मैं देविका हूँ, उम्र 24 वर्ष और लम्बाई 5 फ़ुट 3 इन्च। मैंने अपने बॉब हेयर कट करवा रखे थे। मैं दुबली पतली पर आकर्षक लगने वाली युवती हूँ। मैं मुम्बई की एक निजी कम्पनी में पीए हूं। आईये आपको मैं बताती हूँ कि मुझे कम्पनी में कैसे प्रोमोशन मिला।

मेरी नौकरी के लिये जब इन्टरव्यू हुआ था तब कम्पनी का मालिक एक बुजुर्ग इन्सान था और उसने मेरी काबलियत पर मुझको रखा था। पर वो अब कम्पनी नहीं चलाते थे। उनका बेटा अंकित जो 28 वर्ष का था और उसका एक खास दोस्त रोहित, तो कम्पनी का पार्टनर भी था, कम्पनी का काम काज देखते थे।

मुझे इस कम्पनी में काम करते हुए सात माह हो चुके थे… मुझे अंकित और रोहित दोनों ही बहुत पसन्द थे। दोनों स्टाफ़ के साथ घुल मिल कर काम करते थे। समय समय पर रीसोर्ट में सभी को पार्टी देते थे और पिकनिक भी ले जाते थे।

अंकित की नजरें शुरु से ही मुझ पर थी। मुझ पर, शायद खूबसूरत और मोडर्न टाईप की दिखने पर, लाईन मारता था। मैं उसकी लाईन को इज्जत से स्वीकार करती थी, और एक मतलबी मुस्कान बिखेर देती थी। मेरी अदाओं पर मर कर आखिर एक बार उसने मुझे अपने केबिन में बुला ही लिया…

“देविका… तुम्हारा काम हमें बहुत पसन्द आया है… रोहित चाहता है कि तुम्हारा प्रोमोशन हो और वेतन सात से बढ़ा कर बारह हज़ार कर दिया जाये।”

“आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर… मैं हमेशा आपकी आभारी रहूंगी सर…!” मैंने खुश हो कर अंकित से हाथ मिलाते हुए कहा।

“आप तो खुश हो गई ना … अब हमें भी खुश कर दो…” अंकित मुस्करा कर बोला…और मेरा हाथ दबा दिया।

“जी…अभी पार्टी की तैयारी करती हूँ…” मैंने भी उनका हाथ दबाते हुए कहा।

‘तो पहले बाबा को कॉफ़ी के लिये कहो…और मेरे निजी कमरे में आ जाओ…” अंकित ने आज्ञा देते हुए कहा। और उठ कर अपनी आराम करने के कमरे में चले गये… कुछ ही देर में बाबा कॉफ़ी ले आया… हम तीनो कॉफ़ी पीने लगे… रोहित कॉफ़ी पी कर चला गया।

“देविका… देखो प्रोमोशन को सेलेब्रेट करना चाहिये… मेरे पास आ जाओ…!”
“जी… पास क्या…कहां…” मैं थोड़ा सा हिचक गई।
“यहा…मेरे पास… सोफ़े पर…”
“जी…”

मैं जैसे ही सोफ़े पर बैठने को हुई… अंकित ने मुझे खींच कर अपनी गोदी में बैठा लिया।

“यहाँ पर…आओ…” उसके अचानक इस हमले को मैं समझ नहीं पाई… मैंने देखा कि वहां कोई नहीं था… तो मैंने गोदी में बैठे रहना ही उचित समझा।
“सर…कोई देख लेगा…”मैं शर्माते हुए और उठते हुए बोली।
“देविका डरो मत… यहां कोई नहीं आयेगा… फिर मैं तुम्हें सच बताऊँ तो तुम मुझे बहुत ही अच्छी लगने लगी हो…”

“जी…आप ये क्या कह रहे हैं? मैं एक साधारण परिवार से हूँ और आप …” मैंने अपनी मजबूरी दिखाई पर मन ही मन में मेरे लड्डू फ़ूट रहे थे… कि अंकित ने लिफ़्ट तो दी… मैं उसकी गोदी से उठने की नाकाम कोशिश करती रही।

“देविका…कुछ मत कहो… बस प्यार की बातें करो… तुम्हारी अदाएँ मुझे तुम्हारी तरफ़ खींचती हैं…” उसने अपनी गोदी में मुझे जकड़ते हुए कहा।

मेरे चूतड़ो के स्पर्श से उसका लण्ड खड़ा होने लगा था। लण्ड का कड़ापन का मुझे नीचे अहसास होने लगा था।

“सर… सच आप मुझसे प्यार करते हैं…” मुझे पता था कि ये तो मुझे चोदने का एक बहाना है… फिर भी मैंने भी अंकित की तरह ही बोलना शुरु कर दिया।

“हां …सच देविका…तुम्हारा ये सेक्सी जिस्म … तुम्हारे ये उभार लिये हुए सीना … तुम्हारी कमर और ये मांसल जांघें… मुझे दीवाना बना देता है…देखो मेरा नीचे क्या हाल है…”
“हाय अंकित … आप कितने अच्छे हैं…”मैं भी अपना चेहरा उनके चेहरे के पास ले आई।

उसने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिये… उसके

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