूम भी रही थी। लाईट आ चुकी थी। कमरे में पूरा उजाला था।

मैंने देखा- मौसी ने अपने ब्लाउज के हुक खोल रखे थे और उनकी बड़ी बड़ी चूचियाँ झूल रही थी।

तभी मौसी ने अपने मुँह में मेरा पूरा लंड ले लिया और मेरे मुँह से आह निकल गई। मेरी आह से मौसी को पता चल गया कि मैं जाग चुका हूँ।

मौसी बोली- बेटा राज, अगर उठ ही चुके हो तो सही से मजे लो ना।

मैं कुछ नहीं बोला पर अब मौसी ने खुल कर लंड चूसना शुरू कर दिया। पहले वो थोड़ा डर कर चूस रही थी।

लंड मौसी के होंठों की गर्मी से पूरा तन कर लोहे की रॉड की तरह हो चुका था। मौसी ने लंड मुँह में से निकाल दिया और ऊपर आ कर अपनी एक चूची मेरे मुँह पर रगड़ने लगी

मैं भी अब पूरा गर्म था, मैंने तुरंत मौसी की चूची मुँह में ले ली और जोर जोर से चूसने लगा।

मौसी की हालत खराब होने लगी।

मौसी के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी थी और ये सिसकारियाँ धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी।

अब मैं मौसी की चूचियाँ बदल बदल कर चूस रहा था। मौसी मस्त हो कर चूचियाँ चुसवा रही थी और एक हाथ से मेरे तने हुए लंड को सहला रही थी।

कुछ देर बाद मौसी बोली- राज बेटा, अब बर्दाश्त नहीं होता ! जल्दी से अपना यह खम्बा मेरी चूत में घुसेड़ दे, पूरे बदन में आग लगी हुई है।

मैंने पूछा- ऐसी क्या बात हो गई?

तो मौसी बोली- तेरे बाप ने गर्म तो कर दी पर आग नहीं बुझाई।

मैंने पूछा- क्यों ?

तो बोली- तेरी माँ ने आज मुझे चुदने ही नहीं दिया। दो बार लंड को तैयार किया पर दोनों बार तेरी माँ ने पहले अपनी चूत में फिर अपनी गांड में डलवा कर तेरे बाप का लंड झाड़ दिया और मैं प्यासी रह गई क्योंकि दो बार चोदने के बाद तेरा बाप थक गया और मेरी चूत की आग बुझाये बिना ही सो गया।

मैं बोला- तुम चिंता मत करो मौसी, तेरी चूत की सारी आग मैं अभी ठंडी कर दूँगा ! पहले अपने कपड़े तो उतार।

मौसी उठी और उसने अपने शरीर पर से सारे कपड़े उतार फेंके।

मौसी बिल्कुल नंगी मेरे सामने खड़ी थी।

मैंने मौसी के अंग-अंग को ध्यान से देखा।

मौसी अब भी मस्त लग रही थी, बड़ी बड़ी चूचियाँ अब भी तन कर खड़ी थी, पेट की नाभि देख कर ही लंड खड़ा हो जाये ऐसी थी मौसी की नाभि।

जब चूत पर नजर गई तो लंड फटने को हो गया।

चूत पर एक भी बाल नहीं था। चिकनी चूत बिल्कुल फूली-फूली सी जैसे लंड को खाने के लिए मुँह खोले खड़ी थी।

लंड फुंफ़कारने लगा था। मौसी ने आगे बढ़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और जोर जोर से चूसने लगी। एक हाथ से मौसी मेरा लंड मसल रही थी।

मेरा एक हाथ मौसी की चूची को मसल रहा था तो दूसरा हाथ मौसी की चूत की पुतियाँ मसल रहा था जिस कारण मौसी की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी।

मौसी बोली- अब देर मत कर !

मैं भी जैसे इन्तजार ही कर रहा था। मैंने मौसी को बिस्तर पर पैर ऊपर करके लिटा दिया और अपना लंड मौसी की चूत के मुँह पर रगड़ने लगा।

मौसी गिड़गिड़ाने लगी थी- अब डाल भी दे बेटा ! मत तरसा ! तेरे बाप ने तो प्यासी छोड़ दी, तू तो मत तड़पा। डाल दे बेटा।

मैं जानबूझ कर देर कर रहा था। मौसी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई थी। मौसी पूरी खेली खाई थी। उसे पता था कि उसे क्या करना है।

मौसी ने अपनी टांगों में जकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचा तो मौसी की गीली चूत में मेरा आठ इंच का लंड एकदम घुसता चला गया और आधे से ज्यादा लंड मौसी की चूत में समां गया।

मौसी चिहुंक उठी थी, बोली- बेटा कितना गर्म लंड है तेरा। लग रहा है जैसे कोई गर्म लोहे का डण्डा घुसेड़ दिया हो चूत में। अब धक्के मार बेटा और फाड़ दे अपनी मौसी की चूत ! भोसड़ा बना दे इस चूत का। फाड़ दे बेटा !

मैंने जोरदार धक्के लगाने शुरू कर दिए। लंड जड़ तक मौसी की चूत में जा रहा था। मेरे टट्टे मौसी की गांड पर थाप दे रहे थे।

मैं जवान लड़का था यानि पिता जी से ज्यादा फुर्तीला।

मेरे धक्कों की गति भी पिताजी के धक्कों से ज्यादा तेज थी।

तभी तो मौसी अपने आप को रोक नहीं पाई और दो मिनट में ही झड कर निढाल हो गई। ढेर सारा पानी छोड़ दिया था मौसी की चूत ने !

पर मैं तो अभी शुरू ही हुआ था, मैं लगातार धक्के लगता रहा।

दस मिनट की चुदाई में मौसी तीन बार झड़ गई और बोली- बस बेटा ! मैं अब तुमसे और नहीं चुदवा सकती।

मौसी क्या कह रही हो? मेरा तो अभी हुआ ही नहीं।

मौसी बोली- मैं अपने आप कुछ करके झाड़ दूंगी पर बेटा अब मेरी चूत तेरा लंड नहीं सह पायेगी।

मैं भी जिद करते हुए बोला- नहीं मौसी, मुझे तो चूत में ही लंड झडना है।

तभी मौसी ने कहा- तुम कुछ देर मेरी गांड मार लो।

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