लेखिका : शमीम बानो कुरेशी

मैं बाज़ार जाने के लिये घर से निकल पड़ी। मुख्य सड़क पर आते ही मैंने सिटी बस ली और उस भीड़ में घुस गई। वही हुआ जो मैं चाहती थी। बस में घुसते ही जवान लड़की को देख कर उसके बदन पर हाथ मारना आरम्भ कर दिया। सभी भैन के लौड़े, कोई मेरे चूतड़ों को दबा कर मुझे आनन्दित करता तो कोई मेरे कोमल स्तनों पर हाथ मार देता। कभी कभी तो बस के धक्कों में उनका लण्ड तक मेरे चूतड़ों से दब जाता था। ये हरामजादे मेरी गाण्ड क्यों नहीं मार देते। बस मुझे भड़काते रहते हैं। बस यों ही मस्ताती हुई मैं सब्जी मण्डी पर उतर गई।

सब्जी मण्डी में भी मैंने भीड़ वाली जगह ढूंढ ली और उसमें घुस गई। मेरा तन कईयों के बदन से रगड़ गया। किसी मनमौजी ने एक जगह तो मेरी चूंचियाँ तक भींच डाली। मैंने भी उसे पूरा मौका दिया। एक मीठी सी टीस उठ गई दिल में। मैंने उसे इधर उधर देखा, वो मुस्कराता हुआ मेरे पीछे ही नजर आ गया। फिर मैंने अपनी गाण्ड उसी की तरफ़ घुमा दी। फिर मैं सब्जी वाले के पास झुक कर चूतड़ों को उभार कर सब्जी लेने लगी। मेरी चूतड़ से एक के बाद एक कई लण्ड टकराये। कोई कोई तो दरार में दबा भी देते थे और ऐसे अन्जान बन जाते थे कि जैसे कुछ नहीं किया हो। इसी तरह से मैं बाजार में अक्सर मस्ताती थी।

फिर खूब उत्तेजित हो कर घर पर आ कर मैं हस्त मैथुन करके शान्त हो जाया करती थी। मेरी यह तरकीब बहुत सी बहनें जानती होंगी, पर मुझे पता है वो किसी को बतायेंगी नहीं। वैसे जिंदगी में मैंने बस एक बार अपने चचेरे भाई से चुदवाया था। भोसड़ी के ने रगड़ कर मुझे मस्त कर दिया था। उसी ने मेरी सील तोड़ दी थी। मैं उस समय नासमझ थी। बस भाव में बह गई और चुद गई। उसके बाद से मेरा वो चचेरा भाई कभी नहीं आया। पर मेरे मन में वो आग लगा गया, मुझे जवानी का मतलब समझा गया। अब भी चुदने की इच्छा बहुत होती है पर कोई चोदने वाला मिलता ही नहीं था। यह एक बहुत बड़ी मजबूरी थी।

आज शाम को मेरी सहेलियाँ घर पर आ गई और अगले दिन का पिकनिक का कार्यक्रम बनाने लगी। एक सहेली के बॉयफ़्रेंड ने अपने बंगले पर यह कार्यक्रम रखा था। उस दिन वो अकेला था। उसके घर वाले मुम्बई गए हुए थे। मैं बहुत खुश हो गई कि कल छुट्टी का दिन अच्छा बीतेगा। मेरे मम्मी पापा ने मुझे मंजूरी दे दी। यह उसका फ़ार्म-हाउस था। करीब दस किलोमीटर दूर था।

सहेली ने मुझे यह बता दिया दिया था कि वहाँ पर सभी लड़कियाँ खूब मस्तियाँ करेंगी। तो करे ना ! मुझे क्या, मेरा तो कोई बॉय फ़्रेंड है नहीं। अब्दुल, अनवर, युसुफ़ तो बाहर गए हुए थे किसी शादी में। स्वीमिंग पूल का आनन्द भी लेना था जो उसके पिछवाड़े में था।

सुबह सवेरे दो एयर कण्डीशन कार मेरे घर आ गई थी। मैंने एक जोड़ी कपड़े रखे और केजुअल ड्रेस पहन कर कार में आ गई। कार में सभी लड़कियाँ अपने-अपने बॉय फ़्रेंड्स के साथ थी। बस मैं और रोहित जिसका वो फ़ार्म-हाऊस था, बिना किसी जोड़े के थे। सभी गाने गाते और मस्ती करते हुए चल दिये। कुछ लड़कियाँ तो अपनी कमीज ऊपर उठा उठा कर अपने स्तन दिखा रही थी। कुछ चुम्मा ले रही थी। मस्ती का आलम था। उनके बॉय फ़्रेंड मस्ती में किसी के भी स्तन को दबा कर चीखते थे। मैं शरम के मारे एक तरफ़ बैठी थी। मन तो बहुत कर रहा था कि मैं भी खूब उछल कूद करूं, अपने सुडौल चूचों को दबवाऊं, पर मेरा कोई दोस्त भी तो नहीं था, जो ऐसा करता।

