प्रेषक : संजीव चौधरी

वकार अब छुटने वाला था, तब वो बोला- तुमको मेरा सारा मणि खा जाना है।

मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं थी, पर यह शब्द नया था, शायद पाकिस्तान में वीर्य को मणि बोलते हैं। मुझे तो हिन्दी के शब्द ही आते थे। मैं मुँह खोल कर सामने जमीन पर बैठ गई और वकार ने हाथ से अपना लण्ड हिला-हिला कर पिचकारी मारी। छः बार में सारा वीर्य मेरे मुँह में डाल दिया जिसे मैं चाट गई।

अब उसने मेरा मुँह चूम लिया और बोला- अब जाओ और आसिफ़ से चुदो अच्छे से।

मैं उठी तो आसिफ़ ने मेरी पैन्टी खींच दी, कहा- इतना सा बदन अब्बू से क्यों छुपा रही हो, सब दिखा दो एक बार फ़िर चलना।

मैं उठी और अपना पैन्टी खोल दी। आज सुबह ही जब मुझे चाचू ने बताया तो अपने झाँट को साईड से साफ़ की थी, जिससे 1″ चौड़ी पट्टी में पिछले 5-6 दिन में उगे छोटे-छोटे काले-काले झाँट मेरी गोरी बुर की खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे।

मेरी ऐसी मस्त चूत देख दोनों के मुँह से एक साथ आह निकली और फ़िर निकला- सुभानल्लाह !

आसिफ़ बोला- अब चल पहले चोदूँ तुमको वरना अफ़सोस होने लगेगा कि देरी क्यों की।

मैं बोली- पहले बुर को धो लूँ, बहुत गीली हो गई है और रास्ते में आते समय गर्मी से थोड़ा पसीने की भी बदबू आ रही है।

मुझे तो वकार के पसीने की बू याद आ रही थी। पर आसिफ़ की बेकरारी में कोई फ़र्क नहीं पड़ा, बोला- अबे चल, जवानी लौन्डी की बुर के पसीने की बू से यार लोग का लौड़ा ठनक जाता है। अभी तक घर में चुदी है ना, इसीलिए बदबू/खुश्बू की बात करती है। कुतिया की चूत से बदबू कभी नहीं आती। अपने अब्बा के देखते झुका और चूत की फ़ाँक से शुरु करके हलके झाँटों वाली पट्टी तक अपने जीभ से चाट लिया।

मेरा बदन गुदगुदी से भर गया। उसने एक चपत मेरे चूतड़ों पर लगाई और बेडरुम की तरफ़ बढ़ गया।

बिस्तर पर लिटा वो मेरे चूत के पीछे पड़ गया। लगातार जोरदार तरीके से चाटा, या कहिए खाया उस पूरे इलाके को। मेरे मुँह से अजीब-अजीब आवाज निकली, जो पहले नहीं निकली थी और मैं एक बार झड़ी तो उसने पूरी बुर उँगली से खोल चाटा। मैं शान्त हो गई थी। पर आसिफ़ पक्का हरामी था। उसने अब अपनी पैन्ट खोली और पहली बार मैंने उसके लण्ड को देखा। नौ इन्च से कम न था, गहरा भूरा और खूब मोटा। उसकी चमड़ी देख लगा नहीं था कि उसका लण्ड इतना काला होगा। मुसलमान था, सो खतना किया हुआ था और उसके लण्ड की चमड़ी उसके आधे लण्ड से ज्यादा नहीं पहुँच रही थी।

मैं एक बार झड़ कर शान्त लेटी थी, इतनी मस्ती कभी मिली नहीं थी पहले। शायद माहौल का असर था। पर आसिफ़ का इरादा कुछ और था। उसने बिना कुछ बोले मेरे पैरों को फ़ैलाया और ऊपर चढ़ गया। मैं जब तक कुछ समझूँ उसने मेरे चूत में अपना लण्ड ठांस दिया। दो धक्के में पूरा नौ इन्च भीतर। मैं दर्द से बिलबिला उठी- उईईई माँआँआआँ, छोड़ो मुझे प्लीज !

