लेखिका : अनुष्का
उस दिन अज्जु ने मुझे एक नये अनुभव का सुख दिया। मैं बहुत खुश हो गई और तभी मैंने अज्जु को बताया कि मैं अपनी एक सहेली के साथ समलैंगिक हूँ।

अज्जु ने कहा कि कल अपनी उस सहेली को भी बुला लेना! तीनों मिल कर मस्ती करेंगे।

अगले दिन मैंने अपनी सहेली रिन्नी को फ़ोन करके बताया कि मेरी ननद का लड़का आया हुआ है और जब मैंने उसे तेरे बारे में बताया तो वो तुझसे मिलने को आतुर है।

रिन्नी ने कहा- तूने क्या क्या बताया मेरे बारे में जो वो मुझसे मिलना चाहता है?

कुछ खास नहीं! बस तेरी तस्वीर दिखाई थी और बताया तेरे रूप, फ़ीगर के बारे में!

अच्छा? और अपना क्या दिखाया उसे?

अरे कुछ नहीं! मुझ से तो काफ़ी छोटा है। तेरे काम आ सकता है और जब मैंने देखा कि उसकी नज़र मेरे बदन पर है तो मेरी चूत में कुछ होने लगा मगर रिश्ते का ख्याल आ गया। मैं तो उससे मजे नहीं ले सकती पर तेरा काम बन सकता है, तू आ जा मेरे घर!

आज तो नहीं आ सकती! फ़िर भी बात तो करवा फ़ोन पर!

आगे की कहानी रिन्नी की जुबानी :

अमुधा ने अज्जू को फ़ोन दिया और हम दोनों बातें करने लगे।

अज्जू मेरे बारे में सब पूछने लगा।

मैंने उसे बताया कि मेरा नाम रिन्नी है, 26 साल की हूँ और सेना अधिकारी की बेटी हूँ।
मेरे मम्मी पापा ने मुझे पूरी आजादी दी थी। मैंने अच्छे पढ़ाई नहीं की और कुछ बन ना सकी।

पढ़ाई में मेरा ध्यान ही नहीं गया। मैं मेरे दोस्तों के साथ घूमना-फिरना ज्यादा करती थी।

बहुत छोटी उम्र में ही मुझे सेक्स का शौक ज्यादा था। सेक्स में मैं सब कर चुकी हूँ। मुझे अपने चुचूक मसलना अच्छा लगता है, अगर कोई नहीं मिले तो मैं खुद करने लगती हूँ।

करते-करते यह आदत पड़ गई। अब मैं दूसरों का इंतज़ार नहीं करती। मैं एक पत्रकार बनी, इसी सिलसिले में पूरा दुनिया घूम आई हूँ, बहुत सी भाषाएँ जानती हूँ।

मगर मुझे इंडिया बहुत पसंद है, इसके साथ-साथ स्वच्छंदता भी! खेल खेल में मैं सेक्स फोन में काम करने लगी, यह मुझे पसंद आया और इसी में हूँ। यहीं से मैंने बहुत लोगों की ज़िन्दगी बेहतरीन बनाई है, लोगों को खुशी बाँटना मेरा काम है।

इस दुःख भरी ज़िन्दगी में हम जैसे लोग बहुत कम हैं।

मैंने अज्जू को बताया कि फ़ोन सेक्स में आने से पहले मैंने फ़िल्मों में भी काम किया है और उसे एक आपबीती भी बताई।

किसी ने मुझे सुझाव दिया कि मैं इतनी सुंदर हूँ कि मैं एक शीर्ष नायिका बन सकती हूँ। मैं नायिका बनने के प्रलोभन को ना छोड़ सकी और बड़ी और मशहूर नायिका बनने के सपनों के साथ बंबई आ गई।

काफ़ी संघर्ष के बाद मुझे एक लाख के अग्रिम भुगतान के साथ एक फिल्म में एक अग्रणी भूमिका मिली।

शूटिंग के पहले दिन ही मुझे शयन कक्ष में प्रणय-दृश्य के साथ गीत गाना था। इसके लिए मुझे जो वस्त्र दिए गए उन्हें देख कर मैंने निर्देशक से कहा- मैं यह पोशाक नहीं पहन सकती, स्कर्ट इतनी छोटी है और टॉप का गला इतना गहरा है कि इसमें छुपेगा क्या!

निर्देशक ने कहा- नहीं, हमारे समझौते के अनुसार तुमने यही पोशाक पहननी है और समझौते में किसी भी उल्लंघन पर तुम्हें पूरा अग्रिम और उसके साथ 20% जुर्माना देना होगा। तो जाओ और कपड़े पहन कर आओ! जल्दी करो! हम पहले से ही निर्धारित समय से पीछे चल रहे हैं!

मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। यह मेरी पहली फ़िल्म थी और लगभग एक वर्ष के संघर्ष के बाद मुझे किसी फ़िल्म में अग्रणी अभिनेत्री की भूमिका मिली थी।

तो चुपचाप मैं पोशाक पहनने दूसरे कमरे में चली गई और पोशाक एक बार फिर से देखी- स्कर्ट मुश्किल से लंबाई में 12 इंच और इतनी तंग और पारदर्शी थी कि यह मेरी जांघों के साथ साथ मेरी पैंटी भी साफ़ देखी जा सकती थी और टॉप के नाम पर केवल दो धागे पीठ पर बांधने के लिए और आगे एक रूमाल जितना कपड़ा था जिसे पहन कर मेरे तीन चौथाई वक्ष दिख रहे थे।

जब मैं सेट पर पहुँची तो सभी आँखें वासना के साथ मुझे घूर रही थी। वहाँ सेट पर लगभग सात लड़के और एक निर्देशक सहित आठ पुरुष थे और मैं अकेली लड़की थी।

जल्द ही निर्देशक ने नायक को बुलाया आया तो वह मुझे देख कर काफ़ी उत्साहित हो गया और बारीकी से मेरा और मेरे बदन का मुआयना करने लगा।

शूटिंग शुरु हुई, गीत की शूटिं के दौरान हम दोनों ने एक दूसरे को असंख्य बार चूमा और कई मौकों पर नायक ने मेरे वक्ष के शीर्ष पर भी चूमा।

लेकिन सबसे बड़ी समस्या खुद निर्देशक था, शुरू से ही मुझ पर उसकी नज़र थी और जब भी अवसर आया उसने इसका पूरा फायदा उठाया मेरे शरीर को छू करके!

वह एक मोटे पेट वाला कम से कम 100 किलोग्राम वजन का आदमी था, वह लगभग गंजा था, उम्र लगभग 50 साल थी। मैं सच में उससे चिढ़ रही थी लेकिन मुझे उसके साथ सहयोग करना था अन्यथा वह मेरे कैरियर को खराब कर सकता था।

हम एक प्रेम गीत की शूटिंग कर रहे थे जिसमें मैंने नायक के साथ नृत्य और गीत के दौरान बिस्तर पर प्रणय-दृश्य भी करने थे।

‘कट!’ निर्देशक नायक पर चिल्लाया,’ तुम अपनी बहन को पकड़ रहे हो या अपनी प्रेमिका को?’

निर्देशक ने कहा,’मैं तुम्हें दिखाता हूँ कि यह कैसे करना होगा!’

वह कुटिल मुस्कान से मेरे पास आया और मुझे इतना कसकर गले लगा लिया कि मेरे दम घुटने लगे थे, उसके दोनों हाथ मेरे नितंबों पर थे और वह उन्हें दबा रहा था।

मैं उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान देख रही थी लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था और वो अपना काम करता रहा।

निर्देशक ने मेरे होंठों पर चूमा और अपने दोनों हाथ पीछे से मेरी स्कर्ट में घुसा दिए और मेरे कूल्हे पूरे जोर से मसल दिए।

मेरे मुख से आह निकल गई।

‘यह दृश्य ऐसे करना है!’ निर्देशक ने नायक को समझाते हुए कहा,’गीत की इस लाइन के बाद तुम इसे बिस्तर पर ले जाओगे जहाँ हम प्रणय-दृश्य की शूटिंग करेंगे।’

फ़िर मेरी तरफ़ मुखातिब होते हुए कहा,’तुम्हारे चेहरे पर परमानंद और इसके चेहरे पर प्यार करने की इच्छा झलकनी चाहिए!’

इसके बाद नायक बहुत बोल्ड हो गया और उसने मेरे पूरे चेहरे पर चुंबन शुरू कर दिया और मेरे नितंबों को सहलाना शुरू कर दिया। फिर उसने मुझे धीरे से अपनी बाहों में उठाया और बिस्तर पर ले गया।
बाहों में उठाते समय उसने स्पष्ट रूप से मेरे एक स्तन को अपने एक हाथ से दबा रखा था।

बिस्तर पर सम्भोग-दृश्य के लिए सैट तैयार किया जा रहा था तो मैं निर्देशक के पास गई और उसे बताया कि मैं इतने सारे लोगों के सामने यह दृश्य नहीं कर पाऊँगी।

मैंने उससे कहा कि अगर वह केवल जरूरत के लोगों को जैसे वो खुद, नायक, कैमरामैन और एक आदमी रोशनी के लिए रख कर बाकी को इस सैट से दूर रखे तो मैं ज्यादा सहज अभिनय कर पाऊँगी।

उसने एक मिनट के लिए सोचा, सहमति व्यक्त की और अन्य लोगों को बाहर जाने को कहा।

जिन लोगों को दूर जाने को कहा गया, उनके चेहरे पर मैं हताशा और गुस्से को देख रही थी जैसे शेर के मुँह से शिकार छीन लिया गया हो!

