विजय पण्डित

उसकी बड़ी बड़ी आँखें धीरे से खुली और सिसकते हुये बोली- मत देखो मुझे, आह्ह्ह्ह … मैं चुद रही हूँ … आ जाओ, हम एक हो जायें !

हां जानू, देखो तो तुम कितनी हसीन लग रही हो…!

राजा, तुम भी कितने मोहक लग रहे हो… मैं मर जाऊँ तुम पर … हाय !

हम दोनों के शॉट तेजी से पड़ने लगे … पसीने की बूंदे चेहरे पर चूने लगी। मैंने अपना शरीर अपने दोनों हाथो पर ले लिया और आगे से ऊपर उठ गया। काजल अपनी दोनों टांगों को पूरी फ़ैला कर चुदा रही थी। अब मेरा शरीर भी ऊपर उठ कर फ़्री हो गया था, अब शॉट मारने में मस्ती आ रही थी। तभी उसने चादर को अपनी मुठ्ठी में कस लिया और अपने दांत भींच लिये … और आँखों को जोर से बंद कर लिया। उसने अपना रज छोड़ दिया और झड़ने लगी। मैंने चोदना चालू रखा।

“बस… राजा अब बस … चाहे तो अब गाण्ड चोद दो !”

मैंने धीरे से अपना तन्नाया हुआ लण्ड बाहर खींच लिया। चूत के अन्दर की चिकनाई से पुता हुआ था। वो स्वयं ही उल्टी लेट गई और थोड़ी सी घुटनों के बल हो गई। उसके चूतड़ खिल गये … चिकनी गाण्ड के बीच गुलाबी भूरा सा छेद अन्दर बाहर हो रहा था। तभी काजल ने अपनी क्रीम की शीशी दे दी। मैंने उसकी गाण्ड के छेद में क्रीम भर दी और अपनी अंगुली से उसे घुमा घुमा कर फ़ैलाने लगा।

“अरे वाह, बड़ा अनुभव है गाण्ड चोदने का…”

“भाभी की गाण्ड चोदता हूँ ना … अब ले… घुसा ले !”

उसकी क्रीम से भरी गाण्ड में लण्ड आराम से घुस गया। उसके तंग छेद में लण्ड को बहुत मजा आ रहा था। धक्के भी आराम से चलने लगे थे। तंग छेद होने से मैं अधिक देर तक नहीं टिक पाया और कुछ ही देर में मेरा वीर्य निकल पड़ा।

“बड़ी डींगे मार रहे थे … कुछ ही धक्कों में माल निकाल डाला … चल अब जल्दी से बाहर निकाल ले, दर्द हो रहा है।”

पर लण्ड तो खुद ही सिकुड़ कर बाहर आ गया था। चादर से ही हम दोनों ने अपना लण्ड और चूत साफ़ कर ली। फिर हम दोनों ने लिपट कर एक चुम्मा लिया और उसने तुरन्त अपने कपड़े पहने और बाहर निकल कर अपने घर में कूद गई। चुपचाप सीढ़ियाँ चढ़ कर अपने कमरे में आ गई।

तभी बाहर खटपट की आवाजें आने लगी। जल्दबाजी में मैं बाहर आ गया। सभी लोग आ चुके थे। मम्मी-पापा अपने कमरे में चले गये और भाभी सीधे मेरे कमरे में आ गई। कमरे का नजारा देखते ही वो भांप गई।

“तो ये बात है …! किसे चोद दिया आज देवर जी ?”

“नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है…!”

भाभी ने चादर उठाई और सूंघते हुये कहा,”तेरा माल तो निकला है … और यह क्रीम की शीशी बता रही है कि कोई तो चुद कर गई है यहाँ से !”

मैंने भाभी को एक कोने में ले जा कर उसके मम्मे दबा दिये।

“चुप रहो ना भाभी … आज तो आपकी चूचियाँ बहुत तन रही हैं?”

“वो साला राजेश, शादी में मेरे चूतड़ों को जाने कितनी बार दबा गया, और मम्मे तो जोर से मसल ही दिये थे।”

“तो चुदवा लेती ना भाभी…”

“साला गाण्डू निकला… मैंने उसे इशारा किया तो उसकी गाण्ड फ़ट गई।”

“बस ! तो मैं तो हूँ ना … निकाल अपना भोसड़ा और हो जा मस्त !”

“पहले बता किसे चोदा?”

“काजल को, बहुत दिनों से मुझे तड़पा रही थी, आज मौका मिला तो चोद भी दिया और गाण्ड भी मार दी।”

“चलो किसी बाजारू को नहीं चोदा, वरना बीमारी का खतरा रहता है ना !”