आज पहली बार चुदाते समय अम्मी याद आई और आँखों में आँसू आ गए। आसिफ़ बोला- अब चुप भी कर साली रन्डी ! दलाल को बीस हज़ार देकर चलता कर दिया और अब चुदाने में नानी मर रही है? ज्यादा नखरे ना कर और आराम से चुद पहले। ऐसे ही लण्डों की बदौलत तो तू बाज़ार की रानी बनेगी एक दिन।

मैं रोने लगी थी, सोचा था कि सब, चाचू ने जैसे रागिनी को चोदा था, वैसे चोदते हैं।

रागिनी की बात सब याद आई।

पर मुझे रोता देख आसिफ़ प्यार से समझने लगा- देख चुप हो जा, अभी तू नई है, इसलिए तकलीफ़ है, पर तू तो चुदी हुई है पहले से, फ़िर क्यों डर रही है? आम लोगों से मेरा थोड़ा बड़ा है पर अपनी तरह का अनोखा मजा देगा जब भीतर तक धक्के खाएगी तू। पहले मेरे दो-चार धक्के बर्दाश्त कर ! फ़िर खुद से फ़ुदक फ़ुदक कर मरवायेगी अपनी चूत !

सच ! जल्दी ही मेरी बुर उसके इस भारी भरकम लण्ड के धक्के बर्दाश्त कर के एक बार फ़िर पानी छोड़ने लगी और कमरा हच-हच, फ़च-फ़च की आवाज से भर गया।

दस-बारह मिनट मेरी चूत ठोकने के बाद आसिफ़ ने लण्ड बाहर खींचा और कहा- चल चूस अब इसको।

मैं हिचक रही थी क्योंकि लण्ड पर मेरे चूत का गीलापन लगा हुआ था। एक बार चेहरा पास ले गई पर मन न हुआ, बोली- इसमें से कैसी खट्टी सी बू आ रही है।

आसिफ़ हँसा-“अबे, यह बू ही तो खुशबू है, बताया था न तुझे। और यह खट्टी बू तेरी ही मस्त चूत की है। अब आजा बच्ची ! देर ना कर ! अभी तुझे पीछे से ठुकना बाकी है।

मैंने लण्ड मुँह में डाला और खुद की चूत के पानी का स्वाद लिया। पाँच मिनट में बिना कोई चेतावनी के आसिफ़ मेरे मुँह में झड़ गया और बोला- बिना रुके चूसती रह।

उसका लण्ड हल्का सा ढ़ीला हुआ और फ़िर जल्द ही टनटना गया। इस बार आसिफ़ ने मुझे पलट दिया और जैसे कुत्ता कुतिया पर चढ़ कर चोदता है, वैसे मुझे चोदा। हर धक्के पर मस्ती से मैं कराह उठती और वो आवाज सुन एक और धक्का और जोर से देता। ऐसे ही मैं थकने लगी और धीरे-धीरे बिस्तर की तरफ़ झुकने लगी। जल्द ही मैं लगभग बिस्तर पर पेट के बल हो गई, और आसिफ़ मेरे ऊपर लेट मेरी चुदाई करता रहा। मेरे नीचे हो जाने से उसको अब परेशानी हो रही थी धक्का लगाने में, तो बोला- चल अब पलट, सीधी हो। इस बार की ठुकाई में तेरी चूत को भर देता हूँ मणि से।

अब मुझे याद आया कि ऐसा तो मैंने सोचा न था, अब अगर इसके वीर्य से मुझे बच्चा रह गया तो। पर मैं कुछ बोलने की हालत में न थी। बस एक बार अल्लाह को याद किया और सीधी हो कर पैर खोल कर ऊपर उठा दिए। आसिफ़ ने अपने लण्ड को तीन बार मेरे चूत की ऊपर की घुन्डी पर पटका। उसकी चोट मुझे एक अजीब सी मस्ती दे रही थी कि तभी उसने एक झटके में पूरा नौ इन्च भीतर पेल दिया।

मैं अब आआह उउउउह इइइस्स्स हुम्म्म्म्म जैसी आवाज कर रही थी। मैं एक बार और झड़ चुकी थी पर आसिफ़ अपनी धुन में मुझे चोदे जा रहा था। फ़िर 5-6 तगड़े झटके के साथ उसके वीर्य ने मेरी चूत की प्यास बुझा दी। आसिफ़ ने अपना लण्ड भीतर ही घुसा कर रखा था।थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही शान्त पड़ रहे फ़िर उसने अपना लण्ड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया- साफ़ कर चाट कर इसे मेरी कुतिया !

