प्रथम भागदोस्ती करा दो-1 से आगे…

… कोमल को बेड पर लेटा कर उसके पैंटी को उतार दिया। उसकी बिना बाल वाली चिकनी चूत को देखकर मैं बेकाबू हो गया। मैंने उसकी बूर पर हाथ फेरते हुए एक ऊँगली बूर में डाल दी जिससे उसकी सिसकारियाँ निकल पड़ी। धीरे धीरे उसकी बूर से पानी रिसना शुरू हो गया। मैं अपना मुँह उसकी बूर पर रखकर चाटने लगा। कभी कभी अपने जीभ उसके बूर में भी डाल देता जिससे वह चीख पड़ती।

तभी एकदम से भाभी आ गई …

उन्होंने हमें देखा और डाँटने लगी। हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने। भाभी ने कोमल को घर जाने को कहा। कोमल डर के मारे घर चली गई।

भाभी मुझे समझाने लगी।

वो बोली- ऐसे काम किसी भी समय करने के नहीं होते ! यह तो मैं थी ! अगर कोई और आ जाता तो क्या करते तुम दोनों?

तो मैंने पूछा- तो कब करते हैं?

भाभी बोली- रात को !

मैंने सोचा कि भाभी को हमें मिलाने में कोई आपत्ति नहीं है, मैंने तब जान कर पूछा- भाभी, रात को कहाँ?

वो बोली- यहीं पर ! जब तेरे भईया न हो ! वो हफ्ते में एक दिन दिल्ली जाते हैं कम्पनी के काम के लिए ! तब रात को कोमल ही मेरे पास सोती है, तब कर लेना तुम दोनों।

मैंने कहा- ठीक है !

फिर मैं घर चला गया।

अगले दिन जब मैं भाभी के घर गया तो वो बोली- तुम्हारा काम आज रात को हो जाएगा ! तेरे भैया आज ही दिल्ली जा रहे हैं।

तो मैंने कहा- मैं कितने बजे आऊँ?

भाभी ने कहा- दस बजे !

मैंने कहा- ठीक है।

मैंने घर में दोस्त की पार्टी का बहाना बनाया और पूरे दस बजे भाभी के घर आ गया।

भाभी ने मेरे आते ही अन्दर से कुंडा लगा लिया।

मैंने पूछा- भाभी ! कोमल नहीं आई?

वो बोली- उसने कहा था, पर आई नहीं अभी तक !

वो बोली- आ जाएगी ! इतना तड़पता क्यों है?

मैंने कहा- नहीं ! ऐसी कोई बात नहीं ! मैं इन्तज़ार कर लेता हूँ।

मैं और भाभी बातें करने लगे। फिर 11 बजे मैंने भाभी से कहा- भाभी, वो अभी तक नहीं आई?

भाभी बोली- पता नहीं !

तब फ़िर भाभी बोली- लगता है कि वो आज नहीं आयेगी।

तो मैंने कहा- भाभी, मैंने घर में पार्टी का बहाना बनाया है ! कम से कम एक बजे तक मुझे यहाँ रुकना पड़ेगा !

वो बोली- कोई बात नहीं ! तू यही रह जा ! हम दोनों बातें करते हैं !

फिर मैं और भाभी बातें करने लगे।

भाभी ने मुझसे दिन वाली बात पूछते हुए कहा- मैं तो तुम्हें भोला समझती थी ! तुम तो बहुत तेज निकले?

मैंने जानबूझ कर भाभी से कहा- भाभी ! मैंने क्या किया?

तो भाभी मुझे छेड़ते हुए बोली- पन्द्रह-बीस मिनट में तूने उसे बिलकुल नंगी कर दिया और उसकी चूत पर आ गया ? वाह ! तू कमाल है।

तो मैंने शर्म से मुँह नीचे कर लिया।

तो वो बोली- मुझसे क्यों शर्माता है? मैं तेरी भाभी हूँ।

फिर वो बोली- तेरा औजार बहुत बड़ा है ! इतना तो तेरे भाई का भी नहीं।

मैं समझ गया भाभी की बातें !

कि उन्हें मेरा लौड़ा चाहिए !

तो मैं भी शरारती स्वर में बोला- भाभी ! आपको कैसा लगा?

तो भाभी बोली- मेरा दिल तो उसी समय उस पर आ गया था ! मैं चाहती थी कि कोमल को हटा कर वहाँ मैं लेट जाऊँ !

तो मैंने भाभी से कहा- तो रोका क्यों ? आप भी आ जाती !

तो उन्होंने कहा- कोमल के सामने नहीं कर सकती थी ! इसीलिए तुम्हें रात को बुलाया और कोमल को नहीं।

मैंने कहा- तो यह आपकी कारस्तानी थी?

वो बोली- हाँ ! अगर मैं ऐसा न करती तो तू मुझे कैसे मिलता?

फिर मैंने कहा- अब मैं कोमल को कैसे चोदूँगा?

तो वो बोली- तू मुझे खुश कर दे ! मैं कोमल को मना दिया करुँगी और बदले में तुम्हें मेरे से भी करते रहना होगा !

