प्रेषिका : अनुष्का
एक ही वक्त में दो लड़कियों के साथ मज़े करना चाहते हैं? अरे वाह! क्योंकि मैं ऐसा ही मर्द खोज रही हूँ जिसे मैं अपने घर ले जाऊँ और उससे अपने आपको और अपनी सहेली को एक साथ चुदवा सकूँ।

मेरा नाम अनुष्का है, मैं 32 साल की हूँ, मेरे पति टूर पर ज्यादा रहते हैं इसलिये मैं सेक्स के लिये परेशान रहती हूँ।

इस समस्या के हल के लिए मैंने अपनी एक सहेली बना रखी है जो मेरे पति के टूर पर जाने पर मेरे साथ ही रहती है।
उसके साथ मैं दिन-रात खूब मस्ती करती हूँ।

मुझे लगता है कि आप समझेंगे कि मैं समलैंगिक हूँ। लेकिन वास्तव में मैं द्विलैंगिक हूँ, यानि लड़कियाँ और मर्द मुझे दोनों उतने ही पसंद हैं।
क्योंकि अक्सर मुझे अपनी फ़ड़कती चूत को शान्त करने के लिए उसके अन्दर मोटे लण्ड लेने ही पड़ते हैं।

लेकिन मैं चाहती हूँ कि वो भाग्यशाली मर्द मुझे अपनी चुदक्कड़ सहेली के साथ मज़े करते, एक दूसरे की फ़ुद्दियों को चाटते-खाते और बिस्तर में उछल कूद करते देखे।
उस मर्द में हम दोनों को एक ही वक्त में संतुष्ट करने की शक्ति होनी चाहिए।

मैं आपको अपना एक अनुभव बताती हूँ।

दो साल पुरानी घटना है मेरी ननद का लड़का अज्जु जिसकी उमर 18-19 साल थी वार्षिक परीक्षा देने के लिये हमारे घर आया।

घर में सिर्फ़ दो कमरे हैं जिस कारण अज्जु से मुझे चिड़ हो रही थी कि इसकी वजह से मेरे जीवन का आनंद जा रहा है।

उस दिन पति का दफ़्तर से फ़ोन आया कि वो रात की ट्रेन से सात दिन के लिये बाहर जाने वाले हैं।

पति ने बोला- दोपहर को मैं आ जाऊँगा, तब अज्जु कॉलेज में होगा और बच्चों को सुला देंगे! फिर प्यार से सेक्स करेंगे क्योंकि फ़िर सात दिन साथ नहीं मिलेगा।

एक बार तो मैंने सोचा कि अपनी सहेली को बुला लूंगी और फ़िर सात दिन और सात रात मस्ती करेंगी दोनों मिल कर! लेकिन फ़िर वही अज्जु आड़े आ गया, उसके होते ऐसा कुछ करने में खतरा था।

फ़िर भी मैं बहुत खुश थी कि दोपहर को चुदाई का भरपूर मज़ा लूंगी। मैंने नहाने से पहले अपनी योनि के बाल शेव किए, बहुत सुन्दर सेक्सी अंडर गारमेंट्स और साड़ी पहनी!

लेकिन मेरी किस्मत खराब, पहले तो पति लेट हो गये और जैसे ही वह आये, पीछे से अज्जु भी आ गया। मेरा दिमाग खराब हो गया, मैं फालतू में अज्जु को डाँटने लगी।

पति भी मुझ पर नाराज़ हो गये, कहने लगे- पूरा जीवन पड़ा है, क्यों परेशान हो?

फिर मैं मन मार कर उनके जाने की तैयारी करने लगी। बारिश के दिन थे, पानी गिरने लगा।

पति की ट्रेन दस बजे रात की थी, मैंने जल्दी से सबको खाना खिला दिया, नौ बजे दे करीब पति अंदर रसोई में आये, मुझे पीछे से पकड़कर चूमा-चाटी करने लगे, उनका हथियार अपने नितम्बों पर महसूस करके बहुत उत्तेजित हो गई।

मैंने पति को बताया कि आज की तैयारी में मैंने क्या-क्या किया था। पति ने साड़ी के अंदर मेरी पैंटी में हाथ डालकर मेरी चिकनी चूत सहलाई।
मैंने उनके हथियार को हाथों से सहलाया।
मेरी चूत चुदाई के लिये तैयार हो गई थी, गीली होने लगी।

इतने में अज्जु ने आवाज़ दी- मामा, ट्रेन का समय हो गया! चलो!

