प्रेषक : गोरिया कुमार

अब धीरे धीरे मैं भाभी को अपनी गिरफ्त में लेने लगा। सयाली ने मेरे लिंग को चूमकर एकदम खड़ा कड़क और लंबा कर दिया और उस पर कोंडोम चढ़ा दिया। सयाली ने भाभी को मुझसे अलग किया और उनकी टांगें फैला दी। मैंने तुरंत भाभी की टांगों के बीच में लेटकर अपना लिंग उसके जननांग के तरफ बढ़ा दिया। सयाली ने मेरे लिंग को भाभी के जननांग में थोड़े से जोर से अन्दर डाल दिया और फिर मैंने जोर लगाकर उसे और अन्दर पहुँचा दिया।

भाभी के मुँह से ख़ुशी की आवाजें निकलने लगी। अब सयाली से रहा नहीं गया। उसने मुझे इशारा किया, मैंने अपना लिंग भाभी के अन्दर से निकाला और सयाली की योनि में घुसा दिया।

भाभी हमारे करीब आ गई और हम दोनों को चूमने लगी।

उसने भी अब सयाली की पूरी मदद की। कुछ देर के बाद मैंने सयाली की योनि में अपने लिंग की धारा चला दी।

यह देख भाभी ने कहा- मेरे साथ भी करो !

सयाली ने मुझे कहा- आप भाभी को करो !

लेकिन मैंने भाभी को समझा लिया कि बाद में उनके अन्दर ही लिंग डालूँगा।

भाभी मान गई।

हम दोनों इसी तरह से लेटे हुए थे। भाभी जब यह देखा तो उन्हें बहुत अच्छा लगा।

सयाली ने भाभी से कहा- भाभी, अगर आप बुरा नहीं मानो और आप की इजाजत हो तो ये आपके साथ दिल्ली से लौटने के बाद कर लेंगे।

भाभी ने सयाली को चूमा और बोली- तुम मेरा कितना ख़याल रख रही हो। मुझे मंज़ूर है लेकिन यह बात केवल हम तीनों तक ही रहनी चाहिए।

मैंने भाभी के गाल चूमे और बोला- आप बिल्कुल चिंता मत करो, इस कमरे के बाहर यह बात बिल्कुल नहीं जायेगी..

भाभी ने मुझे और सयाली के होंठों को एक साथ जोर से चूम लिया। भाभी की आग थोड़ी बुझ चुकी थी।

इस तरह से लगातार मैं सयाली के जननांग को भेदता रहा और भाभी को चूमता रहा और करीब-करीब सारी रात ऐसे ही बिताई।

जब हम थक कर चूर हो गए तो देखा कि सवेरे के छह बज गए हैं, हम सो गए।

अगले दिन मैं दिल्ली चला गया और जब दो दिन के बाद लौटा तो सयाली और भाभी दोनों ने मुझे एक साथ अपनी बाहों में भर लिया।

वे दोनों ही तड़प रही थी, जैसे तैसे कर हमने दिन बिताया। रात को हम तीनों हमारे कमरे में थे। भाभी ने आज गहरे लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी, सयाली ने उन्हें होंठों पर गहरे लाल रंग की ढेर सारी लिपस्टिक भी लगाईं।

भाभी एक बार-गर्ल जैसी सेक्सी लगने लगी थी।

मैंने भाभी को बाहों में लिया और एक साथ उसके होठों का सारा रंग अपने होंठों और जीभ पर ले लिया।

भाभी का सारा बदन सरसरा उठा।

फिर सयाली मेरे पास आ गई। हमने भाभी को और उत्तेजित करने के लिए आपस में कई सेक्स मुद्राएँ की।

भाभी की अन्तर्वासना अब पूरी तरह से भड़क चुकी थी। मैंने कोंडोम लगाकर अपने को पूरी तरह तैयार कर लिया।

भाभी पलंग पर लेटी, सयाली उनके पास लेट गई और उन्हें चूमने लगी। मैंने भाभी के जननांग पर अपना और सयाली का हाथ रखा। भाभी का जननांग एकदम कच्चा और गुदगुदा लग रहा था जैसे कोई फल आधा पका हुआ हो।

सयाली और मैंने एक दूजे को देखा, सयाली ने मुझे होंठों पर चूमा और भाभी के जननांग को दिखाते हुए बोली- जानू, इस कच्चे फल को आज तुम पूरी तरह से पका दो !