मैंने तुरंत कहा- ठीक है भाभी जी ! जैसा आप कहें !

उसके बाद हम दोनों ने शुरु कर दिया। मुझसे बिल्कुल भी रूका ना गया, मैंने उन्हें जल्दी से दोनों हाथों से पकड़ा और बिस्तर पर लिटा दिया और अधीर होकर भाभी के होंठों को चूमने लगा। उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और मैं गर्म हो गया। फ़िर तो मैंने प्रगाढ़ चुम्बन भी किया। मेरा लण्ड तो पूरा सख्त हो गया।

उन्होंने भी मेरे मुँह पर बहुत चुम्बन लिए। उनके मम्मे तो कमीज़ में भी थोड़े थोड़े नज़र आ रहे थे। वो भी गरम हो गए और मेरी चूमा-चाटी उन्हें और गरम करती गई। उन्होंने गद्दा सख्ती से पकड़ लिया और मुझे वो सब करने दिया जो मैं करना चाहता था। मैंने उनकी कमीज़ उतारी और अपनी भी। वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि उनका चेहरा लाल हो रहा था।

मैंने उनकी सलवार उतारी और उनके बड़े बड़े चूतड़ों को दबाने लगा। उन्होंने अपने पूरे बदन की वैक्सिंग की हुई थी, शायद मेरे लिए खास !

उन्होंने अन्दर एक लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी। फ़िर मैंने उसकी पैंटी को भी उतार दिया, क्या मज़ेदार चीज थी उनकी चूत !

उनकी चूत को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और उनकी चूत के होंठ भी गुलाबी थे।

मैंने जैसे ही उनकी चूत को छुआ, वो एकदम से कराह उठी। मैंने धीरे से उनकी चूत में ऊँगली डाली और उसके होंठों को रगड़ा ! उनकी चूत बहुत कसी लग रही थी।

फ़िर मैंने उनकी चूत को चूमा और मुझसे रहा नहीं गया, मैं उसकी चूत को चूसने लगा……

वो पागलों की तरह आवाजें निकालने लगी, पूरा कमरा सेक्सी आवाजों से गूंज रहा था कुछ इस तरह- ऊऊऊह्ह्ह्ह् आआह्ह्ह ऊऊफ़्फ़्फ़् म्म्म्म्स्स्स प्ल्ज्ज धिरेईईईए!

इतने में मुझे अपने लंड पर कुछ महसूस हुआ, उनका हाथ मेरे लंड को टटोल रहा था। मैंने अपनी जींस उतार दी और लंड उनके हाथ में दे दिया। फ़िर उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और नीचे झुक कर मेरे लंड को चूमा और उसे मुँह में ले लिया। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई छोटा बच्चा लॉलीपोप को चूसता है। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। काफी देर तक उन्होंने मेरा लंड चूसा!

फ़िर हम दोनों 69 की पोज़िशन में थे और एक दूसरे को चूस रहे थे। वो 2 बार झड़ चुकी थी।

फ़िर उसने मुझसे कहा- प्लीज़, अब बर्दाश्त नहीं होता फक्क मी वैरी हार्ड ! अपना लंड मेरी प्यासी चूत में घुसा दो।

और फिर मैंने कहा- भाभी ! उल्टी हो जाएँ।

उन्होंने मुझसे कहा- पीछे से चोदोगे मुझे?

मैंने कहा- अब कण्ट्रोल नहीं होता।

उनके मम्मे सोफे पर दब गए और मैं और अपना धैर्य खोते हुए भाभी की कमर पर चूमने लगा, उनकी कमर पर हाथ फेरा, उन्हें मज़ा आया। मैं उनकी कमर पर लेट गया और मेरा लंड उनकी योनि से छू गया। फ़िर सीधा करके उनके चुचूकों को चूसना शुरू किया और पैरों को ऊपर की ओर कर दिया और अपना लंड उनकी चूत में डाला।

क्या तंग योनि थी। फिर भी मैंने आसानी से अंदर किया, थोड़ा गया और उन्हें मज़ा आया। वो आह ऽऽ.. ओह ऽऽ.. औरऽऽ और ऽऽ जैसी आवाजें निकाल रही थी। मैंने और जोर लगाया और पूरा लंड अन्दर डाल दिया, वो चीखी लेकिन उन्होंने मुझे नहीं रोका। मैंने अब अंदर-बाहर, अंदर-बाहर करना शुरू किया।

मैंने उन्हें 20-25 मिनट चोदा, मेरा वीर्य निकल आया और भाभी का भी .. उफ्फ्फ्फ़ क्या दिन था । मैंने सोचा भी न था।

भाभी ने मुझे कहा- अब तुम चूचों के बीच में डालो !

अपना लंड मैंने चूचों के बीच में रख कर आगे-पीछे किया। मुझे बहुत मज़ा आया। मैंने उनके पूरे जिस्म पर चूमा-चाटी की और फिर कपड़े पहने।

फिर जब भी भैया जाते हैं तो हम दोनों खूब मस्ती करते ! मैंने उनको बहुत बार चोदा !

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