और प्रोफ़ेसर जमील अहमद खान की प्यारी इकलौती बेटी बीस हज़ार लेकर एक रन्डी की तरह चुदाने के बाद अब लण्ड पर लगे हुए वीर्य को चाट रही थी।

तभी बाहर से वकार ने आवाज लगाई- अब खत्म करो भाई ! एक से ज्यादा बज गए, खाना आ जायेगा अब। थोड़ा आराम भी करो खाने से पहले।

करीब डेढ़ घंटे से मैं लगातार चुद रही थी। अब मुझे लगा कि हाँ, यह अनुभव हमेशा याद रखने वाला है।

मैं उठी और सिर्फ़ सलवार और शमीज पहन ली। तभी रुम-सर्विस खाना ले आया। दोनों वेटरों के लिए यह सब देखना नई बात नहीं थी।

मेरी सलवार और शमीज के बीच से करीब 5″ के सपाट पेट पर उन वेटरों की नज़र बार-बार जा रही थी। 20-22 साल के नौजवान वेटरों को दिखा कर जमीन पर पड़ी हुई अपनी ब्रा और पैन्टी उठाई। मेरे झुकने से उनको मेरी सुन्दर चूचियों की झलक मिल गई।

चूत में जो वीर्य भरा हुआ था अब हल्के-हल्के बाहर आने लगा था। मैंने सब को दिखा कर अपनी सलवार की मियानी से अपनी चूत को पौंछा और फ़िर गीली हुई मियानी को देख कहा- भीतर निकाल दिया, देख लीजिए, कपड़े खराब हो गए।

वकार हँस दिया- अरे बच्ची, अगर पेट से रह जायेगी तो पूरा ताजमहल बिगड़ जायेगा और तू कपड़े की चिन्ता कर रही है।

बेशर्म बूढ़ा मेरी फ़िगर की बात कर रहा था। मुझे अब उन दोनों के साथ मजा आ रहा था। आसिफ़ मेरे बदन की खूब तारीफ़ कर रहा था और उसका बाप मजे लेकर सुन रहा था, फ़िर पूछा- तुझे मजा आया ना बेटा इसको चोद कर?

आसिफ़ खुशी से बोला- बहुत अब्बा, चूत तो बिल्कुल कसी हुई है। पर लौन्डिया मस्त है, आँखों से आँसू निकल आए जब दो ही धक्कों में पेल दिया था पूरा भीतर। यह रान्ड साली इतनी सुन्दर है कि मैं बेकाबू हो गया। पर क्या मस्त चुदी अब्बा, अम्मीजान की कसम मजा आ गया।

हम सब ने साथ खाना खाया और वकार ने कहा कि मैं दो घन्टे आराम कर लूँ। क्योंकि शाम की चाय के पहले वह मुझे चोदेगा और फ़िर रात में तो मुझे लगातार चुदना है। मैं भी आराम से बेड पर जा कर आराम करने लगी और मुझे नींद आ गई।

करीब साढ़े चार बजे मुझे लगा कि कोई मेरा चेहरा सहला रहा है, तो हड़बड़ा कर उठी।

वकार बिल्कुल नंगा मेरी बगल में लेटा हुआ था। मुझे जगा हुआ देख वो मेरे मुँह को चूमने लगा और फ़िर अपने मुँह से ढ़ेर सारा थूक मेरे मुँह में गिरा दिया। मैं इसके लिए तैयार नहीं थी, पर वो मेरी हकबकाहट देख खुश हुआ और बोला- निगल ले मेरा थूक, जब मेरा मणि खा सकती है तो मेरे थूक से क्या परेशानी।

मुझे अब समझ आ या कि मैं तो उसके लिए एक रन्डी थी, और मुझे वही करना था जो वो कहे।

मैं जब य्हूक निगल गई तो वो मेरे ऊपर चढ़ कर लेट गया, मुझे अपने बदन से पूरी तरह से दबा कर और फ़िर से मेरे होंठ चूसने शुरु कर दिए। फ़िर पलट गया और वो नीचे था, मैं ऊपर ! होंठ से होंठ मिले हुए।

तभी वो मेरे चूतड़ सहलाने लगा और फ़िर अचानक मेरी सलवार की मियानी पकड़ कर उसे एक झटके से करीब 4″ फ़ाड़ दिया।

मैं चौंक गई- हाय अल्लाह, अब मैं घर कैसे जाउँगी?