कुछ ही देर हम सभी रोहित के फ़ार्म हाऊस में आ गये। पूरे फ़ार्म में कोई नहीं था। अन्दर आकर हमने फ़ाटक पर ताला लगाया और शोर मचाते हुए घर में घुस गये।

चाय नाश्ता करके हम सभी स्वीमिंग पूल की ओर भागे। सभी अपने अपने कपड़े फ़ेंक कर उसमे कूद पड़े। रोहित भी अकेला ही कूद गया। मैं अपने सलवार कुर्ते में दूसरी ओर जाकर एक बड़ी कुर्सी पर लेट गई। तभी रोहित पूल में से उछल बाहर आ गया। वो सिर्फ़ एक छोटी सी अन्डरवियर पहना हुआ था। जैसा कि आजकल लड़के पहनते है। वो पतली सी थी, बहुत छोटी सी थी। उसका कसा हुआ बलिष्ठ तन तराशा हुआ था। उसकी भीगी हुई टाईट अन्डरवियर में से उसका मोटा सा लण्ड और अन्य सामान फ़ूला हुआ सा साफ़ नजर आ रहा था। वो मेरे पास ही बड़ी कुर्सी सरका कर लेट सा गया। उसका भारी सा लण्ड उसकी अन्डरवियर में समा भी नहीं रहा था। उसके लाल सुपाड़े का अग्र भाग उसके पेट से लगा हुआ बाहर झांकता हुआ अपने दर्शन दे रहा था।

“बानो, वो सरदार है ना, तेजी इस टीम का भी सरदार है।”

“जी, यानि बॉस है?”

“हां, जो इस टीम का मेम्बर होता है इसकी एक विशेष परमिशन होती है, उसे प्राप्त करना होता है।”

“ओह, क्या करना होता है?”

“वक्त आने पर पता चल जायेगा। वैसे तुम इन लड़कियों जैसी नहीं हो।”

मैं सिर्फ़ हंस दी। मुझे उसके भीगे हुए लण्ड को देखना भा रहा था। पर नजर बचा कर ! कहीं रोहित देख ना ले। पर उसकी नजरें मुझसे अधिक तेज थी, वो ना सिर्फ़ मेरे भावों के उतार-चढ़ाव देख रहा था बल्कि मेरी नजरें भी वो भांप चुका था। इसी कारण उसला लण्ड धीरे धीरे सख्त होता जा रहा था। उसने बात सेक्स की ओर मोड़ दी।

“देखो बानो ! सभी कितना मस्त हो रहे हैं, वो देखो तो कैसे प्यार कर रहे हैं !”

मैं शरमा गई। मैंने देखा कि तभी एक जोड़ा हमारे बिल्कुल पास आकर पानी में चिपक कर खड़ा हो गया। उनकी कमर नीचे चल रही थी। मैं तो कांप गई। लग रहा था रवि रजनी को चोद रहा था। रजनी की कमर हिलने से पानी उछल रहा था। रवि के हाथ उसके स्तनों को मल रहे थे।

मैंने रोहित को देखा। वो हाथ हिला कर उन्हें बढ़ावा दे रहा था। तभी रोहित ने मुझे देखा। मैं उत्तेजना छिपाने के लिये उठ कर एक तरफ़ चल दी। वो माँ का लौड़ा रोहित भी उठ कर मेरे पीछे पीछे आ गया, मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोला,”जानती हो, ये समझ रहे हैं कि तुम मेरे साथ हो, इसलिये सिर्फ़ दिखाने के लिये ही सही, मेरे पास आ जाओ।”

ये साला हारामी मुझे फ़ंसाने की कोशिश कर रहा है। साला यूं तो नहीं कि मुझ जैसी छिनाल में क्या शरम ! पकड़ कर अपना मस्त लौड़ा मेरी चूत में ठांस दे। बहुत शराफ़त दिखा रहा है मादरचोद।