फिर अज्जु उन्हें स्कूटर से स्टेशन छोड़ने चला गया, मैं हाल में लेटकर टीवी देखने लगी।

मैं बहुत गरम महसूस कर रही थी और मुझे अपनी किस्मत पर भी रोना आ रहा था। मैं उत्तेजना से भरकर अपनी साड़ी में हाथ डालकर अपनी बुर को सहलाने लगी।

इतने में स्कूटर की आवाज आई तो मैंने अपने कपड़े सही किये और दरवाज़ा खोला। अज्जु भीग कर आया था।

मैंने उसे गुस्से से बोला- जल्दी बदन पौंछ कर कपड़े बदल ले, वरना तबियत खराब हो गई तो हमारी ही मुसीबत होगी।

वो सहम गया। मैं अंदर कमरे में चली गई, दरवाज़ा बंद करने मुड़ी तो देखा- अज्जु अपनी गीली बनियान उतार रहा था उसकी नंगी पीठ देखकर मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ और मैं हाल में आ गई और कुछ ढूंढने का नाटक करते हुए तिरछी नज़र से उसे देखने लगी।

फिर उसने अपनी पैंट उतारी, उसकी अंडरवीयर सफेद थी जो गीली होने से अज्जु के शरीर से चिपक गई थी।

मैंने देखा कि अज्जु का काला लंड मुड़ा हुआ साफ़ दिख रहा था, वह भरपूर मोटा था जबकि खड़ा नहीं था, काले-काले बाल भी नज़र आ रहे थे और उसके लंड का गुलाबी सुपाड़ा तो एकदम चमक रहा था।

वह मुझे भरपूर मर्द का जवान लंड दिख रहा था जिसे हर कोई औरत अपनी चूत में डलवाना चाहेगी, चाहे वह सती-सावित्री क्यों न हो।

जवान लड़के को अपने इतने करीब नंगा देखकर मेरी हालत बहुत खराब हो गई और मैं सपने में भी नहीं सोच सकी कि अज्जु इतना जवान है। उसके शरीर को देखकर मैं रिश्ते को भूल गई। मैंने सोचा कि आज रात को ही इसका मज़ा लेना है, जो होगा देखा जायेगा!

फिर अज्जु ने कपड़े पहन लिये और बिस्तर पर लेट गया। मैं अपने कमरे में आ गई और अपनी साड़ी, ब्लाउज़ ब्रा और पेटीकोट उतार कर नाइटी पहन ली।

हमारा बाथरूम पीछे आंगन में था। रात के करीब 11 बज रहे थे, मैंने अज्जु को आवाज़ दी।

वह बोला- जी मामी?

मैंने कहा- मुझे पीछे पेशाब जाना है, डर लग रहा है, तू साथ चल!

मैंने पीछे की लाइट जलाई और बाथरूम के बाहर नाली के पास जाकर अपनी नाइटी उठाई कमर के ऊपर और धीरे से अपनी पैंटी सरकाई ताकि अज्जु मेरी चिकनी टांगें और गांड आराम से देख सके और बैठ गई।

अज्जु मेरे पीछे ही खड़ा था, मैंने पीछे देखते हुए बोला- जाना मत!
वह बोला- जी मामी!

फिर मैं अज्जु की मुँह की तरफ़ होकर खड़ी हुई, फिर मैंने अपनी नाइटी कमर से ऊपर उठा कर पैंटी पहनी ताकि अज्जु को मेरी साफ़ चूत दिख जाये और वह भी बहक जाये। अज्जु की आँखों में शर्म थी लेकिन वह मेरी चूत और नंगी जांघों को देख रहा था।

लेकिन वह वापस जाकर सो गया मैं अपने कमरे में आ गई और सोचा अज्जु को आवाज देकर अपने पास बुलाऊँ! लेकिन डर लग रहा था कि कहीं कुछ गलत तो नहीं हो रहा है? लेकिन मेरी सांस तेज़-तेज़ चल रही थी और मेरी चूत चिल्ला कर कह रही थी कि उसे लंड चाहिये।

मेरी हालत पागलों जैसी हो गई, मैं उठ कर बैठ गई, अज्जु के कमरे की लाइट जल रही थी। मैंने धीरे से उठ कर अज्जु के कमरे में झांका, वह उल्टा होकर सो रहा था। फ़िर मेरा हाथ अपनेआप अपनी चूत पर जा रहा था, समझ नहीं आ रहा था कि कैसे शुरुआत करूं।

तभी मैंने महसूस किया कि अज्जु कुछ हिल रहा है, जैसे आदमी औरत के ऊपर होकर हिलता है वैसे! मुझे समझते देर नहीं लगी कि वह मेरी नंगी जांघों और चिकनी चूत को देखकर उत्तेजित हो गया है और अपना पानी निकालने की तैयारी में है।

मैं समय गंवाये बिना अज्जु के कमरे में चली गई, मैंने देखा अज्जु ने धीरे से अपनी आँखें खोल कर मुझे देखा और सोने का नाटक करने लगा।

मैं कुरसी पर बैठ गई। मैंने सोचा कि देखूँ अब अज्जु हिलता है या नहीं? यदि हिलेगा तो उससे खुल कर चुदवाने का बोल दूंगी। लेकिन दस-बारह मिनट में साला बिल्कुल नहीं हिला और मेरी हालत खराब हुये जा रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं?

