आप सभी के संदेश मिले, पढ़ कर बहुत खुशी हुई! कुछ संदेश लड़कियों के भी मिले अच्छा लगा लेकिन वो कोई उम्मीद न करें हमसे!
चलो मैं आगे की कहानी सुनाता हूँ! हम काफी घुलमिल गए थे ट्रेन में ही और मुझे तो सिर्फ उसे देखने का मन कर रहा था, क्या बताऊँ यार! क्या बला थी!

बात-बात में मैंने उससे मोबाइल नंबर ले लिया! उसके पापा आर्मी में हैं, छोटा भाई है! उसने वारंगल जाना था। इस बीच मैंने उसके कई बार हाथ पकड़ लिया वो अनदेखा कर रही थी, शायद शरमा रही थी!

मैंने उसे कहा- मुझे पुरी घूमना है तुम मेरे साथ चलोगी?
वो कुछ नहीं बोली।
मैं चुप होकर बैठ गया।
थोड़ी देर बाद उसने खुद बोला- मैं चलूंगी! लेकिन पापा कहेंगे तब!
मैंने पूछा- तुम्हारे पापा मेरे साथ जाने देंगे?
उसने बोला- मैं कह दूँगी कि कॉलेज के दोस्त के साथ जा रही हूँ!

मैं मन ही मन खुश हो गया। अभी तक मेरे मन में उसको लेकर गंदे ख्याल नहीं थे! मैं उसे चूमना चाहता था, प्रगाढ़ चुम्बन करना चाहता था, लेकिन सेक्स नहीं!
डर था कि कहीं मेरा फूल मुर्झा न जाये!
फिर स्टेशन आ गया, वो चली गई।
लेकिन उसके जाने से पहले मैंने उससे बोला- मैं कॉल कर के बताऊँगा!

हैदराबाद पहुँचने के बाद मैं दिन भर व्यस्त रहता था और रात को 2-3 घंटे अनु (बदला हुआ नाम) से बात होती थी।
बहुत मजा आता था!
कभी कभी वो खुद बोलती थी कि तुम मेरे साथ सेक्स पर बात करो!
मैं भी शुरु हो जाता था!

करीब एक महीने बाद मैंने पुरी जाने की सोची और उसे बताया। वो घर वालों को बता कर तैयार हो गई। वहाँ पहुँच कर हमने होटल बुक किया और सुबह घूमने जाने की योजना बनाई।

कमरे में पहुँचने के बाद हम दोनों प्रसन्नचित्त थे। वो चली गई बाथरूम में फ्रेश होने, मैं कुर्सी पर बैठ कर टीवी देखने लगा।
थोड़ी देर बाद वो बाहर निकली, मैंने उसे देखा, क्या लग रही थी! खुले बाल! मन कर रहा था पकड़ कर चूम लूँ!
वो घूम कर आइने में देख कर बाल संवारने लगी!

मेरे मन का शैतान जागने लगा। उसने घुटने तक लम्बा गाउन पहना था। मेरी नजर नीचे गई, क्या मस्त गांड लग रही थी फूली-फूली! उसकी गांड मसलने को मन कर रहा था मेरा!

मन कर रहा था कि यहीं पटक कर लंड घुसा के चोद दूँ! मैं अपने ऊपर काबू नहीं कर पा रहा था!

क्या करूँ!

मैं धीरे से उसके पास गया और उसके पीछे खड़ा हो गया, वो अचानक पीछे हुई और डर गई, उसने बोला- क्या कर रहे थे?

मेरी सांसें बहुत तेज़ थी, मैं बोला- तुम ज़ल्दी जाओ यहाँ से! वरना कुछ बचेगा नहीं, मैं आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो रहा हूँ!
उसने कहा- तुम कुछ नहीं कर पाओगे!

उसके इतना कहते ही मैंने उसे बिस्तर पर धकेल दिया, वो उल्टा गिरी ,मैं उस पर लेट गया। गाऊन ऊपर किया तो देखा कि उसने चड्डी नहीं पहनी थी। उसने मैंने उसकी गांड हाथो से खींच कर लंड डालने की कोशिश की!
वो चिल्लाई- मत करो प्लीज़!

पर अब तो मैं जोर से खींच कर गांड में लंड डाल दिया। अभी आधा ही लंड डाला था कि वो छटपटाने लगी, रोने लगी और कहने लगी- मत करो! मत करो!
मैं थोड़ी देर शांत रहा। इसी बीच उसको गर्म रखने के लिए उसकी चूची दबाये जा रहा था। क्या मुलायम थी उसकी चूचियाँ! वाह!
कभी उसकी चूत में उंगली कर देता।

लगभग दस मिनट बाद मैंने फिर से उसकी गाण्ड में लंड हिलाना शुरु किया तो फिर बोली- रहने दो! आगे से करो प्लीज़!

