प्रेषक : राज कार्तिक

मैं राज एक बार फिर अपने जीवन की एक सच्ची घटना को कुछ काल्पनिक पात्रों के साथ आपके सामने ले कर आया हूँ ! काल्पनिक पात्र इसलिए ताकि आप सबका ज्यादा से ज्यादा मनोरंजन हो !

जैसा कि मैंने आपको बताया की घटना बिलकुल सच्ची है ! मेरी उम्र 22 साल की हो गई थी और घर वाले मेरी शादी के लिए लड़की देखने लगे थे ! मेरी माँ चाहती थी कि जल्दी से उसके घर बहू आ जाये ! दिल से तो मैं भी यही चाहता था पर अभी आगे पढ़ना भी चाहता था। पिताजी के पास आये दिन कोई ना कोई आ जाता था रिश्ता ले कर ! इसके दो कारण थे पहला तो यह कि मेरे पिताजी की इलाके में पूरी धाक थी हर कोई उनसे रिश्ता जोड़ना चाहता था दूसरे मैं भी तो एकदम बांका जवान था ! पूरे गाँव में मुझसे ज्यादा खूबसूरत और भरे-पूरे शरीर वाला कोई जवान लड़का नहीं था। गाँव की हर लड़की मरती थी मुझ पर, चाहे मेरा उससे कुछ भी रिश्ता हो ! अगर साफ़ शब्दों में लिखूँ तो मेरे ताऊ-चाचा की लड़कियाँ भी मुझ पर मरती थी। मेरी खुद की बुआ तो लट्टू थी मेरे ऊपर ! हमेशा मेरी माँ से कहती थी कि मेरे लिए राज जैसा ही लड़का देखना, नहीं तो मैं शादी नहीं करवाऊंगी।

घटना की शुरुआत तब हुई जब तीन साल पहले मेरे छोटे चाचा राजकिशोर की शादी थी। जैसा कि आप समझ ही गए होंगे कि मेरा और मेरे चाचा का नाम मिलता-जुलता था। घर में सब मुझे राज कहते थे और चाचा को किशोर ! पर चाचा का असल नाम राज किशोर ही था।

शादी की धूमधाम चारों तरफ थी। आखिर गाँव के मुखिया और इलाके के एक बड़े जमींदार के बेटे की शादी थी। मैं अपने दादा जी की बात कर रहा हूँ ! दूर से आने वाले रिश्तेदार घर पहुँचने लगे थे। मेरी मौसी जो मेरी माँ से सात साल छोटी थी, अपनी बड़ी बेटी पदमा के साथ आ चुकी थी। मुझे पता था कि मेरी मौसी मेरे पिताजी पर बहुत मरती थी क्योंकि मौसा जी एकदम दुबले-पतले थे और कमाई भी कम थी मौसा की, जिस कारण मौसी का हाथ हमेशा तंग रहता था। पिता जी आये दिन मौसी की जरूरत पूरी करते रहते थे। मेरी माँ को भी यह सब पता था। मौसी और मेरे पिताजी के बीच किसी तरह का कोई दूसरा सम्बन्ध था या नहीं, मुझे तब तक नहीं पता था जब तक मैंने खुद अपनी आँखों से मौसी को पिताजी गोदी में नंगी बैठे नहीं देख लिया था।

उस दिन मौसी हमारे घर आई हुई थी पर मेरी माँ अपने मायके गई हुई थी। तब रात को जब मैं पेशाब करने के लिए उठा तो पिताजी के कमरे की लाइट जल रही थी और कुछ हल्की-हल्की आवाजें भी आ रही थी। मैंने जब दरवाजे से झांक कर देखा तो मेरा कुँवारा लंड एकदम से मेरे कच्छे को फाड़ कर बाहर आने को उतावला हो गया था ! मौसी पिता जी की गोद में बैठी हुई पिताजी का लंड जोकि लगभग दस इंच का था हाथ में पकड़ कर हिला रही थी ! हिलाते हिलाते मौसी उठी और उसने पिता जी का लंड मुँह में ले लिया !

पिता जी आहें भरने लगे और बोले- जानकी तू लंड बहुत अच्छा चूसती है, तभी तो मैं तुम पर मरता हूँ ! तेरा प्यार करने का तरीका तेरी बहन से लाख गुणा अच्छा है ! तू मस्त कर देती है और खुद भी मस्त हो कर चुदवाती है !

