मेरा नाम अपूर्व गुप्ता है। मैं दिखने में ठीकठाक लगता हूँ, उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर का रहने वाला हूँ।

बात उन दिनों की है जब मैं इन्टर में पढ़ रहा था। मेरे घर के पास एक अनामिका नाम की एक छुई-मुई सी बहुत सेक्सी प्यारी नाजुक सी लड़की रहती थी। वो रोज सुबह मेरे घर के पास से अपनी बीए की कोचिंग पढ़ने जाती थी, मैं रोज सुबह-सुबह उसको देखता था और वो भी मुझे देखते हुए निकल जाती थी। वो मुझसे दो साल उम्र में भी बड़ी थी और मैं बहुत शर्मीला भी था, जिस वजह से मेरी हिम्म्त नहीं होती थी उससे अपने प्यार का इजहार करने की कि कहीं वो मना ना कर दे। लेकिन एक बात सच है कि वो मुझे बहुत पसन्द थी, मैं उसकी जवानी का दीवाना सा होने लग गया था, उसके दूध एकदम गोल और ना ज्यादा बड़े ना ही छोटे थे, एकदम सही आकार में थे, उन्हें देखकर किसी का भी दिल उसके साथ सेक्स करने का करेगा। उसे देखने के बाद मैं रोज अपने लन्ड को हिलाता था और उसे सोच कर अपना सफेद-सफेद निकाल देता था।

उसके पीछे उसके कालेज के कई लड़के पड़े थे।

एक दिन एक मेरे साथ घटना घटित हो गई, वो रोज की तरह अपनी कोचिंग जा रही थी तो सुबह अचानक आंधी के साथ तेज मेह आ गया जिसकी वजह से वो मेरे घर के फाटक के अन्दर आकर मेरे बगल मे आकर खड़ी हो गई।

तो कुछ देर तो हम यूँ ही खड़े रहे और मैं उसे देखता रहा। फिर वो एकदम से बोली- क्या तुम गूंगे हो?

मैंने कहा- नहीं तो !

तो इतनी देर से चुपचाप गूंगों की तरह क्यों खड़े हो?

मैंने कहा- कुछ नहीं ऐसे ही !

तो वो बोली- तुम रोज सुबह-सुबह क्यों खड़े रहते हो?

तो पता नहीं अचानक मेरे मुँह से निकल गया- मैं रोज सुबह तुम्हें देखने के लिये खड़ा रहता हूँ।

तो उसने मुझे घूरते हुऐ देखा और थोड़ी देर बाद हंस पड़ी और बोली- मतलब?

तो मैंने कहा- कुछ नहीं ! बस ऐसे ही !

तो वो बोली- बताओ ना?

तो मैंने कहा- तुम नाराज हो जाओगी !

तो वो बोली- मैं नाराज नहीं होऊँगी ! हाँ, अगर नहीं बताया तो जरूर नाराज़ हो जाऊँगी।

तो मैंने सोचा कि आज बोल ही दो जो होगा देखा जायेगा, तो मैंने कहा- मतलब कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, आई लव यू !

तो वो बोली- मैंने तुम्हें उस नजर से कभी नहीं देखा।

तो मैंने कहा- अब देख लो, लो सामने खड़ा हूँ, कोई कमी है मुझमें? अगर है तो बताओ !

तो वो बोली- ऐसा नहीं है, मुझे वक्त चाहिए !

तो मैंने कहा- कल मैं इसी समय तुम्हारा यहाँ पर इन्तजार करूंगा और तुम अगर मेरे पास आई और आई लव यू बोली तो ठीक, नहीं तो तुम सीधे अपनी कोचिंग के लिये निकल जाना ! ओ के?

मैं अगले दिन का इन्तेजार करने लगा।

जब अगला दिन आया तो वो आई ही नहीं।

मैं मन मार कर बैठ गया।

मैंने फिर अगले दिन का इन्तजार किया। वो उस दिन आई और मेरे पास आकर खड़ी हो गई और बोली- आई लव यू टू !

फिर मैंने पूछा- तुम कल क्यो नहीं आई थी?

तो वो बोली- मुझे सोचने में ज्यादा समय लग गया, इसलिये नहीं आई कि कहीं मेरी कोचिंग जाने को मेरी ना मत समझ लो ! ओ के? अच्छा, मैं कोचिग जाती हूँ !

तो मैंने कहा- मत जाओ ! मेरे घर के अन्दर चल कर मुझसे बातें करो ना !

तो वो बोली- तुम्हारे मम्मी पापा क्या कहेंगे ?

तो मैंने कहा- वो तो ग्वालियर गये हैं भाई की पढ़ाई के सिलसिले में !

तो वो बोली- ठीक है, चलो !