रात का करीब एक बज गया था, फ़िर मैंने टीवी ओन कर दिया और देखने लगी। तभी अज्जु आँखें मलते हुए उठ कर बैठ गया, कहने लगा- क्या हुआ मामी? सो क्यों नहीं रही हो?

मैंने बोला- नींद नहीं आ रही। दुख रहा है!

अज्जु ने कहा- क्या सर दुख रहा है?
मैंने कहा- नहीं पूरा शरीर दुख रहा है।
अज्जु ने कहा- तबियत तो ठीक है?

मैंने कहा- हाँ!
अज्जु बोला- मैं कुछ मदद करूँ?

मैंने कहा- प्लीज मेरे पैर दबा दे।
अज्जु ने कहा- ठीक है!

मैं अज्जु के बिस्तर पर लेट गई, अज्जु मेरे पैर दबाने लगा। मैंने कहा- प्लीज थोड़ा ऊपर और ऊपर!

अज्जु बिस्तर पर बैठकर मेरी जांघें दबा रहा था, मेरी चूत से रस निकल रहा था, मुझे अपनी पैंटी गीली-गीली महसूस हो रही थी।

तभी मुझे महसूस हुआ अज्जु मेरी चूत को नाइटी के ऊपर से स्पर्श कर रहा था और चूत के ऊपर अपनी ऊँगलियाँ चला रहा था मेरी सांस बहुत तेज़-तेज़ चलने लगी। मैंने अपना एक हाथ अज्जु के लंड पर रख दिया। उसका आठ इंच का लंड पूरी तरह खड़ा था, बहुत मोटा महसूस हो रहा था।

तभी अज्जु बोला- मेरा लंड कैसा लगा मामी जी!!
मैंने कहा- मुझे आज यही चाहिये!

तभी अज्जु मेरी बगल में आ गया और मेरे वक्ष को सहलाने लगा।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मैंने अपने एक हाथ से उसका लंड सहलाना जारी रखा और साथ ही मैं उसकी गांड भी सहला रही थी।
उसकी हिम्मत और बढ़ गई और वो मेरे चूचों को जोर-जोर से दबाने लगा।

मुझे सिहरन होने लगी और मैं करवट बदल कर सीधी सो गई तो उसने हाथ हटा लिया और थोड़ी देर बाद वो फ़िर से मेरे स्तन सहलाने लगा।
फ़िर उसने मेरी नाइटी उतार दी और मेरे नग्न चूचे चूसने लगा।

मैं बहुत ही गर्म हो रही थी, मैंने उसे कपड़े उतारने को कहा।

उसने तुरंत अपने सारे कपड़े निकाल दिये और पूरा नंगा हो गया। मैंने उसके लंड को देखा, वो बहुत ही बड़ा था।

फ़िर उसने मेरी पैंटी निकाल दी और मुझे चूमने लगा, मैं भी उसे चूमने लगी।
उसने मुझे मेरे पेट पर चूमा।

आआअह्हह ऊओह्हह! मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं बहुत तड़प रही थी।

फ़िर वो मेरे चूत को चाटने लगा और मैं सिसकारने लगी- ऊऊऊफ़्फ़!

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, मैंने उसे कहा- प्लीज और मत तड़पाओ, प्लीज मुझे चोदो।

फ़िर वो मेरे ऊपर आ गया और उसने उसके लंड को मेरी चूत पर रखा और फ़िर धक्का मारा तो उसका पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया और मैं जोर से चीख उठी- आआअह्ह्ह आआह्हह।

फ़िर वो जोर-जोर से मुझे चोदने लगा और मैं भी अपने चूतड़ उठा-उठा कर उसका साथ देने लगी।

उसने मुझे एक नये अनुभव का सुख दिया। मैं बहुत खुश हो गई और तभी मैंने अज्जु को बताया कि मैं अपनी एक सहेली के साथ समलैंगिक हूँ।

अज्जु ने कहा कि कल अपनी उस सहेली को भी बुला लेना! तीनों मिल कर मस्ती करेंगे।

अगले दिन क्या हुआ वो फ़िर कभी!

जब अज्जु अपने घर चला गया तो भी हर रोज उसका फ़ोन मेरा पास आता रहा और मैं इसे फ़ोन पर ही गर्मागर्म बातें करके संतुष्ट करती रही।

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