तभी बिजली चली गई। मैंने मौके का फ़ायदा उठाते हुये भाभी के होंठ पर अपने होंठ जमा दिये। भाभी ने अपना पेटीकोट ऊंचा कर लिया। मैंने अपना लण्ड भाभि की चूत से चिपका दिया। भाभी को कहां चैन था, लगी कुत्ते की तरह धक्का मारने और मेरा लौड़ा चूत में घुसेड़ ही लिया। कुछ ही पलो में भाभी चुद रही थी। भाभी शायद पहले से बहुत उत्तेजित थी सो जल्दी ही झड़ गई। मेरा लण्ड खड़ा ही रह गया।

भाभी ने कहा,”अब मेरी बारी है … रुक जरा…”

भाभी अन्धेरे में ही अपने कमरे में गई और कुछ उठा लाई।

“हां मेरे देवेर जी, अब बन जाओ घोड़ी…”

“मेरी गाण्ड मारोगी क्या…”

“कुछ ऐसा ही समझ लो … चलो झुक जाओ, बहुत दिनों से कुछ अजीब सी इच्छा हो रही थी !”

“कैसी इच्छा ?”

“मन कर रहा था कि आज तो तेरी गाण्ड डिल्डो से मार कर मजा लूं, देखें तो तुझे कैसा मजा आता है?”

मैं हंसते हुये झुक गया। तभी मेरी गाण्ड में कुछ नरम सा लगा। भाभी ने मेरे कूल्हे दोनों हाथो से पकड़ लिये और अपनी कमर का जोर लगाया। उनकी कमर में बंधा हुआ डिल्डो मेरी गाण्ड में घुस गया।

“भाभी डिल्डो से मुझे चोदोगी क्या ?”

“चुप भी हो जा … मेरी इच्छा हो रही थी तेरी गाण्ड मारने की, मजा आया कुछ?”

उसका डिल्डो मेरी गाण्ड में घुसता चला गया। अब उसने हाथ नीचे से बढ़ा कर मेरा तन्नाया हुआ लण्ड पकड़ लिया और उसे सहलाते हुये मेरी गाण्ड मारने लगी। लण्ड मलने से मेरी उत्तेजना बढती जा रही थी। उसका डिल्डो मेरी गाण्ड को चोदने लगा था। मैंने अपने दोनों हाथ अंधेरे में पलंग पर टिका दिये थे और आराम से गाण्ड चुदवा रहा था। भाभी की नजाकत से गाण्ड मरवाने में बहुत मजा आ रहा था। भाभी के कोमल हाथों का स्पर्श भी मेरी उत्तेजना को भड़का रहा था।

“देवर जी, मजा आ रहा है ना … पहले कभी मराई थी क्या ?”

“हां भाभी, कई बार मराई है, जब लड़कियाँ नहीं मिलती थी तो दोस्तों की मारते थे और दोस्त भी मेरी मारते थे। खूब मस्ताते थे।”

भाभी मेरा लौड़ा खूब जोर जोर से मसकने लगी… मेरा लण्ड फ़ूल कर मस्त हो चला था। मेरे सुपाड़े को बार बार दबाने से वो अब रस छोड़ने को तैयार हो चला था। मैंने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया… लण्ड को भी फ़्री कर दिया। भाभी के लण्ड को जोर जोर से मचकाने से लगा कि अब निकला … हाय अब निकला … गाण्ड में डिल्डो भी बहुत आनन्द दे रहा था। … और मेरे लण्ड ने जोर की पिचकारी निकाल दी … भाभी का हाथ वीर्य से गीला हो गया। भाभी ने मेरा लण्ड निचोड़ कर सारा माल निकाल दिया और फिर डिल्डो भी निकाल दिया।

“मजा आया देवर जी?”

“हां भाभी बहुत मजा आया … कुछ अलग सी चुदाई थी ना …”

तभी बिजली आ गई। भाभी कमर से बांधा हुआ बेल्ट खोल रही थी…”

मैंने फिर से अपना पजामा पहना। भाभी ने भी कपड़े पहने और मुझे चूम कर अपने कमरे में चली गई। मैं धम से बिस्तर पर गिर पड़ा। थकान सी होने लगी थी। मन में जंग छिड़ी हुई थी कि कौन मजेदार है। एक तरफ़ जवानी से भरपूर 20 साल की मस्त नवयौवना और दूसरी ओर मेरी अनुभवी भाभी। विभिन्न तरीकों मुझे आनन्दित करती थी और काजल, मस्ती की दूसरी परिभाषा थी। खैर ! मुझे क्या। चुदाई तो दोनों की हो रही थी ना !!!

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