आपकी कुसुम का चौड़ी टांगों, मदहोश जवानी से अंतर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से प्यार एंड नमस्कार ! अपने बारे में ज्यादा न बताती हुई क्यूंकि अपनी कहानी के पहले भाग में मैंने अपना पूरा ब्यौरा दे दिया था।

सो दोस्तो, पति के ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद किस तरह मेरा रिश्ता अपने ससुर जी से बन गया, यह आपने पढ़ लिया। अब तो मानो मैं उनकी दूसरी बीवी की तरह रहती ! हैरानी वाली बात थी कि ससुर जी में इस उम्र में एक जवान लड़के से ज्यादा जोर, दम था कि उन्होंने एक कमसिन, कामुक, आग जैसी जवान बहू को संभाल रखा था।

दोस्तो, जेठ जी को भनक पड़ गई और फिर उनकी मेरे ऊपर निगाहें टिक चुकी थी। ऊपर से जेठानी के जनेपे के लिए उनके पीहर भेज दिया जिससे उनकी वासना और बढ़ गई। करते भी क्या ! औरत पेट से थी तो लौड़े का क्या हाल होगा ! लेकिन मुझे तो ससुर जी ही नहीं छोड़ते थे लेकिन मेरा झुकाव अब जेठ जी की तरफ भी था, चाहती थी कि उनकी प्यास बुझाऊँ ! आखिर मौका मिल गया !

एक दिन ऐसा जरूरी काम पड़ा कि ससुर जी को सासू माँ के साथ बाहर जाना ही पड़ा और दोपहर को मैं घर में अकेली थी। लेकिन जेठ जी सुबह से घर नहीं थे, शायद उन्हें मालूम नहीं था कि मैं अकेली हूँ, वरना वो मौका कहाँ छोड़ते ! कोशिश ज़रूर करते !

मैंने उनके मोबाइल पर मिस-कॉल दे दी। उसके बाद वो फ़ोन पर फ़ोन करने लगे लेकिन मैंने नहीं उठाया। आधे घंटे के अंदर मेरा अंदाजा और तीर सही जगह लगा और वो घर आ पहुंचे। मैं अपने कमरे में कंप्यूटर पर बैठी सर्फिंग कर रही थी, बारीक सफ़ेद नाइटी अंदर काली ब्रा-पेंटी पहन रखी थी।
कुसुम ! तुमने कॉल की थी?
मैं पलटी- नहीं तो ! वो गलती से पॉकेट में बटन दब गया होगा !
ठीक है ! कहाँ हैं सब? अकेली हो आज?
जी हाँ अकेली हूँ ! बैठो ! अभी चाय लेकर आती हूँ !
नहीं भाभी !

उन्होंने मेरी कलाई पकड़ ली, खींच कर मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे गुलाबी होंठों का रसपान करने लगे। मेरी और से ज़रा सा विरोध ना देख उनकी हिम्मत बढ़ चुकी थी।

बहुत सुन्दर हो भाभी जान ! बहुत आग है आप में ! बहुत तड़पाया है आपने अपनी जवानी से मुझे ! हर पल गोली मारती रहती हो !

मैं भी तो आपकी वासना आपकी आँखों में पढ़ती रही हूँ, लेकिन पहल नहीं कर पा रही थी !

ओह मेरी जान ! मुझे भी सब मालूम था ! मैं भी थोड़ा सा झिझक रहा था ! मुझे मालूम है तूने अपनी मर्ज़ी से मुझे मिस-कॉल दी थी !

और यह कहते ही वो मुझ पर सवार होने लगे। मैंने एक पल में उनके बटन खोल उनकी कमीज़ अलग कर दी और उन्होंने मेरी नाईटी उतार फेंकी और ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मे दबाने लगे। मैं अश अश कर रही थी। मैंने उनकी बेल्ट भी खोल दी, अपने हाथों से जींस का बकल खोल नीचे कर अंडरवीयर के ऊपर से ही उनके लौड़े को मसलने लगी। उनकी आग बढ़ने लगी, लौड़ा तन कर डण्डा बन चुका था, कितना बड़ा हथियार था !

मेरी चूत में कुछ-कुछ होने लगा। सिहरन सी उठने लगी, जवानी बेकाबू हो रही थी। उन्होंने मेरी ब्रा उतार मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी खूब चूसा। मैं नीचे बैठ गई, उनकी पूरी जींस शरीर से अलग कर उनके लौड़े को आराम से चूसने लगी।

कितना बड़ा है जेठ जी !
हां रानी ! इसको तेरे जैसी रांड पसंद है ! तेरी जेठानी तो ठंडी औरत है !

वो मेरे चूसने के अंदाज़ से बहुत खुश थे, मुझे बाँहों में उठा कर बिस्तर पर डाल लिया और मेरी टाँगें चौड़ी करवा ली। बीच में बैठ कर पहले प्यार से मेरी पूरी चूत पर हाथ फेरा, फिर मेरे दाने से थोड़ी छेड़छाड़ करने लगे। मैं बेकाबू हो रही थी, जल्दी ही उन्होंने लगाम लगा ली और अपना मोटा लौड़ा मेरी चूत में डालकर मुझे चोदने लगे।

अह अह और तेज़ करो जेठ जी ! जोर जोर से मारो ! अपनी जवान भाभी की जवान जवानी लूट लो !

यह ले यह यह साली कुतिया कब से तेरा आशिक हूँ ! तू है कि मेरे बाप से चुदवाती है !

क्या करूँ ! वो नहीं छोड़ते मुझे ! तेरे बाप में तेरे जितना दम ही है !

यह ले कमीनी ! अब से मुझे भी दिया करेगी?
हाँ दूंगी ! लो मेरी और मजे से लो !
चल घोड़ी बन ! तेरी फाड़ता हूँ गांड !

घोड़ी बना मेरी गांड मारने लगे !
हाय दुखती है !

तब फिर से चूत में डाल मेरी लेने लगे। पच्चीस मिनट की लम्बी चुदाई के बाद उनका घोड़ा छूट गया और हांफने लगा।

पूरी दोपहर जेठ से चुदवाया और फिर दोनों के साथ में अपनी जवानी लूटने लगी। अगले बार मुझे मासिक-धर्म नहीं हुआ। ससुर जी ने मुझे पेट से कर दिया।

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