उस दिन पहली बार तुमने इसे छुआ था लेकिन देखो कैसा अनछुआ लग रहा है। उस दिन तुमने केवल थोड़े समय के लिए ही इसे छुआ था, आज तुम इसे पूरा छू लो और इसे लाल कर पूरा पका दो। यह फल तुम्हारे लिए ही बना है ऐसा समझो !

भाभी लेटी हुई थी और हम दोनों उसके जननांग को बैठे हुए देख रहे थे। मैंने अपने को भाभी के ऊपर लिटा लिया और सयाली ने तुरंत मेरे लिंग को भाभी की उस गुदगुदी गुफा में धकेल दिया।

मैंने जोर लगाया…

मेरा लिंग दूर, बहुत दूर अन्दर तक चला गया। सयाली ने भाभी के होंठों को अपने होंठों से छू लिया। अब सयाली भी मुझसे चिपक गई। सयाली अपना एक हाथ भाभी के जननांग के पास ले जाकर मेरे लिंग को पकड़कर उसके अन्दर धकेलने लगी। मुझे और भाभी को यह बहुत अच्छा लगा।

मैंने भाभी का हाथ पकड़ा और एक अपनी और एक भाभी की ऊँगली साथ में मिलाकर सयाली की योनि में दोनों उंगलियाँ डाल दी।

सयाली को बहुत अच्छा लगा। हम दोनों अपनी उंगलियाँ सयाली के अन्दर धीरे धीरे चलाते रहे। काफी देर तक इसी तरह करने के बाद अचानक हम तीनों ही जोर से तड़प उठे।सयाली की चूत अब गीली होकर बहने लगी थी। हमारी उंगलियों ने उस मलाईदार रस को बाहर आने से रोक दिया। तभी मेरा लिंग भी अपने से मलाई निकालकर भाभी के अन्दर छोड़ने लगा।

अद्भुत नजारा था !

हम तीनों इतना तड़पे और आनंद में आये कि हम पागल से हो गए।

इसके बाद मैंने सयाली की योनि को अपने लिंग से भर दिया। भाभी ने अब सयाली की भूमिका निभाई।

सारी रात हम तीनों इसी तरह से सेक्स का मजा लेते रहे। सयाली की इच्छानुसार भाभी का जननांग अब पूरी तरह से गहरा लाल लाल हो चुका था।

सवेरे जब मैं ऑफिस के लिए रवाना होने लगा तो भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुलाकर मेरे होंठों को चाशनी से भरा हुआ एक चुम्बन दे दिया।

इसी तरह से दिन बीतने लगे।

एक दिन खबर आई कि भैया को तीन दिन के लिए अपने परिवार से मिलने के लिए भारत आने का मौका मिल रहा है।

मैं और सयाली खुश हो गए कि चलो अच्छा है भाभी और भैया का मिलन हो जाएगा।

भैया आ गए लेकिन हम दोनों उस वक्त बहुत हैरान हो गए जब भाभी रात को भैया के कमरे से निकलकर हमारे कमरे में आ गई।

भाभी ने कहा कि वो हम दोनों के ही साथ सोएँगी।

भाभी ने बताया कि भैया तो कब के सो गए हैं।

हम दोनों हैरान कि आखिर भैया ऐसे कैसे सो गए जब कि पूरे एक साल बाद वो भाभी से मिल रहे हैं !

भाभी हम दोनों के साथ ही सो गई।मैंने और सयाली ने भाभी के दर्द को समझा और उनसे संभोग किया। जब उन्हें नींद आने लगी तो मैंने उन्हें छोड़ दिया।

अगले दिन भाभी ने बताया कि भैया ने वहाँ एक औरत से दूसरा विवाह कर लिया है और वो अब भाभी को नहीं अपनाएंगे।

भाभी ने मुझसे और सयाली से कहा- यह बात घर में किसी को भी पता नहीं चलनी चाहिये।

भाभी का मतलब यह था कि जब किसी को पता नहीं चलेगा तो भाभी का मेरे और सयाली के साथ का रिश्ता कायम रह पायेगा।

सयाली और मैं मान गए, भैया लौट गए।

आज भैया को गए दो साल हो गए हैं, भैया साल में एक बार आते हैं और तीन चार दिन रुक कर लौट जाते हैं। जब जब भैया आते हैं तो भाभी कमरे में उनके साथ सोती हैं लेकिन सिर्फ सबको दिखाने के लिए। भैया भाभी को छूते तक नहीं हैं..

सभी को यह लगता है कि सब कुछ सामान्य है।

इस बार जब भैया गए तो कह गए कि अब उनका आना बहुत कम या नहीं के बराबर रहेगा, उन्हें कनाडा के नागरिकता मिल चुकी है।

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