लेकिन मैंने एक और झटका मारा और सारा लंड गांड के अंदर घुसा दिया। मैं फिर शांत हो गया! थोड़ी देर बाद आगे-पीछे करना शुरू किया! मैं इतना गर्म हो गया था कि उसकी गांड को बहुत मसल रहा था कहीं चूत में उंगली कर रहा था तो कभी उसकी चूची मसल रहा था!

थोड़े देर बाद ही मैं पूरी तरह से झर गया, उसकी गाण्ड से मेरा रस निकल रहा था। मैं बगल में लेट गया लेकिन मेरा हाथ उसकी गांड पर ही था, बहुत चिकनी थी उसकी गाण्ड! थोड़ी देर बाद वो उठ कर आँसू पौंछने लगी और बाल सही करने लगी।

मैं नंगा ही था, उससे सॉरी बोला तो उसने घूर के मुझको देखा और मेरा लंड देखा!

उसने बोला- सारा खाना इसी को खिलाया है क्या! इतना बड़ा करने की क्या जरूरत थी इसे और वो भी पीछे डालने के लिए?

मेरा लंड फिर तन चुका था, मैंने झट से उसका चेहरा अपने हाथों में पकड़ा और चुम्बन करने लगा। 15 मिनट बाद मैंने उसके बाकी कपड़े उतार दिए। फिर मैं उसकी चूची पर टूट पड़ा, खूब चूसा जैसे पता नहीं कितना भूखा हूँ मैं!

उसकी बुर को जब मैंने देखा तो देखता रह गया, क्या लग रही थी, मन कर रहा था कि खा जाऊँ! उसकी चूत अभी शायद कुंवारी ही थी, शायद वो पहले लड़की होगी जिसकी सील गांड के सील की बाद टूटेगी।

मैंने उसकी चूत चाटना चालू किया, हम 69 हो गए! थोड़ी देर बाद वो झर गई। मैं सब चाट गया, वो मेरा लंड चूस रही थी, मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था, मैंने कहा- रुको!

मैंने लंड उसके मुँह से निकाला, वो समझी मैं शायद झर गया।

लेकिन मैं उसकी गांड के नीचे तकिया रख कर उसकी योनि में लंड डालने की कोशिश करने लगा तो वो बोली- धीरे से करना!

मैंने झटका मारा पर फिसल गया! मैंने फिर कोशिश की, हाथ से पकड़ कर और डाल दिया उसके अन्दर!
क्या आनन्द आ रहा था! दोनों हाथ में चूची, लंड चूत में!

इसी बीच उसने पूछा- तुमने चूत की जगह मेरी गांड क्यों मारी पहले?
मैंने कहा- जब मैं कॉलेज़ में पढ़ रहा था, तब मेरे दोस्त ने मुझे एक सेक्स-खिलौना गिफ्ट किया था उसमें गांड और बुर दोनों था! पर जब मैंने उस खिलौने की गांड मारी तो मुझे बहुत मजा आया! न कि चूत से! क्योंकि शायद उस चूत की बनावट सही नहीं थी। लेकिन अब समझ आ गया कि चूत का अलग ही रस है! दूसरी बात लड़कियों की गांड और चूची मुझे बहुत उत्तेजित करते हैं!

चुदाई करते करते हम सो गए। बीच रात मेरी नींद खुली, वो सो रही थी, वो भी अपनी गांड मेरी तरफ करके!

मेरा फिर से खड़ा हो गया और मैंने वियाग्रा की गोली खाई, थोड़ी देर बाद मैं उसकी गांड में उंगली करने लगा। उसके पीठ से लेकर पैर चाटने लगा। मैंने क्या नहीं चाटा- उसके पैर, गांड, चूची, उसकी बुर सब कुछ! मेरे मुँह में 10 मिनट बाद वो झर गई।

फिर उसको उल्टा करके उसकी बुर के नीचे तकिया रख दिया और गांड में वैसलीन लगाई। उसकी गाण्ड मुझे इतनी प्यारी लगी कि मैंने चूचियों की तरह उसकी गांड दबाई। फिर अंत में लंड घुसा कर चोदना चालू कर दिया! 20 मिनट बाद मैं उसको सीधा करके उसकी चूत में अपना लंड डाल कर चुदाई की!

अगले दिन वो चल नहीं पा रही थी!

जिनके पास लंड है उनसे अनुरोध है वो जाकर वेश्यालय में अपने लंड की गर्मी उतारे न कि सड़क चलती किसी की अमानत पर! जो लड़की यह चाहती हो वो बात अलग है! पर फिर भी देश को सुधारें न कि गन्दगी फ़ैलाएँ!

यह कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है! इसे असलियत ना समझें!

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