जैसे ही निर्देशक ने कहा- एक्शन!

नायक बिस्तर पर मुझ पर छा गया, उसने मुझे गालों, होंठों पर चूमा और फ़िर और मेरी चूचियों के नग्न भाग को चूमने-चाटने लगा।

इसक बाद तो उसने स्पषटतः मेरे वक्ष दबाने शुरू कर दिए और मेरे पैर फैला कर मेरी जांघों के बीच आ गया।

मेरी स्कर्ट पहले से ही मेरी कमर तक पहुँच गई थी, मैं चौंक गई जब उसने एक हाथ से अपनी पैंट की ज़िप खोली।

अपने अपना लिंग अपने हाथ में लिया और मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी योनि पर रगड़ने लगा। मैं एकदम से उसे धक्का देकर बिस्तर से नीचे कूद गई और उस पर चिल्लाई।

उस नायक ने मुझे बताया कि वह वही कर रहा है जो उसे कहा गया है निर्देशक द्वारा!

जब मैंने निर्देशक से पूछा, उसने मुझे बताया कि वे केवल हमारे शरीर के ऊपर के हिस्से की शूटिंग कर रहे हैं, और यह यौन-क्रिया सिर्फ़ चेहरे पर प्यार और उत्साह की असली अभिव्यक्ति लाने के लिए है और यह जरूरी है कि ऐसा किया जाए।

जब मैंने इस तरह दृश्य करने से इनकार कर दिया तो उसने फिर से मुझे अनुबंध की याद दिला दी और यहाँ तक ​​कि मुझे धमकी दी कि मुझे सारे पैसे और जुर्माना देना होगा और यह बात फ़ैला देगा कि मैं फ़िल्म निर्माण में अड़चनें पैदा करती हूँ।

उसके ऐसा करने से मुझे कौन फ़िल्मों में काम देता।

मैं डर कर चुपचाप बिस्तर पर वापस चली गई।

जैसे ही पुनः शूटिंग शुरु हुई, नायक मुझे फ़िर मुझे जहाँ तहाँ चूमने लगा। उसने मेरी कमर तक मेरी स्कर्ट को उठाया और फिर से मेरी जांघों के भीतर की ओर पर अपने हाथ फ़िराने लगा। कुछ ही क्षणों के बाद वह अपने हाथ मेरी पैंटी पर लाया और एक तरफ से हाथ अन्दर सरका दिया।

मैंने आपत्ति के लिए निर्देशक को देखा, उसने चुपचाप सिर हिलाया और दृश्य जारी रखने को कहा, निर्देशक ने कहा कि वे केवल शरीर के ऊपरी भाग की शूटिंग कर रहे हैं।

अब तक नायक मेरी पैंटी की बगल से ही मेरी योनि में एक पिस्टन की तरह अपने लिंग को प्रवेश करा चुका था। मजा तो मुझे बहुत आ रहा था पर मुझे यकीन था कि सेंसर से इस दृश्य की अनुमति नहीं होगी।

उसका लिंग मेरी चूत में था और इतना अच्छा लग रहा है कि मैं उसके साथ नीचे से अपने कूल्हों को उचका कर उसे अपने अन्दर समा लेने की कोशिश करने लगी। लेकिन पैंटी के कारण बहुत परेशानी हो रही थी।

मैंने नायक को अपने ऊपर से पल भर के लिए हटने को कहा और अपनी पैंटी उतारने लगी। इतनी देर में निर्देशक ने आगे बढ़ कर मेरे टॉप की डोरी खींच दी और वो भी मेरे बदन से अलग हो गया।

नायक मेरे ऊपर आया और उसने अपने होंठ मेरे चुचूक पर रख दिए।

तभी निर्देशक के आदेश पर लाइट वाले लड़के ने नायक की पैंट उसकी टांगों से अलग कर दी। निर्देशक के आदेश पर ही मैंने नायक का अन्डरवीयर उतार फ़ेंका और उसके लिंग को अपनी कोमल ऊँगलियों से पकड़ कर अपने योनि-द्वार पर रख लिया।

पहले ही झटके में पूरा…

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