पांच मिनट लंड चूसने के बाद मौसी उठी और पिता जी लंड को अपनी चूत पर सेट करके उस पर बैठ गई और पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया। उसके बाद तो कभी मौसी ऊपर कभी पिता जी ऊपर ! पूरा आधा घंटा चुदाई चली फिर दोनों पस्त हो कर लेट गए। तब तक तो मैं भी पस्त हो चुका था यानि मेरा लंड भी असली ब्लू फिल्म देख कर पानी छोड़ चुका था ! मेरा अंडरवियर खराब हो चुका था !

पेशाब लगी थी, मैंने पेशाब किया और जाकर अपने बिस्तर पर सोने की कोशिश करने लगा पर नींद तो आँखों से कोसों दूर थी।

उस दिन से मेरी नजर मेरी मौसी के लिए बिल्कुल बदल गई थी। जब मौसी शादी में आई तो मेरी आँखों के सामने वही दृश्य घूम गया। मुझे मौसी की मस्त चूचियाँ नजर आने लगी जिन्हें मेरे पिताजी यानि मौसी के जीजाजी मसल रहे थे। मुझे मौसी के मस्त कूल्हे नजर आने लगे जिन्हें दबा दबा कर मेरे पिता जी यानि मौसी के जीजाजी चोद रहे थे।

इन्हीं सोच के बीच खड़ा मैं मौसी के मस्त शरीर को निहार रहा था कि मौसी पदमा के साथ मेरे पास आई और मुझे गले से लगाते हुए मेरे माथे को चूम लिया। मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया !

तभी मेरी नजर पदमा पर पड़ी ! मैं पदमा को करीबन पाँच-छह साल के बाद देख रहा था तब वो ग्यारह साल की एक छोटी बच्ची थी, फ्रॉक पहनती थी ! पर आज पदमा मस्त जवान लड़की बन चुकी थी ! मस्त माँ की मस्त बेटी ! अपनी माँ की तरह बड़ी-बड़ी चूचियाँ ! मस्त गोल गोल कूल्हे ! सुन्दर हसीन चेहरा ! हाय मैं तो लुट गया था इस हसीना पर ! पर फिर ध्यान भंग हुआ जब माँ ने आकर कहा- बेटा अपनी बहन को कमरा दिखा आओ !

माँ ने बहन शब्द पर कुछ ज्यादा ही जोर दिया था। शायद वो मेरे दिल की आवाज पहचान गई थी। मैं भी एकदम सपने से जगा, याद आया कि वो मेरी बहन है मौसेरी !

मौसी पिताजी से चुदवाती है क्योंकि वो जीजा-साली है, पर पदमा तो मेरी बहन है और जानकी मौसी यानि माँ जैसी ! मैंने पदमा को ऊपर मेरे साथ वाला कमरा दे दिया और जाकर नीचे काम करने लगा। काम काज में समय का पता ही नहीं चला। रात होने को आई थी, सब लोग खाना खाने के लिए हाल में इक्कठे हुए। चांस की बात थी कि पदमा की कुर्सी मेरी कुर्सी के साथ थी। हमारे घर में अकसर मेज़ के तरफ मर्द और दूसरी तरफ औरतें बैठती थी पर शायद पदमा को यह बात मालूम नहीं थी तभी तो वो मेरे पास आकर बैठ गई।

पदमा ने लम्बी स्कर्ट पहन रखी थी, ऊपर पीले रंग का टॉप था, कयामत लग रही थी यार ! पर तभी मुझे माँ की दिन वाली बात याद आई- पदमा तुम्हारी बहन है।

मैंने ध्यान पदमा पर से हटा लिया और खाना खाने लगा। खाना खाते खाते मेरी और पदमा की टाँगें कई बार आपस में टकराई ! हर बार मेरा दिल डोल गया ! पदमा का शरीर आग उगलता महसूस हो रहा था। मैं बेचैन हो रहा था। मैंने नजर उठा कर पदमा को देखा तो उसके चेहरे पर एक कातिल मुस्कान खेल रही थी। मैंने पदमा को थोड़ा गौर से देखा ! अभी तक मैंने पदमा की चूचियों और कूल्हों को ही ध्यान से देखा था पर अब मैंने पदमा के खूबसूरत चेहरे पर भी नजर मारी तो मालूम हुआ यार क्या गजब माल थी पदमा ! रंग गोरा दूध जैसा, सुन्दर नाक, गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठ गुलाबी गुलाबी !