“ओह, नहीं रोहित जी, मुझे शरम आती है।” मैंने भी उस चूतिये को अपनी नाटकबाजी दिखाई।

अरे बस यूं ही ! नाटक करना है।”

मुझे कुछ कहते नहीं बन पड़ा, साला ये तो मुझसे भी तेज निकला और फिर उसने जैसा कहा था वैसा करने लगी, मेरे दिल में भी तो उसका लौड़ा खाने की थी। उसने बस होंठ से होंठ मिला दिये। सभी ने यह देखा और हाथ हिलाया। मेरा मन विचलित हो रहा था। मुझे तो सब कुछ करने की इच्छा होने लगी थी। मैंने नीचे से अपनी चूत हिला कर उसे हल्का सा इशारा भी दिया।

अब गले से लग जाओ, थोड़ी सी बदतमीजी सह लेना।

जी !

ओह साला भड़वा, भेन चोद, ये तो मुझे तड़पाने लगा है।

उसने मुझे गले से लगा लिया और मेरे कोमल चूतड़ दबाने लगा। मेरा जिस्म पिघलने लगा। फिर उसने मुझे छोड़ दिया। मैं उसे देख कर और उत्तेजित होने लगी थी। मेरी चूत गीली होने लगी थी। मुझ जैसी रण्डी भी कुछ नहीं कर पा रही थी। हाय, कैसे लूँ इस गाण्डू का लौड़ा।

“बानो, इतना क्यूँ शरमाती हो, यह तो आजकल का दस्तूर है, ये शारीरिक सम्बन्ध तो अब जरूरत की श्रेणी में आता है, ये तो अब एक एन्जोयमेन्ट है।”

उसका गोरा लण्ड मेरी चूत के आस पास गुदगुदी मचाने लगा था। तेरी भेन की चूत, साला, मादरचोद, तो लण्ड घुसेड़ क्यों नहीं देता !

“बानो, देखो तुम्हारे अलावा सभी लड़किया पूरी नंगी हैं, तुम्हीं एक अलग सी लग रही हो, प्लीज ये ऊपरी कपड़े तो उतार ही दो !”

“मैं तो मर ही जाऊंगी, रोहित ! ” मेरे मन में जैसे फ़ुलझड़िया छूट पड़ी। अब आया ना रास्ते पर।

“ऐसा कुछ नहीं होगा, वो सारी लड़किया शरमा रही हैं क्या, किसी को भी नंगेपन की परवाह नहीं है।”

मुझे लगा कि रोहित ठीक ही कह रहा है। मुझे भी तो चुदाने का अधिकार है ना। मैंने इधर उधर देखा और रोहित से आँखें चुरा कर अपने कपड़े उतारने लगी, अरे सच में, मुझे तो किसी ने भी नोटिस नहीं किया। मैं तो यूं ही घबरा रही थी। मेरी नीली छोटी सी पैंटी और पतली सी नीली ब्रा में मैं तो पटाखा सी लगने लगी थी।

“बानो, तुम तो गजब की हो, तुम्हारा शरीर तो मिस इण्डिया से भी खूबसूरत है, यहां तो देखो, कोई है तुमसा?”

रोहित ने तो अब अपनी वो छोटी सी अण्डरवियर भी उतार दी थी। अब उसका लण्ड फ़्री स्टाइल में सीधा खड़ा हुआ लहरा रहा था। इह्ह्ह, मस्त है साला, मजा आ जायेगा चुदवाने का।

“बानो पकड़ लो मेरा लण्ड और घूमो मेरे साथ !”

हाँ, यह हुई ना बात, मुझे भी अब बेशर्मी दिखाने का मौका मिला। मेरे दिल की रण्डी अब तड़प कर बाहर लगी थी। अब मेरी शरम कम होती जा रही थी। उसका कोमल पर कड़क लण्ड मैंने थाम लिया। मेरे दिल में कई सूईयाँ चुभने लगी। मैंने भी अपने सीने को उभारा और मैं इतरा कर उसके साथ साथ चलने लगी। वो भी अपना लण्ड पकड़ाये हुए आराम से पूल के किनारे किनारे चलने लगा। जाने कब मैंने भी उसके लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करना शुरू कर दिया था। रोहित भी उत्तेजना में घिरने लगा था। सभी लड़कियों को चोदने में व्यस्त थे। आखिर मेरी सहन शक्ति जवाब दे ही गई।

“रोहित, अब बस करो, नहीं रहा जाता है !” मैं उतावली होकर कह उठी और उससे जोर से लिपट गई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here