हम दोनों मेरे कमरे में जाकर बैठ गये और बाते करने लगे और बातों-बातों में पता ही नहीं चला कि हम एक दूसरे के बहुत करीब आ गये थे।

मैंने तब उसे गौर से देखा कि अनामिका उस दिन बला की सुंदर लग रही थी, काले और हरे रंग का सलवार-सूट गजब ढा रहा था, उसके गुलाबी होंठ मुझे हर पल मार रहे थे, उसके गोरे रंग पर काले घने बाल क़यामत लग रहे थे।

तो मैंने हिम्म्त करके उससे पूछा- क्या मैं तुम्हें चूम सकता हूँ?

तो वो बोली- मुझ पर तुम्हारा पूरा हक है।

तो मैं उसे चूमने लगा। चूमते-चूमते मैं अपनी जीभ उसकी जीभ से टकराने लगा और पता ही नहीं चला कि कब मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया।

अनामिका ने अपनी आँखें बंद कर ली और जोर-जोर से सांसें लेने लगी। इसी बीच मैं अपना हाथ धीरे से उसके पेट पर फेरने लगा, फिर हाथ सरकाते हुए मेरा हाथ उसके दूधों तक पहुँच गया और जोर-जोर से सूट के ऊपर से ही उसके दूध दबाने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और फिर मैंने उसके चेहरे को हर जगह चूमा-चाटा। कुछ देर बाद मैं अपने होंठ उसके गले की तरफ़ सरका कर ले गया और उसकी गरदन को चूमने लगा।

फिर मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी तो अन्कू ने मना किया- अब बस ! मैं बहक जाऊँगी !

तो मैंने कहा- आज मत रोको ! बहक जाने दो !

फिर मैंने उसका कमीज़ ऊपर से खींच कर निकाल दिया। फिर मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके दूधों को प्यार से दबाने लगा और अनामिका सिसकारियाँ लेने लगी। कुछ देर बाद मैंने उसकी पीठ की तरफ़ हाथ ले जाते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।

और फिर मैं उसके दूधों को अपने दोनों हाथों में लेकर प्यार से मसलने लगा। फिर मैंने अपने हाथ नीचे सरकाए और उसकी सलवार में पैन्टी के अन्दर हाथ डाल दिया और सहलाने लगा। वो सिसकारने लगी।

फिर अनामिका ने मेरा लंड जींस के ऊपर से ही सहलाना चालू कर दिया था। मेरा लंड जींस को फाड़ कर बाहर आने को फड़फड़ाने लगा।

फिर मैंने अपनी जींस खोल दी और अन्डरवीयर उतार फेंका। मेरा 7″ का लंड अब पूरे दम से खड़ा था। फिर मैंने अनामिका की पैंटी भी उतार फेंकी। अनामिका की चूत एक नन्हे गुलाब की पन्खुड़ी के समान कोमल और रस से भरी हुई सी लग रही थी। अब हम एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुके थे।

तभी मैं नीचे बैठ गया और अनामिका की चूत पर एक गहरा चुम्बन दिया।

अनामिका का पूरा बदन झूम उठा।

फिर मैंने अपने उंगली से अनामिका की चूत को बहुत सहलाया और काफी देर तक दुलारता रहा। अनामिका तो जैसे इस दुनिया में ना होकर किसी और ही दुनिया में चली गई हो।

मैंने अनामिका के सारे बदन को चूमा और अनामिका मेरे बालों को सहलाती जा रही थी।

फिर अनामिका जोर जोर से सिसकियाँ भरने लगी और उसने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और 7-8 मिनट तक उसने मेरा लन्ड चूसा।

और फिर अनामिका का धीरज जवाब दे गया और वो लेट गई और उसने अपनी दोनों टांगों को फ़ैला और उसने मेरे लिये जन्नत का रास्ता खोल दिया, बोलने लगी- जानू, अब तो मेरे अन्दर समां जाओ जल्दी ! मैं और इन्तजार नहीं कर पाऊंगी !

तो मैंने अपना 7″ का लंड अनामिका की चूत के ऊपर रखा और धीरे से धक्का दिया तो लंड धीरे धीरे अन्दर जाने लगा। अनामिका के मुँह से आःह निकल पड़ी और आँख से आँसू !

मैंने देखा कि उसकी चूत से खून निकलने लगा था।

फिर मैं अपना लंड धीरे धीरे अन्दर-बाहर करने लगा। बीच-बीच में दूधों को चूम लेता और चूस लेता। कभी कभी होटों को चूम लेता।

कुछ देर बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और जोर जोर से चोदने लगा। अनामिका अपनी कमर को ऊपर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी, करीब आधे घंटे बाद मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी और तेजी से चोदने लगा।

फिर मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

फिर हम नहाने के लिये जाने लगे तो वो ठीक से चल नहीं पा रही थी। मैं उसे पकड़ कर बाथरूम में ले गया। हम दोनों नहाए।

नहा कर कुछ खाना खाया और वो अपने घर चली गई।

अब जब भी मौका लगता हम सेक्स करते और मजा लेते !

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