मैं तो फ़िदा हो गया अपनी इस मस्त सेक्सी मौसेरी बहन पर !

अब मैंने जानबूझ कर अपनी टाँगें पदमा की टांगों से छूनी शुरू कर दी ! पदमा को भी इसका एहसास हो गया कि मैं जानबूझ कर ऐसा कर रहा हूँ पर माँ का क्या करूँ, वो तो हर बात पर कह देती- बेटा, अपनी बहन को सब्जी दो, अपनी बहन को चावल दो, खीर दो !

मैं झुंझला जाता माँ की आवाज सुन कर ! क्या कर सकता था !

खाना खाकर हम लोग गप्पे मारने बैठ गए ! मौसी मेरे बिल्कुल पास बैठी थी मौसी से आगे माँ बैठी थी, आगे बुआ और मेरे बिल्कुल सामने पदमा !

मैंने पदमा को कई बार कहा अपने पास बैठने के लिए पर वो मुस्कुराती रही और गर्दन हिलाकर ना करती रही !

पर ये क्या-

अचानक मुझे एक झटका सा लगा जब मैंने मौसी का हाथ कम्बल के नीचे अपने लंड पर महसूस किया। मैं सिहर उठा ! क्योकि मुझे इसका अंदाजा भी नहीं था कि मौसी ऐसा कर सकती है ! वो तो मेरे बाप से चुदती थी ना, फिर वो मेरा लंड क्यों सहला रही थी !

मैंने उस समय नाईट सूट का खुला सा पजामा पहन रखा था और नीचे कच्छा भी नहीं पहना था ! मौसी के हाथ लगाते ही लंड खड़ा होना शुरू हो गया वैसे आधा तो वो पहले ही पदमा की मस्त जवानी देख कर खड़ा हो गया था ! मौसी पजामे के ऊपर से ही लंड को सहला रही थी।

क्योंकि रिश्ते में मौसी यानि माँ जैसी थी इसलिए कोई शक भी नहीं कर रहा था और ना ही कर सकता था ! मौसी हँसी-मजाक की बातें कर रही थी और सब हँस रहे थे। तभी लाईट चली गई ! गाँव में यह आम बात थी। लाईट जाते ही सब तरफ अफरा-तफरी सी मच गई। कोई मोमबती तलाश रहा था तो कोई लालटेन ! पर मौसी तो कुछ और ही तलाश रही थी ! मौसी ने कम्बल में मुँह देकर लंड को पजामे के ऊपर से ही मुँह में ले लिया, मेरी सिसकारी निकल गई ! तभी मौसी ने पजामा थोड़ा नीचे कर के लंड बाहर निकाल लिया और लंड मुँह में लेकर चूसने लगी !

मेरा बुरा हाल हो रहा था ! उत्तेजना इतनी ज्यादा हो गई कि मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी मौसी की मुँह में ! मौसी ने लंड पूरा चूस लिया !

तभी पिताजी की आवाज आई, वो मुझे आवाज दे रहे थे। मैं जल्दी से पजामा ऊपर करके पिताजी के पास भागा। मौसी मुझे पकड़ती रह गई !

लाईट काफी देर नहीं आई तो सब अपने अपने कमरे में सोने के लिए जाने लगे ! मेरा ध्यान अब पदमा से ज्यादा मौसी पर केन्द्रित हो गया था। मैं मौसी के साथ सेक्स नहीं करना चाहता था पर मौसी ने लंड चूस कर मेरे अंदर आग सी लगा दी थी। मेरी हालत अब ऐसी थी कि अगर कोई कुतिया भी सामने आ जाती तो मैं उसे भी चोद देता !

सब अपने कमरे में जा चुके थे, मैं भी अपने कमरे की तरफ चल पड़ा। मौसी भी मेरे कमरे की तरफ आ रही थी कि माँ ने मौसी को आवाज दी और कहा कि वो माँ के कमरे में सो जाये !

सुन कर हैरानी भी हुई क्योंकि पिताजी भी तो उसी कमरे में सो रहे थे ! तो क्या माँ को पिताजी और मौसी के बारे में पता है?

मैं हैरान था !

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