मैं एकदम से परेशान हो गई और बिस्तर पर बैठ गई। वकार मेरी बेचैनी देख हँस पड़ा, बोला- क्यों ? फ़टी सलवार पहन कर जाना, अम्मा खुश होएगी। इतना सज धज के आई है तो तेरी अम्मी को पता तो चले कि बेटी सही से चुदी, क्यों?

उस हरामी को कहाँ पता थी कि मेरे अम्मीजान को जरा भी अंदाजा न था कि बेटी रन्डी बन चुद रही है। पर ऐसी मजबूरी में मेरी आँख फ़िर नम होने लगी, तभी वह बोला- अरे खुश हो जा, तुझे नये कपड़े में विदा कर देंगे। आसिफ़ को भेजा है, तेरे लिए नये कपड़े लेने। इससे अच्छे कपड़े में घर जाना।

मेरे चेहरे को अपने हाथ में पकड़ बड़े प्यार से पूछा- अब तो खुश है तू। देख अगर तू दुखी होगी तो चोदने का मजा कम हो जाएगा। अरे तू इतनी हसीन है, जवान है कि तेरे साथ शरारत करने का मन बन गया। अब हँस भी दे।

उसके ऐसे मनाने से मुझे दिल से खुशी हुई और मैं मुस्कुरा दी।

वो भी मुस्कुराया- जवान लौन्डिया को कपड़े फ़ाड़ कर चोदने में जो मजा है वो किसी चीज में नहीं है।

और मेरे छाती पर हाथ रख मेरी शमीज को भी चीर दिया। मेरी दोनों चूचियों को देख हल्के से उन पर चपत लगाया तो वो हल्के से हिल गए। उनके हिलते देख वो खुशी से बोला- देख कैसे ये कबूतर मचल रहे हैं और 3-4 चपत और लगा दए। इसके बाद उसने मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया और मेरी चूत चूसने लगा। धीरे-धीरे मुझमें मस्ती छाने लगी और तब मुझे मस्त देख बुढ़्ढ़ा मेरे पैरों के बीच आ अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा कर धक्के लगाने लगा। बीच-बीच में चूची पर चपत भी लगा रहा था और मैं मस्त थी।

थोड़ी देर बाद वो लेट गया और मुझे ऊपर से उसके लण्ड की सवारी करनी पड़ी। 2-3 मिनट बाद वो फ़िर मुझे नीचे लिटा दिया और ऊपर से मुझे चोदने लगा। वो अब तेजी से धक्के लगा रहा था और मैं मस्त हो गई थी। तभी लगा वो झड़ रहा है। 4-5 झटके के बाद उसका माल मेरी चूत में निकल गया। वो मेरे ऊपर लेट मुझे चूमने लगा फ़िर उठा और बोला- जाओ, अब हाथ मुँह धो लो। खाकर सो गई थी सो मुँह से हलकी बास आ रही है।

मुझे याद आया कि मुझे उठने के बाद मौका ही नहीं दिया था साला हरामी। तभी आसिफ़ लौट आया एक बड़ा सा पैकेट ले कर और हम दोनों को नंगा देख पूछा- चोद लिया इसको अब्बू?

वकार बोला-“हाँ बच्चे, गीले खेत में बीज डाल दिया इस बार।

यह सुन मैं मस्त हो गई, और थोड़ी चिंतित भी। मैं बाथरुम में चली गई।

मैं जब नहा कर आई तो आसिफ़ मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार था। एक बार मुझे उसने अपने अब्बू के सामने चोदा और फ़िर मुझे वो पैकेट दे दिया कि अब मैं ये कपड़े उन बाप-बेटों के सामने पहनूँ।

मैं नंगी ही उठी और बाथरुम में जा कर अपने आप को साफ़ किया फ़िर नंगी ही लौटी और पैकेट खोला। उसमें एक खूबसूरत सा गुलाबी सिल्क का जरी-काम वाला डिजायनर सलवार-सूट था और एक लाल रेशमी धागे से काम किया हुआ मैरून रंग का ब्रा-पैन्टी का सेट।

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